गज़ा के लिए अफसोस और गुस्सा!

मुझे गज़ा को लेकर अफसोस है। 

यह कोई गहरी सोच नहीं है, न ही यह असामान्य सोच है – खासकर दक्षिण अफ्रीका में, जहां मैं इधर काम कर रहा हूँ – और यह मेरे लिए नई सोच भी नहीं है। 

पर यह एक ईमानदार सोच है। 

मुझे अफसोस होता है कि हजारों लोगों के मारे जाने के बावजूद फिलिस्तीन अभी आजाद नहीं है। 

मुझे अफसोस होता है कि कम से कम 270 पत्रकार मारे गए हैं, मृत पत्रकारों के साथियों में बचे अब भी नरक में रह रहे हैं जो उतना ही घातक और अवसादपूर्ण है – और मृत पत्रकारों के भुतहा इंस्टाग्राम अकाउंट और भी मौतों की घोषणा कर रहे हैं, जैसे होसम शब्बत के इंस्टा ने हाल में उनके भाई हसन की मौत की घोषणा की। 

मुझे अफसोस होता है कि दुनिया के सबसे बड़े, घने आउटडोर जेल में बंद किए जाने के बाद, लगभग 20 लाख फिलिस्तीनी अब भी दुनिया के सबसे बड़े, घने आउटडोर जेल में रह रहे हैं… फर्क सिर्फ यह है, जैसा कि इस्राइल के सैन्य प्रमुख ट्रम्प की निर्देशित नई, छोटी “येलो लाइन” नियंत्रित करने के बारे में शेखी बघारते हैं, गज़ा के फिलिस्तीनी 6 अक्टूबर 2023 के मुकाबले आधी जगह में ठुँसे हुए हैं। 

मुझे अफसोस होता है कि पिछले दो सालों में फिलिस्तीनियों के गज़ा में पाँच, दस, पंद्रह, बीस बार विस्थापित होने के बाद, हाल की बारिश में 53000 से ज्यादा शिविरों में बाढ़ आ गई और 13 इमारतें ढह गईं, जिससे और मौतें हुईं, बीमारियाँ फैलीं और दुर्दशा हुई। 

मुझे अफसोस होता है कि यातनाएं दिए जाने, भुखमरी झेलने और चिकित्सा सुविधा से वंचित किए जाने वाले फिलिस्तीनियों को अब पोषण मुहैया कराने के लिए उनकी अपनी जमीन पर खेती करने के सुख और लाभों से वंचित किया जा रहा है – जमीन जो अमरीका में बने बमों से अपना उपजाऊपन खो चुकी है, इस्राइल के और सैन्य कब्जे से कट गई है। 

मुझे अफसोस होता है कि हर विश्वविद्यालय तबाह किए जाने के बाद और 200 प्रोफेसरों के मारे जाने के बाद, फिलिस्तीनियों को अब भी अस्थायी शिविरों में पढ़ना और पढ़ाना पड़ रहा है। 

मुझे अफसोस होता है कि इस्राइल ने सीज़फायर के बाद आधिकारिक रूप से कम से कम 370 लोगों को मार डाला है, जबकि सीएनएन और न्यू यॉर्क टाइम्स कहते जा रहे हैं कि सीज़फायर को “जांचा” जा रहा है, दूसरी ओर, इस्राइल किसी को भी बेरोकटोक मार रहा है और कह रहा है कि वह शायद ही कभी अदृश्य येलो लाइन के दूसरी तरफ गया हो – लाइन जो उनकी जमीन में है! – हालांकि गज़ा में मेरे मेडिकल संपर्क मुझे कहते हैं “यह सीज़फायर पिछले सीज़फायर से भी कम सीज़फायर है।” 

