केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने नई दिल्ली में सूचना और प्रसारण मंत्रालय में आंतरिक वित्तीय सलाहकार के तौर पर काम कर रहे अकाउंट्स के डिप्टी कंट्रोलर को रिश्वतखोरी के मामले में पकड़ा है। एजेंसी ने 18 अगस्त को एक शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपी अधिकारी (जो 2020 बैच का आईसीएएस अधिकारी है) ने एक निजी कंपनी के करार के नवीनीकरण की फाइल तेज़ी से प्रोसेस करने के लिए 15 लाख रुपये की मांग की थी।
बाद में मामला 10 लाख रुपए पर तय हुआ।
इसके बाद सीबीआई ने 18 अगस्त को जाल बिछाया और उस सरकारी कर्मचारी को उसकीपत्नी के ज़रिए रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। आरोपी को गिरफ़्तार कर लिया गया है। मामले की आगे की जांच चल रही है।
सीबीआई ने पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के अधिकारियों से जुड़े 20 लाख रुपये की कथित रिश्वतखोरी के मामले में तीन लोगों को भी गिरफ़्तार किया। एक और आरोपी, ओपी राणा (जो पंजाब विजिलेंस के डीजी के रीडर हैं), फ़रार है और उसे पकड़ने की कोशिशें चल रही हैं।
ये गिरफ़्तारियां पंजाब के एक राज्य कर अधिकारी की शिकायत के बाद की गईं। शिकायतकर्ता का आरोप था कि आरोपी ने पंजाब के सतर्कता महानिदेशक के कार्यालय में उसके ख़िलाफ़ लंबित शिकायत को बंद कराने के लिए गैर-कानूनी तौर पर पैसे (रिश्वत) की मांग की थी। सीबीआई के मुताबिक, मुक्तसर ज़िले के मालोट के दो आरोपी, विजिलेंस के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए बिचौलियों का काम कर रहे थे। उन्होंने कथित तौर पर शिकायतकर्ता को भरोसा दिलाया था कि रिश्वत की रक़म देने के बाद मामला सुलझाया जा सकता है।
सीबीआई भ्रष्टाचार के एक बड़े कथित नेटवर्क में दूसरे लोगों की संभावित भूमिका की भी जांच कर रही है।
(जनचौक ब्यूरो)