आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के न्यायिक प्रक्रिया में इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताते हुए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल के उन आदेशों को पूरी तरह रद्द कर दिया है जो एआई की तरफ से उपलब्ध करवाए गए काल्पनिक फैसलों को आधार बना कर दिए गए थे।
जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने एआई की काल्पनिक जानकारी को न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया। जजों ने इसकी तुलना भोपाल गैस कांड से की। उन्होंने इसे ‘मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के रिसाव’ जैसा बताया। बेंच ने कहा कि अगर इसे नियंत्रित न किया गया तो यह एक अदृश्य विनाश को निमंत्रण देने जैसा हो सकता है।
मामला यह है कि जम्मू-कश्मीर बैंक ने पैन इंडिया यूटिलिटीज नाम की कंपनी को 200 करोड़ का कर्ज दिया। इसमें एस्सेल इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड नाम की कंपनी ने कॉरपोरेट गारंटी दी थी। लोन के 87.43 करोड़ रुपये बकाया होने को आधार बनाकर बैंक ने एस्सेल इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने का आवेदन दिया। एनसीएलटी ने इसे स्वीकार करते हुए अगस्त 2024 में दिवालिया कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दी। इस आदेश को सितंबर 2025 में एनसीएलएटी ने भी बरकरार रखा।
एस्सेल इंफ्रा प्रोजेक्ट्स से जुड़ी पूजा रमेश सिंह की तरफ से वरिष्ठ वकील माधवी दीवान सुप्रीम कोर्ट में पेश हुईं। उन्होंने बताया कि दोनों ट्रिब्यूनल ने अपने फैसलों में भारतीय स्टेट बैंक और आईसीआईसीआई बैंक से जुड़े 6 ऐसे अदालती फैसलों का हवाला दिया जो सच में कभी हुए ही नहीं थे। वह पूरी तरह किसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल की तरफ से गढ़े गए काल्पनिक केस थे।
सुनवाई के दौरान जम्मू एंड कश्मीर बैंक ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उसके वकीलों ने इन फैसलों का जिक्र कभी नहीं किया था। ट्रिब्यूनल ने खुद अपनी तरफ से इन फैसलों को आदेश में दर्ज किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों ट्रिब्यूनल के फैसलों पर गहरी नाराजगी जताते हुए उन्हें रद्द कर दिया है। मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस एनसीएलटी को भेज दिया गया है। कोर्ट ने कहा है कि वह न्यायिक आदेशों में मनगढ़ंत फैसलों को आधार बनाए जाने को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगा।
अदालत ने कहा कि न्यायिक कामकाज में एआई की सहायता लेने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन इंसानी निगरानी अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया से भी कहा है कि वह कानूनी पेशे पर एआई के असर और उससे जुड़ी चुनौतियों पर अध्ययन के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन करे।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)