मुझे अफसोस होता है कि कुपोषण का पता चलने के बाद भी 9300 बच्चों को मदद नहीं दी जा रही है और कमाल अदवान अस्पताल के निदेशक हुसम अबू साफिया जैसे एक समर्पित फिज़िशन, जो 10 महीने पहले अपहरण होने और बंधक बनाए जाने तक अपने मरीजों का उपचार कर रहे थे – को उन बच्चों को देख नहीं पा रहे।

मुझे अफसोस होता है कि एक महिला, सारा हर्विट्ज़, जिसने वह तहरीर लिखी जो बराक ओबामा के मुंह से निकली, बच्चों की परवाह किए बिना लोगों के बीच बार-बार सहजता से जाती हैं, और शिकायत करती हैं कि “मृत बच्चों की दीवार” के पार इस्राइल का बचाव करना कितना मुश्किल है।   

मुझे अफसोस होता है कि उनका प्रस्तावित समाधान नरसंहार की मशीन बंद करना नहीं है जिसने बच्चों (अब तक 65000) को मारा है और अभिभावकों को मारकर 40000 को अनाथ बनाया है। समाधान, ओबामा की शब्दकार, के अनुसार उन अमरीकी बच्चों से सेल फोन छीन लेना है जो सोशल मीडिया पर यह कोहराम देख रहे हैं और स्तब्ध हैं।

मुझे गुस्सा आता है बराक ओबामा पर कि वह इस अश्लीलता पर कुछ बोल नहीं रहे और चुप रहकर उसका अनुमोदन कर रहे हैं। और मुझे गुस्सा आता है हिलेरी क्लिंटन पर कि वह इस नरसंहार का दोष सोशल मीडिया पर डाल रही हैं। उनके दावे इतने भयावह थे कि ज़ेटियो के प्रेम ठक्कर ने कहा कि लेमकिन इंस्टिट्यूट फॉर जेनोसाइड प्रीवेन्शन (नरसंहार शब्द गढ़ने वाले हालकॉस्ट सर्वाइवर राफेल लेमकिन के नाम पर है यह संस्थान) ने “क्लिंटन की टिप्पणियों को “जेनोसाइड डिनायल” कहा है, अमरीका में युवा इतने मूर्ख या भोले नहीं हैं। वह सीधे नरसंहार को ना कहते हैं। मंत्री को भी सीधे यही करना चाहिए।” 

क्लिंटन ने पूछा था, “उन्हें जानकारी कहाँ से मिलती है? उन्हें जानकारी सोशल मीडिया, खासकर टिक टॉक से मिलती है।” “बिल्कुल, लेकिन उन्हें जानकारी अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक अदालत (आईसीजे) से भी मिलती है, जिसने जनवरी 2024 में निर्णय दिया था कि ऐसा “संभाव्य” मामला बनता है और फिलिस्तीनियों को नरसंहार से बचाए जाने की जरूरत है।

और भले दक्षिण अफ्रीका के मुकदमे में इस्राइल के अपने सैनिकों के युद्ध अपराध स्वीकार करने के क्लिपिंग वाले टिक टॉक वीडियो शामिल थे, आईसीजे का 14-1 निर्णय उसके अध्यक्ष, अमरीकी न्यायाधीश जॉन ई डोनोघुने ने पढ़ा था, जो 2010 में तत्कालीन मंत्री क्लिंटन द्वारा आईसीजे के लिए नामांकित किए गए थे। इसलिए जब क्लिंटन कहती हैं कि उनके द्वारा नियुक्त किए शख्स की अदालत में वीडियो “फर्जी” हैं तो या तो वह झूठ बोल रही हैं, हमें मूर्ख बना रही हैं या दोनों बातें कर रही हैं।    

