हुआ अजीज जो इस तरह सब का
कभी न हो पाया करीब किसी का
सवर्ण राजनीति अपनी बेचैनियों में लगातार राहुल गांधी की राजनीति को प्रश्नांकित करती है। इतना ही नहीं दलित राजनीति भी राहुल गांधी को लगातार सवालों के घेरे में लिए रहती है।
आजादी के आंदोलन के दौरान कांग्रेस की यही स्थिति बना दी गई थी — मुस्लिम लीग की नजर में कांग्रेस हिंदुओं की थी, इसलिए मुसलमान उस से दूरी बनाने पर लगी रहती थी! दूसरी तरफ अखिल भारतीय हिंदू महासभा की नजर में कांग्रेस मुसलमानों की पक्षपाती पार्टी थी, इसलिए वह भी कांग्रेस के खिलाफ ही गोलबंदी करती थी। कांग्रेस से दूरी बनाते-बनाते मुस्लिम लीग और अखिल भारतीय हिंदू महासभा के लोग एक दूसरे के करीब हो जाते थे, इतने कि मौका मिलते ही सरकार बना लेते थे!
राहुल गांधी इस समय भारत ही नहीं दुनिया के सब से ज्यादा बेचैन नेताओं में से एक हैं! राहुल गांधी का आदर्शवादी मन भारत के राजनीतिक यथार्थ को जितना करीब से देखता है, बेचैनी उतनी ही बढ़ जाती है। भारत के राजनीतिक यथार्थ को देखनेवाली राहुल गांधी की नजर को देखकर सभी राजनीतिक दलों के कई लोगों की बेचैनी बढ़ जाती है।
लोकतांत्रिक राजनीति में अलोकतांत्रिक बेचैनी निरंतर बढ़ रही है। राहुल गांधी के आदर्शवादी मन, भारत के लोकतंत्र के सवर्ण की बेचैनी निरंतर बढ़ रही है। इस बेचैनी को समझना होगा। सवर्णों की बेचैनी के कारणों की पहचान, निदान और समुचित निपटान जरूरी है। असल में बेचैनी तो हमारी पूरी संरचना में है, चाहे वह सामाजिक हो, आर्थिक हो, राजनीतिक हो, शैक्षणिक है या जीवन के किसी अन्य संदर्भ की संरचना ही क्यों न हो। रोजगार की तलाश में लगे युवा हो या फिर पेंशनभोगी हो, गरीब-अमीर कोई हो बेचैन जरूर है। तो सब की बेचैनी समझनी होगी!
राहुल गांधी लगातार सत्ता की राजनीति को चुनावी संकीर्णताओं से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं। भेदभावपूर्ण समाज में संसाधनों के अभाव और संस्थागत असंतुलन के चलते सामाजिक संतुलन खतरे में रहता है। संसाधनों के अभाव का एक बड़ा कारण संसाधनों तक पहुंच बनाने के विभिन्न आधारों पर भेदभावपूर्ण तरीके से कब्जा। संसाधनों के अभाव को दूर करना जरूरी है। भेदभावपूर्ण व्यवहार के बंद होने से संसाधनों की कमी पर कुछ हद तक काबू पाया जा सकता है।
जीवन के प्रत्येक हलके से भेदभावपूर्ण रवैया को कारगर तरीकों से दूर करना। समाज में न्यायपूर्ण दृष्टि के स्वाभाविक सम्मान से यह संभव है। न्यायपूर्ण दृष्टि के लिए उच्च और जीवंत नैतिक मानदंड का पालन जरूरी है।
