भाजपा को इतनी भी जल्दी क्यों थी?

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेता महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की, असामयिक विमान दुर्घटना में मौत से शोकाकुल परिवार अभी अभी तो आहत हुआ था। चिंता की राख ठंडी भी नहीं हुई थी कि भाजपा ने उनकी पत्नी सुनेत्रा  को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ भी दिला दी। ऐसा तो पीएम पद पर होते देखा गया है क्योंकि बिना पीएम देश नहीं होता। उसके वैकल्पिक पद का संविधान में कोई प्रावधान नहीं है। जहां तक परिवार की बात है तो इंदिरा जी की शहादत की घोषणा होने से पूर्व ही उनके पुत्र सांसद राजीव गांधी को देश की बागडोर सौंपने का फैसला केबिनेट ने लिया था। उन्हें प्रधानमंत्री चुना और शपथ दिलाई थी।

लेकिन उपमुख्यमंत्री पद पर इतनी जल्दी शपथ ग्रहण के पीछे कोई वजह तो अवश्य है। समझा जा रहा है कि अजीत पवार शीघ्र ही भाजपा से अलग होकर अपने परिवार की पार्टी से जुड़ने का मन बना चुके थे इसीलिए इस बात को उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा कि इस सरकार के करोड़ों के भ्रष्टाचार के सबूत उनके पास हैं जिसे वे सामने लाएंगे। क्या भाजपा इस बात से डर गई थी। शरद पवार ने इससे पूर्व में दावा किया था कि दोनों गुटों को एकजुट करना उनके दिवंगत भतीजे अजीत पवार की इच्छा थी और वे इस बारे में आशावादी थे। उन्होंने कहा, “अब हमें लगता है कि उनकी इच्छा पूरी होनी चाहिए।

अजीत पवार, शशिकांत शिंदे और जयंत पाटिल ने दोनों गुटों के विलय की बातचीत शुरू की थी। विलय की तारीख भी तय हो गई थी। यह 12 फरवरी को निर्धारित थी। दुर्भाग्य से, अजीत इससे पहले ही हमें छोड़कर चले गए।” हालांकि, अब ऐसा लगता है कि ये प्रक्रिया बंद हो जाएगी। ममता बनर्जी जैसी दबंग मुख्यमंत्री विमान दुर्घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रही हैं।पवार पार्टी के लोग भी भाजपा पर ऐसा आक्षेप लगा रहे थे। विपक्ष भी दबे स्वर से ऐसी बात को कर रहा है। ये रहस्य खुल ना पाए पवार पार्टी बागी ना हो जाए इसलिए सबको एकजुट रखने के लिए ही शोकविहल  पत्नी को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ इतनी जल्दबाजी में दिलाई गई। कहा जाता है कि तेरह दिनों तक कोई भी शुभ कार्य सनातनी नहीं करता।

सुनेत्रा की भी यक़ीनन मजबूरी रही होगी हो सकता है कि अजीत पवार के काले अध्याय खोलने के दबाव में कठपुतली की तरह उन्हें ये पद दिया। इससे पार्टी की बगावत भी थम जाएंगी तथा राजनैतिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। उनके पुत्र पार्थ को भी इस बीच साधा जाएगा। जबकि इससे पूर्व सुनेत्रा और पुत्र पार्थ चुनाव हार चुके हैं। सुनेत्रा राज्य सभा सांसद हैं। शरद पवार और सुप्रिया पर भी दबाव इस जल्दबाजी से बनाया जा सकेगा।

अब जब अजित पवार के परिजनों ने घुटने भाजपा के आगे टेक दिए हैं तो विमान दुर्घटना की जांच भी ठंडे बस्ते में चली जाएगा।मौत का राज, राज ही बना रहेगा।बकौल अमित शाह कि घटनाएं होती रहती हैं इन्हें कोई रोक नहीं सकता।

कुल मिलाकर एक तीर से कई निशाने लगाने वाली भाजपा ने महाराष्ट्र में अपनी सरकार बचा ली है तथा अजित पवार जैसे मुखर व्यक्ति की जगह एक नम्र विनम्र महिला को सत्ता की जिम्मेदारी देकर एक बड़े चाव को नासूर होने से बचा लिया है। 

पार्टी क्या भाजपा पर करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप लगा पाएगी। शायद नहीं। चिंता तो यह भी होनी चाहिए कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अब कितने दिन सुरक्षित रह पाती है। यह भी एक बड़ा प्रश्न चिन्ह बनकर आगे उभरेगा। उसकी बुनियाद  कमजोर होकर, वह कहीं भाजपा की शरणागत ना हो जाए।शरद पवार को इस बीच शपथ ग्रहण की सूचना नहीं दी गई।

वस्तुत: देखा जाए यह बड़ी सोची समझी रणनीति है। इसको वहां के लोग किस तरह लेंगे ये वक्त बताएगा किंतु फिलहाल इतनी जल्दबाजी में सुनेत्रा का शपथग्रहण समारोह कर भाजपा ने बाजी जीत ली है।

(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)

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