जो भी हो, मुझे गुस्सा आ रहा है। 

मुझे गुस्सा आ रहा है कि गज़ा में कम से कम 126 संयुक्त राष्ट्र कर्मचारी मारे जाने के बाद – जो इस संस्था के 80 साल के इतिहास में किसी और युद्ध से ज्यादा हैं – और तुरंत सीज़फायर के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंटोनियो गुटेरेस द्वारा आठ दशक में केवल तीसरी बार अनुच्छेद 99 का हवाला दिए जाने के बाद, और संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली द्वारा सीज़फायर के लिए भारी बहुमत से वोट के बाद, और अमेरिका (अपने अश्वेत ओवरसियर, राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड और रॉबर्ट वुड के जरिए) सुरक्षा परिषद के सीज़फायर प्रस्ताव को बार-बार वीटो करने के बाद, सुरक्षा परिषद ने “ट्रम्प शांति योजना” पर वोट दिया जो फिलिस्तीनियों को 6 अक्टूबर, 2023 को झेल रहे अपमान, पुलिसिंग और (तेज़ और धीमी गति वाले) नरसंहार से भी ज़्यादा अपमान, पुलिसिंग और नरसंहार का शिकार बनाता है।

मुझे गुस्सा आ रहा है कि पहली बार करने के 77 सालों बाद संयुक्त राष्ट्र एक बार फिर फिलिस्तीनियों को औपनिवेशक शासन की तरफ धकेल रहा है, उन्हें उनका आत्माधिकार नहीं दे रहा और वैश्विक शक्तियों को गज़ा जातीय सफाये के आरोप से बरी कर रहा है। 

मुझे गुस्सा है कि जहां अमेरिका वर्षों तक सीज़फायर प्रस्तावों को वीटो करता रहा, न तो चीन ने और न रूस ने (रूस यूक्रेन में अमेरिका से छद्म युद्ध में लगा था) “शांति योजना” के इस शर्मनाक ढोंग को वीटो नहीं किया।

मुझे अफसोस है कि गज़ा की भयावहता पश्चिम में कम देखी जा रही है, इसलिए नहीं कि अब कुछ हो नहीं रहा (जिससे कि मुझे खुशी ही होती) लेकिन क्योंकि मेटा और यू ट्यूब सालेह अलजफरावी जैसे मारे गए पत्रकारों के कार्य को नष्ट कर रहे हैं (और उत्पीड़न का दस्तावेजीकरण करने वाले वीडियो हटा रहे हैं), हिलेरी क्लिंटन तो सिर्फ टिक टॉक को यहूदी बनाने की योजना में एक खिलाड़ी हैं और क्योंकि होसम शबत, अनिस अल शरीफ और 270 अन्य रिपोर्ट करने के लिए जिंदा ही नहीं बचे हैं। 

और जहां पिछले कुछ सालों से फिलिस्तीन के लिए खड़े होने में मुझे किसी भी तरह का अफसोस नहीं है, मैं दुखी हूँ और गुस्सा हूँ कि हम में से कई – कर्मचारियों, छात्रों, शिक्षकों और लेखकों – ने अपने करिअर और आजीविकाएं, घर और राष्ट्र त्यागे हैं और इसके बावजूद गज़ा 6 अक्टूबर 2023 से ज्यादा घेरेबंदी में है।

लेकिन, कुछ ऐसा भी हुआ है जिसने मुझे गुस्सा तो दिलाया पर उम्मीद भी दी: 

नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के ट्रम्प के साथ समझौते ने। 

मुझे निलंबित करने, मुझे कार्यकाल देने से इनकार करने, काफी सारे स्टाफ को निकालने और 300 छात्रों के प्रवेश को ब्लॉक करने के बाद नॉर्थवेस्टर्न ने 75 मिलियन डॉलर का जुर्माना भरने की हामी दी ताकि ट्रम्प की तरफ से फ्रीज़ किए गए 790 मिलियन डॉलर वापस पा सके। 

