झारखंड : अनुबंध कर्मचारी महासंघ ने पुलिस बल का प्रयोग की निंदा की

झारखण्ड राज्य अनुबंध कर्मचारी महासंघ झारखंड के केंद्रीय अध्यक्ष विक्रांत ज्योति ने झारखंड में नियुक्ति परीक्षा में व्याप्त धांधली के खिलाफ आंदोलनरत छात्रों पर पुलिस बल का प्रयोग, लाठी चार्ज और वाटर कैनन के प्रयोग की करवाई की निंदा करते हुए कहा कि महासंघ सभी 45 संगठन छात्रों के इस संघर्ष का समर्थन करते हुए झारखंड में पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया बनाने तक इस आन्दोलन का समर्थन करती है।

वहीं महासंघ के केंद्रीय महासचिव सुशील पाण्डेय ने कहा कि सूबे में महागठबंधन फेज 2 की सरकार बनने के बाद व्यवस्था बिल्कुल बेलगाम हो गई है। सरकारी कार्यालयों में चरम पर घूसखोरी और भ्रष्टचार व्याप्त है, जिसे रोकने में राज्य सरकार विफल है। सूबे की सरकार जितनी मजबूत तत्परता से पूरे रांची में छात्र आंदोलन को रोकने के लिए घेराबंदी की है, यदि इतनी तत्परता से घेराबंदी जेपीएससी जेएसएससी की नियुक्ति परीक्षाओं को रोकने में लगाती तो राज्य में छात्रों को सड़क पर नहीं उतरना पड़ता। 

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने झारखण्ड के 6 लाख अनुबंध कर्मियों की सेवा शर्तों में सुधार के लिए विकास आयुक्त झारखंड की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमिटी बनाई,  मगर यह कमिटी 6 वर्षों में कोई मुकाम पर नहीं पहुंची। झारखण्ड के छात्र आंदोलन को कमजोर करने के लिए झारखण्ड सरकार फिर उच्च स्तरीय कमिटी बनाने की बात कह रही है, सरकार के पूर्व इतिहास को देखते हुए ऐसे किसी कमिटी पर भरोसा नहीं करना है, यदि सरकार सही है तो सभी विवादित नियुक्ति परीक्षाओं की सीबीआई जांच हो, फर्जी नियुक्त अभ्यर्थियों की बर्खास्तगी किया जाए और सही अभ्यर्थियों की सुरक्षा दिया जाए और जेपीएससी जेएसएससी में रिफॉर्म के बिना यह आंदोलन नहीं रुके। 

महासचिव सुशील पाण्डेय ने आगे कहा कि आंदोलन को बरगलाने, भटकाने, छात्रों को बांटने की “फूट डालो और शासन करों” की नीति के तहत गुमराह करने वाले मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू को छात्रों से माफी मांग कर नैतिकता के तौर पर इस्तीफा देना चाहिए। 

उन्होंने राज्य के लाखों पारा शिक्षकों, मनरेगा कर्मियों, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका के साथ हुए अन्याय की घोर निंदा कर आंदोलन को तेज करने की अपील की।

महासंघ के केंद्रीय समिति सदस्य महेश सोरेन ने राज्य में एक की टेट प्रमाण पत्र पर नौकरी पाए सहायक आचार्य के साथ घटाए गए ग्रेड पर भी दुख व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि सरकार अपना वेतन, बंगला सुरक्षा पर मोटी रकम खर्च कर रही है जबकि मेहनती संविदा कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़े हैं।

महेश सोरेन ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो संघ के सभी 45 विंग छात्रों के हित में पूरे राज्य में आंदोलन के लिए सड़क पर उतरेगी। झारखंड के छात्र अराजक नहीं है राज्य के अनुकम्पा जीवी नेताओं की अखंड मूर्खतापूर्ण नीति नियुक्ति में धांधली के कारण युवा अपनी हक मांगने के लिए सड़क पर हैं।

(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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