जीवन के बहुत-कुछ के अधिकांश को सरकार तय करती है। जीवन व्यवस्था में न्यायपूर्ण दृष्टि के सदैव तत्पर और कारगर रहने का इको सिस्टम लोक-हितकारी सरकार ही बना सकती है। वर्तमान सरकार लोक-हितकारी नहीं लोकलुभावनी है। हित के लिए लोभ पर काबू पाना बेहद जरूरी होता है।
लोभ पर काबू करने की कोशिश करनेवाली सरकार के अलोकप्रिय हो जाने का खतरा हमेशा बना रहता है। अलोकप्रिय हो जाने का डर हर किसी को सताता है। राजनीतिक नेताओं और दलों की हैसियत का बनना-बिगड़ना तो सीधे-सीधे उन के लोकप्रिय-अलोकप्रिय होने से तय होता है।
दीर्घकालिक हितों की रक्षा के लिए लोक-हितकारी सरकार को अलोकप्रियता का जोखिम उठाना ही पड़ता है। तात्कालिक चुनावी लाभ के लिए लोक-हित की निरंतर उपेक्षा करनेवाली सरकार लोकतंत्र क्षतिग्रस्त कर देती है।
भेदभावपूर्ण राजनीति के खिलाफ आवाज बुलंद करने का नतीजा! लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर एफआईआर हो गया है। 8 अगस्त 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में “विजय शंखनाद रैली” को संबोधित किया था। मेरी व्यक्तिगत राय तो यही है कि “शंखनाद” जैसी धार्मिक परिप्रेक्ष्य की शब्दावली के राजनीतिक इस्तेमाल से बचना चाहिए।
यह मैदान रामलीला के मंचन वाली पारंपरिक जगह है। कांग्रेस के अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के रैली में संबोधन के दो दिन बाद श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास नाम के संगठन के लोगों ने उसी मैदान में हवन और शुद्धिकरण अनुष्ठान किया।
संगठन का कहना है कि रैली में लगे नारों और खरगे के पहले के बयानों से जगह “प्रदूषित” हो गई थी, इसलिए शुद्धिकरण जरूरी था। आरएसएस के खिलाफ दिये गये बयान से जगह प्रदूषित हो जाती है! संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ जाकर शुद्धिकरण की कार्रवाई उस स्थान का शुद्धिकरण हो जाता है!
13 अगस्त को मानसून सत्र के आखिरी दिन, खरगे ने राज्यसभा में मामला उठाया। ध्यान रहे, मल्लिकार्जुन खरगे राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष भी हैं! यह संविधान विरोधी शुद्धिकरण मल्लिकार्जुन खरगे का ही नहीं, हर दलित का, लोकतंत्र और संविधान पर आस्था रखनेवाले हर नागरिक के अपमान का मामला है।
उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने अनुष्ठान का बचाव करते हुए कहा कि नारों से जगह प्रदूषित हुई थी। कांग्रेस ने इसे भाजपा-आरएसएस की मानसिकता और छुआछूत बताया।
भाजपा ने कहा कि यह उनके कार्यकर्ता नहीं थे और यह सिर्फ सफाई तथा धार्मिक अनुष्ठान था। सीधा-सरल सवाल यह नहीं है कि अनुष्ठान करनेवालों और ऐसे अनुष्ठान करनेवालों का बचाव करनेवालों पर सरकार क्या कार्रवाई करती है! अनुष्ठान करनेवाले महेंद्र भट्ट तो उन के कोई-न-कोई तो हैं?