इसे “आत्मसमर्पण” कहना गलत होगा, विश्वविद्यालय यह मामले जीत रहे हैं, लेकिन नॉर्थवेस्टर्न, कॉर्नेल (भुगतान : 60 मिलियन) और कोलम्बिया (भुगतान : 200 मिलियन) “आत्मसमर्पण” नहीं कर रहे। ट्रम्प जो कर रहे हैं, यह स्कूल बोर्ड उसे पसंद करते दिखते हैं, उनके एजंडा से खुश हैं और भुगतान को परेशान करने वाले फैकल्टी विरोध और छात्र विरोध प्रदर्शनों, ट्रांसजेंडेर यूथ हेल्थकेर से छुटकारा पाने पर खर्च किया पैसा मान रहे हैं।

(यह भी उल्लेखनीय है कि इनमें से दो स्कूल, कोलम्बिया और नॉर्थवेस्टर्न देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित पत्रकारिता स्कूल चलाते हैं और उनके डीन जेलानी कॉब और चार्ल्स व्हिटकेर इनके मुखिया बने हुए हैं जबकि उनके विश्वविद्यालयों ने न केवल अपने छात्रों को, बल्कि 34 करोड़ अमरीकियों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सभा की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकारों को कम आँका है। कॉर्नेल, कोलम्बिया और नॉर्थवेस्टर्न के निदेशक मण्डल युद्ध के पैरोकारों से भरे हैं जिनके मुनाफ़ों को छात्र विरोध प्रदर्शनों से खतरा है। 

और जब विरोध की बात आती है, नॉर्थवेस्टर्न ने प्रबंधन अमेरिकी सरकार को आउटसोर्स कर दिया है। विश्वविद्यालय “कॅम्पस में उन जगहों को छोड़कर जो नॉर्थवेस्टर्न ने चिन्हित की हैं, प्रदर्शन पर रोक जारी रखेगा जिसमें फ्लायार, बैनर, चाक से लिखना और 3-डी इन्स्टलैशन शामिल हैं।” और भयावह है कि “नॉर्थवेस्टर्न इन नीतियों या प्रक्रियाओं में कोई संशोधन या सुधार सहायक अटर्नी जनरल की मंजूरी के बिना नहीं करेगा।”

जब मैंने डीरिंग मेडो – जो विश्वविद्यालय ने 1970 में केंट एण्ड जैक्सन स्टेट यूनिवर्सिटी में मारे गए छात्र प्रदर्शनकारियों को समर्पित किया था – पर नॉर्थवेस्टर्न के गज़ा पड़ाव को एकजुटता “हमारा कार्य प्रेम है” भाषण दिया, मैंने छात्रों को उनकी बहादुरी के लिए बधाई दी क्योंकि एक तरह से कब्जे का एक औपनिवेशिक युद्ध उनके लॉन पर हो रहा था। साम्राज्य ने न सिर्फ हमारे प्रयासों पर पलटवार किया है बल्कि आपके घरों के बहुत करीब हमला किया है। और जब विश्वविद्यालय साम्राज्यवादी युद्ध स्थल बन गया, प्रशासन बजाय आपका, शांति के पैरोकारों का साथ देने के युद्ध पिपसूओं के साथ खड़ा था।”

और यह कितना सच था। पाँच दिवसीय पड़ाव छात्रों और विश्वविद्यालय के बीच “डीरिंग मेडो करार” के साथ समाप्त हुआ, और हालांकि करार पर वार्ता में मेरी कोई भूमिका नहीं थी, समझौता अच्छी नियत से किया गया था और इसका नतीजा मामूली फ़ायदों में हुआ। और आश्चर्यजनक नहीं था कि स्वदेश मामलों में किए गए समझौतों से मुकरने की अमरीकी सरकार की पुरानी परंपरा के अनुसार थैंक्स गिविंग सप्ताहांत पर, समझौता फाड़ दिया गया। 

लेकिन मुझे दुखी करने और गुस्सा करने के बजाय, नॉर्थवेस्टर्न की कार्रवाई ने गुस्से के साथ उम्मीद भी दी। जैसा कि ऑड्रे लॉर्ड कहती हैं, “गुस्सा जानकारी और ऊर्जा से भरा होता है।” 

