कितना ताकतवर है बिहार चुनाव में 10,000 का दांव?

“दस हजार रुपये में क्या होगा? आप ही बताइए कौन-सा रोजगार  इतनी रूपया में हो जाएगा? पशुपालन और कृषि से संबंधित काम के लिए अपनी जमीन होनी चाहिए। हमारे पास तो वो भी नहीं है। खाली जीविका-जीविका मत कीजिए, हमें रोजगार दीजिए। बच्चों को नौकरी दीजिए और महंगाई कम करिए।” आरा के मुहम्मदपुर की रहने वाली सरिता देवी बताती है।

“मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10,000 रुपये मिला है। जिससे मैं सिलाई मशीन खरीदी हूं। सिलाई मशीन के अलावा उस दुकान में मौसमी व्यवसाय भी करूंगी। सरकार इस तरह मदद करे तो हम लोग आगे बढ़ेंगे।” पटना जिला के नौबतपुर की रहने वाली रूबी कुमारी प्रेस कांफ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री जी की उपस्थिति में बताती है।

सरिता और रुबी की तरह जीविका से जुड़ी बिहार की महिला दो अलग-अलग मत के साथ मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का समर्थन और विरोध कर रही है। गौरतलब है कि नीतीश सरकार मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 1.40 करोड़ जीविका दीदियों को अपने पसंद की आजीविका शुरू करने के लिए दस-दस हजार रुपये की आर्थिक सहायता दिये जाने को खूब जोर-शोर से प्रचारित कर रही है।

नीतीश सरकार ने 2007 में बिहार ग्रामीण आजीविका परियोजना शुरू किया। इसी को स्थानीय भाषा में जीविका कहा जाता है।

एक तरफ एनडीए गठबंधन की तरफ से जीविका दीदियों के खाते में सीधे 10,000 रुपये की मदद भेजने से महिला मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश की जा रही है वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने जीविका दीदियों को हर महीने 2500 रुपये की सहायता देने के साथ-साथ समूहों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली कम्युनिटी मोबालाइजर को पक्की नौकरी देने और उन्हें 32 हजार रुपये देने की घोषणा की है।

महागठबंधन के संकल्प पत्र में भी इसका स्पष्ट उल्लेख किया गया है। इसलिए इस घोषणा को विपक्षी दल राजद की ‘माई बहन मान योजना’ के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।

पलायन और बेरोजगारी के मुद्दे पर काम कर रहे हैं प्रशांत बताते हैं कि,”दस हजार रुपए में कौन सा स्वरोजगार शुरू होगा? 2 लाख तक देने की जो बात कही गई है। इसके लिए कई सरकारी संघर्ष से गुजरना होगा। यह सिर्फ चुनावी वोट पाने का वादा भर है। रोजगार और कंपनी के बदले ₹10000 ले लीजिए।”

10 हजार रुपये देने के मामले में कार्रवाई करे आयोग

नीतीश सरकार ने 26 सितंबर को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की शुरुआत की। इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में 75 लाख जीविका दीदियों को दस-दस हजार रुपये उनके खाते में भेजे गए। तीन अक्टूबर को 25 लाख महिलाओं को दस-दस हजार दिए गए। 

फिर विधानसभा चुनाव की घोषणा के पहले छह अक्टूबर को 21 लाख महिलाओं को सहायता राशि दी गई। इस योजना के तहत आचार संहिता लागू होने के बाद भी 17, 24 एवं 31 अक्टूबर को महिलाओं के खाते में रुपये भेजे गए हैं। अगली किस्त देने की तिथि 7 नवंबर को तय की गई है। यानी दूसरे चरण के मतदान के 4 दिन पहले दी जाएगी।

आचार संहिता लागू होने के बाद महिलाओं के खाते में रुपये भेजने पर राजद के राज्यसभा सदस्य प्रो. मनोज झा ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को जारी रखने पर राज्य सरकार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखे पत्र में उल्लेख किया गया है कि यह आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का गंभीर मामला है।

इससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होगी साथ ही यह निष्पक्ष और भयमुक्त मतदान की धारणा को भी प्रभावित करती है। राज्य में छह अक्टूबर से आचार संहिता लागू है। इस अवधि में कोई सरकार चुनावी लाभ के लिए जन -धन का उपयोग नहीं कर सकती है।

Leave a Reply