उत्तराखंड की सरकार, भारत सरकार और भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हुई, मामले को आया-गया करने की कोशिश की गई। दुखद प्रसंग यह भी है कि लगभग हर किसी ने इस घटना को आई-गई मान लिया। लगभग बीस दिन बाद राहुल गांधी का हस्तक्षेप हुआ।
13 अगस्त 2026 को राज्यसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी शुद्धिकरण का मामला उठाया। उसी समय राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने जवाब दिया। नड्डा ने उस समय रणनीति तीन हैसियत की शक्ति से कहा। जगत प्रकाश नड्डा राज्यसभा में सदन के नेता हैं। केंद्रीय मंत्री हैं। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। भाजपा के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष कि उपस्थिति में कहा कि खरगे ने कहा कि उनकी रैली के बाद भाजपा से जुड़े लोगों ने मंच का शुद्धिकरण किया, यह छुआछूत और संविधान का उल्लंघन है।
नड्डा का जवाब संक्षेप में यह कहा कि खरगे जी ने जो कहा, वह सच में दुखदायी विषय है। यह सिर्फ कांग्रेस के लिए नहीं, हम सबके और पूरे देश के लिए दुखदायी है। खरगे जी ने कहा कि ये भाजपा के लोग थे। मैं स्पष्ट करता हूं कि भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। राष्ट्रीय अध्यक्ष भी यहां बैठे हैं और मैं भी पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रहा हूं। भाजपा इस तरह के काम को स्वीकार नहीं करती।
जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि आपने कहा है तो हम इसकी जांच करेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष इसे गंभीरता से देखेंगे। गजब, यह कानून के उल्लंघन का मामला है, इसे भाजपा के पाटी अध्यक्ष देखेंगे क्या मतलब! खैर ऐसा लग रहा है कि किसी ने नहीं देखा! देखा भी हो, नतीजा सामने न आया हो, क्या पता! सवाल निंदा करने का नहीं कार्रवाई करने का है। अगर यह मंत्री का आश्वासन था तो यह आश्वासन कमिटी को भी जाना चाहिए। गया! क्या पता!
29 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में राहुल गांधी का प्रेस कांफ्रेंस हुई। राहुल गांधी ने शुद्धिकरण छुआछूत का दूसरा नाम बताया। जाहिर है कि यह इसलिए किया गया क्योंकि खरगे दलित हैं। यह संविधान और एससी/एसटी एक्ट के तहत अपराध है। प्रधानमंत्री मोदी को तुरंत एफआईआर दर्ज कराने का आदेश देना चाहिए। उन्होंने इसे देशभर के दलितों के साथ रोज होने वाले अपमान का प्रतीक बताया।
राहुल गांधी की मांग पर एफआईआर तो हुई और वह खुद राहुल गांधी पर हुई। 30 अगस्त 2026 की रात हल्द्वानी कोतवाली में राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई। शिकायतकर्ता अमित कुमार हैं। वे हल्द्वानी के ही रहनेवाले हैं। अमित कुमार खुद वाल्मीकि समुदाय से आते हैं। वे श्री राम सेना से जुड़े हैं। उन्होंने कहा है कि शुद्धिकरण के अनुष्ठान में अनुसूचित जाति के लोग भी शामिल थे। राहुल गांधी ने 29 अगस्त की प्रेस कांफ्रेंस में साधारण सफाई और धार्मिक अनुष्ठान को जातिगत रंग दिया, उसे छुआछूत बताया।
शिकायतकर्ता ने प्रेस कांफ्रेंस को दलित विरोधी करार दिया। शिकायतकर्ता के अनुसार राहुल गांधी के प्रेस कांफ्रेंस में कही बात से अनुसूचित जाति की भावनाएं आहत हुईं और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। एफआईआर में लगाई गई धाराएं: एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धारा 3(1) की उपधाराएं, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 (समूहों के बीच दुश्मनी फैलाना) और 299 जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है।
डीएसपी स्तर के अधिकारी जांच करेंगे। जांच में सामने निकलकर आयेगा। अदालती कार्यवाही होगी। फैसला होगा। राहुल गांधी निश्चित ही इस पूरी प्रक्रिया का सम्मान करेंगे।
यहां तीन सवाल हैं –
1. हल्द्वानी में शुद्धिकरण अनुष्ठान करनेवाले पर क्या कार्रवाई होगी या नहीं होगी?
2. हल्द्वानी के शुद्धिकरण अनुष्ठान और ऐसी गतिविधियों से होनेवाले दलित अपमान से व्यथित साधारण और सामान्य लोग क्या प्रतिक्रिया और हलचल महसूस करते हैं अपनी बाहरी-भीतरी दुनिया में!
3. वह दिन कितना दूर है जब लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभाओं, न्यायिक आसनों आदि के शुद्धिकरण से संबंधित बिल पेश किया जा सकता है?
(सवर्ण राजनीति की समस्याओं पर जारी)
(प्रफुल्ल कोलख्यान लेखक, आलोचक, सामाजिक-राजनीतिक टिप्पणीकार हैं।)