और नॉर्थवेस्टर्न पर मेरे गुस्से ने खुलासा किया कि छात्र वास्तव में कितने शक्तिशाली थे और हम सब कितने शक्तिशाली हैं जो गज़ा को लेकर अब तक दुखी और गुस्से में हैं। 

क्या साम्राज्य पलटवार करेगा? हाँ। 

लेकिन ऐसा यह हताशा में कर रहा है। 

उल्लेखनीय है कि फिलिस्तीन के साथ लोगों का खड़े होना अमेरिकी सरकार के लिए इतना डरावना है कि नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी में मुझसे छुटकारा पाना, स्टाफ को निकालना काफी नहीं था और न तो 300 छात्रों को कक्षाओं से बाहर रखकर विश्वविद्यालय का अपने टीचिंग मिशन से मुंह मोड़ना और न ही अनुसंधान को ट्रम्प के हवाले कर अपने अनुसंधान मिशन से दगा करना। नहीं, इनमें से कुछ भी काफी नहीं था: दुनिया में सबसे बड़ी सैन्य ताकत को 18 महीने पहले का समझौता फाड़ना और कॅम्पस पर छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के मामले को फेडरल पॉलिसी का मामला बनाना। 

अब, सवाल जैसे कि “क्या कोई छात्र क्रेस्ज हॉल में फ्लायर लगा सकता है? या क्या वह अपने ब्लूटूथ स्पीकर चालू कर सकते हैं जब कह रहे हों, “जलवायु परिवर्तन रोको!” क्या राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले हैं।

सत्तारूढ़ वर्ग परेशान है कि छात्र फ्लायर कहां लगाएं क्योंकि वह डरे हुए हैं जबकि हम शक्तिशाली हैं।

और यही कारण है कि मैं उम्मीदज़दा क्यों हूं, जबकि यह मैं जोहांसबर्ग से लिख रहा हूं जहां दक्षिण अफ्रीकी नस्लवाद रियर व्यू मिरर में (कम से कम कागज पर) है।

भले ही हमारी सरकारें ऐसा न करें, लेकिन दुनिया के लोग पूरी तरह से फिलिस्तीन के समर्थन में हैं। इज़राइल का समय सीमित है। और यह पिछले दो (और 77) सालों के खून, गोलीबारी, ज़ख्मों और कुर्बानियों से हासिल हुआ है।

अब, दुनिया के लोगों को इजरायल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग थलग करना चाहिए उसी तरह जैसे दुनिया के लोगों ने 80 के दशक में दक्षिण अफ्रीका को अलग थलग किया था: कूटनीतिक तौर पर, सांस्कृतिक तौर पर। हमें अपने दुख को लेकर हमारी सरकारों के पास ले जाना चाहिए। और, यदि यह विफल हो तो फीफा और यूरोविज़न और विश्वविद्यालयों और कारोबारों तक जाना चाहिए जब तक इजरायल अपने नरसंहार के मिशन में वित्तीय, आर्थिक और राजनीतिक तौर पर घायल न हो जाए जैसे हमारे दिल इस समय छलनी हैं।  

इसलिए, अफसोस करें। यह पूरी तरह तार्किक है। गुस्सा करें। यह पूरी तरह सही है। 

और फिर, उन्हें हर सरकार, बिज़नेस और न्यूज़ ऑर्गनाइज़ेशन के खिलाफ दबाव बनाने में हमारा साथ देने दें, जो इन अत्याचारों में शामिल हैं… जब तक कि फ़िलिस्तीन आज़ाद नहीं हो जाता।

(स्टीवन डब्ल्यू. थ्रैशर का लेख लिटहब से साभार। अनुवाद : महेश राजपूत। मूल लेख यहाँ पढ़ सकते हैं।)

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