नई दिल्ली। अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला करने के बाद राष्ट्रपति मदुरो और उनकी पत्नी को अपने कब्जे में ले लिया है। अमेरिकी सूत्रों की मानें तो मदुरो और उनकी पत्नी को अमेरिका ले आया गया है। यह घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट के जरिये की है। बताया जा रहा है कि रात में जब पूरा वेनेजुएला सो रहा था उसी समय अमेरिका की स्पेशल फोर्सेज ने वेनेजुएला पर अचानक हमला बोल दिया। इस हमले में सैन्य और नागरिक समेत कई जगहों पर बमबारी की खबरें हैं जिसमें कई नागिरकों के हताहत होने की भी आशंका है। हालांकि अभी तक इसकी कोई संख्या सामने नहीं आ पायी है।
इस बीच वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रॉड्रिग्ज का कहना है कि सरकार मदुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स के बारे में कुछ नहीं जानती है। उन्होंने एक आडियो संदेश में कहा कि मदुरो और उनकी पत्नी के जिंदा होने का अमेरिका को सबूत देना चाहिए। वेनेजुएला के रक्षा मंत्री ने कहा है कि उनका देश समर्पण करने नहीं जा रहा है और वो आखिरी सांस तक लड़ेगा। इस बीच वेनेजुएला में विपक्ष की नेता मारिया कोरिना ने कहा है कि वह सत्ता संभालने के लिए तैयार हैं।
दूसरे देशों ने इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं जाहिर की है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह हमला पूरी तरह से अवैधानिक है। हमले से पहले न तो सुरक्षा परिषद की सहमति ली गयी और न ही किसी अंतरराष्ट्रीय नियम का पालन किया गया। चीन ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं जाहिर की है। लेकिन कल ही चीन के विदेशी दूत के तौर पर एक राजनयिक ने मदुरो से मुलाकात की थी। ईरान ने इस हमले की निंदा की है।
दक्षिण अफ्रीका में वेनेजुएला के राजदूत कारलोस फियो एसेविडो ने कहा है कि यह पूरी तरह से अमेरिका द्वारा राष्ट्रपति मदुरो का अपहरण है। उन्होंने कहा कि हमारे संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए अमेरिका द्वारा हमारे लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की गयी है।
ब्राजील के राष्ट्रपति लूला ने कहा है कि अमेरिकी कार्रवाई एक अस्वीकार्य रेखा को पार कर गयी है। यह दुनिया को हिंसा, अराजकता और अस्थिरता की तरफ ले जाने की दिशा में पहला कदम है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भीषण और खतरनाक नजीर है।
जबकि ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर ने सफाई पेश करते हुए कहा है कि इस आपरेशन में इंग्लैंड किसी भी रूप में शामिल नहीं है। पीएम स्टार्मर ने अभी तक वेनेजुएला के मसले पर ट्रम्प से बात नहीं की है। उन्होंने कहा कि हमें अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करना चाहिए।
यूरोपियन यूनियन की विदेश नीति मामलों की चीफ काजा कलास ने कहा है कि ब्लॉक बेहद नजदीकी से वेनेजुएला पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि उनकी अमेरिकी रक्षा मंत्री मारको रूबियो से बात हुई है। उन्होंने कहा कि ईयू बार-बार दोहराता रहा है कि मदुरो ने वैधता खो दी है और हमने हमेशा शांतिपूर्ण संक्रमण की रक्षा की है। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि किसी भी हालत में अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएन चार्टर के सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए। हम एहतियात बरतने की अपील करते हैं।
क्यूबा ने अमेरिकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। और इसे सरकारी आतंकवाद करार दिया है। एक बयान में उसने कहा है कि शांति के क्षेत्र पर बर्बर तरीके से हमला किया गया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अमेरिका के इस आपराधिक कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देने की अपील की गयी है।
स्पेन के विदेश मंत्रालय ने तत्काल मामले को शांत करने और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की मांग की है। इसके साथ ही उसने मामले में मध्यस्थता करने का प्रस्ताव दिया है।
इटली की प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी ने कहा है कि वह नजदीक से वेनेजुएला की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। वहां रहने वाले अपने नागरिकों की खोज-खबर ले रही हैं। इस सिलसिले में अपने विदेश मंत्री से संपर्क में हैं।
दरअसल वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। इसके अलावा गैस की भी अच्छी खासी मात्रा उसके पास है। अमेरिका की नजर इसी संसाधन पर है और वह उस पर किसी भी हालत में कब्जा चाहता है।
वेनेजुएला में आगे क्या होगा इसको लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। मदुरो की सेना का क्या रुख होगा इसको लेकर अभी तक उसकी तरफ से कोई बयान नहीं आया है। विपक्ष की नेता मारिया कोरिना माचादो कुर्सी संभालने के लिए बिल्कुल तैयार हैं। विशेषज्ञों के एक हिस्से का मानना है कि देश गृहयुद्ध की स्थिति में जा सकता है।
भारत में भी इस हमले का विरोध शुरू हो गया है। विशाखापटनम में ट्रेड यूनियन सीटू के नेतृत्व में हजारों मजदूरों ने जुलूस निकालकर वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले का विरोध किया गया। कल कम्युनिस्ट पार्टियों की ओर से संयुक्त रूप से इसके खिलाफ जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन रखा गया है।
(जनचौक डेस्क की रिपोर्ट।)