राजनाथ के झूठ के पीछे का सच!

सतही तौर पर देखने पर तो ऐसा प्रतीत होता है कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री के बारे में श्रीमान ने जो अनर्गल और झूठा प्रलाप किया है वह संघ और भाजपाई विचारों को पुष्ट करने की एक नई कारिस्तानी है। जिसको लोग एक सामान्य और सरसरी घटना के रुप में देख रहे हैं। इससे इतर कुछ समाजवादी विचारधारा के लोग उन पर इस बहाव में बह जाने की बात कर रहे हैं। 

जबकि ये दोनों बातें उनके पूर्ववर्ती आचरण को देखकर समझना चाहिए।अब तक उन्होंने एक केंद्रीय रक्षामंत्री की हैसियत से भी कभी कोई सच्चा बयान नहीं दिया। वे मोदीजी की भाषा ही बोलते कम किंतु आचरण में करते दिखाई दिए हैं। आपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी बहुत फजीहत हो चुकी है इसे वे भली-भांति जानते हैं।

अब आइए इस बात पर गौर करें उन्होंने अपने मुखारबिंद से पहली बार खुलकर पंडित जवाहरलाल नेहरू जी पर जिस तरह अल्पसंख्यकों के पक्षधर होने का इल्ज़ाम लगाया है और इसमें तत्कालीन गृहमंत्री बल्लभभाई पटेल को शामिल किया है, वह सरासर झूठ है इसका कोई प्रमाणिक दस्तावेज उनके पास नहीं है और होगा भी कैसे?

तब बाबरी मस्जिद सही सलामत थी उसमें बाकायदा नमाज़ पढ़ी जाती थी। मरम्मत के लिए पैसे की बात कहकर वे बुरी तरह फंस गए। जबकि सत्य यह है कि एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र प्रमुख नेहरू ने कभी भी कहीं किसी धार्मिक संस्थान को एक फूटी कौड़ी भी नहीं दी। ये बात वे स्वत: कह रहे हैं कि सोमनाथ मंदिर को सरकारी खजाने से कोई राशि नहीं दी गई।

भाजपा शासन काल के पहले ना तो कभी सरकार ने किसी मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा के ट्रस्ट के काम में दखल दिया और ना ही कारीडोर वगैरह बनाकर वहां कारपोरेट के बाजार बनाए, ना ही सरकारी धन से मदद की है।

बहरहाल, झूठों का मुंह काला। आइए अब जानते हैं राजनाथ के इस सफेद झूठ के पीछे का राज। सूत्र बता रहे हैं कि राजनाथ सिंह को लग रहा है कि मोदी अब ज्यादा समय प्रधानमंत्री नहीं रह पाएंगे या तो वे किसी अदालती कार्रवाई का शिकार होंगे या उनकी बैसखियाँ टूट जाएंगी।

ऐसी स्थिति में वे अपनी बुजुर्गियत और संघ की गुलामी के अल्प समय के लिए ही सही पारितोषिक के तौर पर पीएम बनने की तमन्ना रखते हैं चूंकि वे उत्तर प्रदेश से हैं जो बड़ा प्रदेश है। ज़्यादातर प्रधानमंत्री वहीं से बनाए गए हैं। इसलिए वह नेहरू जैसे कर्मठ, कर्तव्य निष्ठ, धर्मनिरपेक्ष प्रधानमंत्री को मंदिर मस्जिद प्रसंग में ले आए हैं। ताकि संघ के नेहरू गांधी विरोधी एजेंडा में वे हाशिए पर ना पड़े रह जाएं।

हम सभी भलीभांति यह जानने लगे कि भाजपा और संघ में ऐसे लोगों की पूछ-परख होती है, वे पदों से सम्मानित होते हैं जो गांधी नेहरू विरोध में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। जनमानस में उनकी छवि धूमिल करने झूठ और प्रभावी किस्सा गढ़ते हैं।

राजनाथ सिंह ने भी ऐसा ही झूठा किस्सा परोस दिया है लेकिन इसके ख़िलाफ़ सोशल मीडिया में जिस तरह आवाज़ उठ रही है, लगता है राजनाथ सिंह का यह झूठा बयान उन्हें जनमानस की नज़र में बुरी तरह गिराएगा। इस बीच ये भी अनुमान है कि यह बयान उनसे जबरन दिलाया गया है। ताकि उनकी छवि को विकृत किया जा सके। सब कुछ संभव है आजकल किंतु राजनाथ सिंह कोई छोटे बच्चे तो नहीं है जो इस तरह की हरकत करेंगे।

इसलिए लगता तो यही है कि वे नेहरू का विरोध करने वालों की भीड़ में अग्रणी पंक्ति में आने इसलिए उत्सुक हैं ताकि वे पीएम पद के काबिल माने जाएं।

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