मोदीजी का राजनैतिक कैरियर और डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक ताजा बयान उनकी मोदीजी से यारी की अद्भुत मिसाल है। डोनाल्ड कह रहे रहे हैं कि वे मोदीजी का राजनैतिक केरियर बर्बाद नहीं करना चाहते।ये तो भारतवासी भली-भांति देख और समझ रहे हैं। उन्होंने मोदीजी को अपने लपेटे में इस तरह फांस लिया है कि देश को भले धोखा दे देंगे लेकिन डोनाल्ड जब तक हैं उनकी आज्ञा का ईमानदारी से पालन करते रहेंगे।

अब एपस्टीन फाइल को देख लीजिए, देश को जता भी दिया कि मोदीजी के ताल्लुकात कहां-कहां हैं और वे किस तरह उनकी खुशी के लिए नाच गा भी सकते हैं। जी के सिवा मोदीजी के मुखारबिंद से आज तक एक भी शब्द ट्म्प के खिलाफ नहीं निकला।अब सोचिए क्या ऐसे व्यक्ति का राजनैतिक कैरियर भला वह क्यों बिगाड़ेंगे? मोदीजी को बनाए रखने में ही अमेरिका का भला है।

यह बात प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं को समझनी होगी।आप मत तलाशिए एपस्टीन फाइल में साहब की करतूतें यदि सामने आ जाएंगी तो फिर किस बात से डरा कर उनसे भारत देश को लूटेंगे।यह तो लगातार चलने वाला एपिसोड है।आज राजस्थान की भाजपा की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी का एपस्टीन फाइल में नाम आ गया।कल किसी भाजपाई या संघी का नाम आ जाएगा। इससे बेहतर तो यही है जुबान पर ताला जड़ लिया जाए।

अब तो डोनाल्ड ट्रंप के सामने मोदीजी ने अपने सारे हथियार डाल दिए हैं और मजे से सत्ता सुख भोग रहे हैं। आपरेशन सिंदूर से पहले पता नहीं और कितनी आज्ञाओं का पालन हो चुका होगा। वो तो ट्रम्प खुद बोल रहे हैं तब पता चल पाया है।अब तो वह बेझिझक रुस से तेल आयात की जगह अमेरिका के अधीन वेनेजुएला से तेल खरीदने की बात कह रहे है। मोदी सरकार ख़ुश है कि टेरिफ 25 से 18 % पर आ गया।

जिसका जश्न मना के जिगरी दोस्त की दोस्ती का हवाला दिया गया। उसी प्यारे दोस्त ने अब हमारी स्वतंत्र कृषि पर हमला बोला है जो भारत की राष्ट्रीय आय और भूख का मसला ना केवल हल करता है बल्कि बड़ी मात्रा में खाद्यान का निर्यात भी करता है।यह बात तब समझ में आ जानी चाहिए थी जब हमारे नागरिकों को बेड़ियों में जकड़कर उनकी वापसी की थी। मोदी चुप थे।ये ताना-बाना 2014 से पहले जब मोदीजी जी मुख्यमंत्री थे संभव है तब से बुना गया हो। देश हाथ में आते ही वे अमेरिका के गुलाम बन गए हों।

अब तो नाच मेरी बुलबुल की तर्ज़ पर वे नाचे जा रहे हैं। आगे और हम इस यारी में कितना लुटेंगे। इसका पुख्ता इंतज़ाम मोदी सरकार और ट्रम्प सरकार ने कर रखा है। मोदी भक्त भले इस बात को ना समझ रहे हों लेकिन अमेरिका में ट्रम्प सरकार पर वहां के लोगों का दबाव बढ़ा है। ये जुगल जोड़ी जब तक सत्ता में है भारत की बर्बादी को कोई रोक नहीं सकता।

कयास लगाए जा रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप के हटने के बाद ही देश में मोदी की विदाई हो सकती है। कुछ हद तक ये बात सही है किंतु भारत में जिस तरह मोदी के ख़िलाफ़ राजनैतिक चेतना का विस्फोट हो रहा है वह मोदी की लुटिया बीच मझधार में भी डुबा सकता है। लोकतंत्र का आवरण ओढ़े इन दोनों ऊंचे दर्जे के तानाशाहों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।

(सुसंस्कृति परिहार टिप्पणीकार और एक्टिविस्ट हैं।)

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