झारखंड, रामगढ़ जिले के माण्डू अंचल के मौजा बसंतपुर के ग्रामीणों ने मामला न्यायालय में लंबित होने के बावजूद मौजा बसंतपुर में बड़े-बड़े एवं विशाल वृक्षों की अंधाधुंध कटाई लगातार किए जाने के ख़िलाफ़ रामगढ़ उपायुक्त और वन प्रमंडल पदाधिकारी को आवेदन दिया।
आवेदन में वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत गांव में लंबित सामुदायिक वन अधिकार एवं सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के दावे का शीघ्र निष्पादन तथा वनाधिकार के अंतिम निर्धारण तक उक्त भूमि पर वृक्षों की कटाई एवं किसी भी प्रकार के खनन कार्य पर तत्काल रोक लगाने की माँग की गई।
ग्रामीणों के अनुसार उक्त वन भूमि/क्षेत्र के संबंध में ग्राम सभा के वनाधिकार के निर्धारण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इसी विषय से संबंधित याचिका 672/2025 झारखंड उच्च न्यायालय, रांची के समक्ष लंबित है। उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 20.08.2025 को संबंधित पक्ष को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया गया था, किंतु आज तक अपेक्षित जवाब दाखिल नहीं किया गया है।
आवेदन में ग्रामीणों ने बताया कि मौजा बसंतपुर, अंचल माण्डू, जिला रामगढ़, झारखंड के ग्राम सभा द्वारा वन अधिकार अधिनियम, 2006 के अंतर्गत सामुदायिक वन अधिकार एवं सामुदायिक वन संसाधन अधिकार का विधिवत दावा सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया गया है, जो वर्तमान में लंबित है।
लेकन, अत्यंत गंभीर एवं चिंताजनक स्थिति यह है कि उक्त मामले के न्यायालय में लंबित रहने तथा वनाधिकार के दावे का अंतिम निर्णय नहीं होने के बावजूद मौजा बसंतपुर में बड़े-बड़े एवं विशाल वृक्षों की अंधाधुंध कटाई लगातार किए जाने की शिकायत की जा रही है। ग्रामीणों को आशंका है कि वन विभाग के स्थानीय पदाधिकारियों/कर्मचारियों की मिलीभगत से उक्त कटाई कराई जा रही है।
ग्रामीणों को यह भी जानकारी/आशंका है कि उक्त भूमि को सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड को खनन कार्य के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जा रही है। ऐसी स्थिति में, जब तक ग्रामीणों के सामुदायिक वन अधिकार एवं सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के दावे का विधि के अनुसार अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक उक्त भूमि पर किसी प्रकार का खनन, पेड़ों की कटाई अथवा अन्य गैर-वन गतिविधि प्रारंभ करना ग्रामीणों के वैधानिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है।
वन अधिकार अधिनियम, 2006 का उद्देश्य वन-निवासी समुदायों के उन अधिकारों को मान्यता देना है जिन पर वे परंपरागत रूप से निर्भर रहे हैं। अधिनियम में सामुदायिक वन संसाधन की सुरक्षा, संरक्षण, पुनर्जीवन एवं प्रबंधन का अधिकार भी मान्यता प्राप्त है।
ग्रामीणों ने इसको लेकर न्यायहित, पर्यावरण संरक्षण एवं वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए तत्काल अंतरिम संरक्षणात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों की मांगों में निम्नलिखित मांगें शामिल हैं:
1. मौजा बसंतपुर, अंचल माण्डू, जिला रामगढ़ के संबंध में लंबित सामुदायिक वन अधिकार एवं सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के दावे का शीघ्र विधिसम्मत निष्पादन कराया जाए।
2. उच्च न्यायालय के मामले 672/2025 में दिनांक 20.08.2025 के आदेश के अनुपालन में संबंधित पदाधिकारी से जवाब दाखिल कराया जाए तथा अनुपालन रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कराने की कार्रवाई की जाए।
3. वनाधिकार के दावे का अंतिम निर्णय होने तक उक्त भूमि पर किसी भी प्रकार का खनन कार्य प्रारंभ न करने हेतु संबंधित विभाग/सीसीएल को स्पष्ट निर्देश दिया जाए।
4. मौजा बसंतपुर में जारी कथित अंधाधुंध एवं अवैध वृक्ष कटाई को तत्काल बंद कराया जाए तथा मौके का निरीक्षण कर कटाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
5. यदि किसी व्यक्ति, ठेकेदार अथवा विभागीय कर्मचारी की मिलीभगत से वृक्ष कटाई की जा रही है तो उसके विरुद्ध कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।
6. उक्त क्षेत्र की वर्तमान स्थिति का स्थल निरीक्षण एवं वीडियोग्राफी/फोटोग्राफी कराकर वृक्षों की कटाई एवं प्रस्तावित खनन से संबंधित अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं और
7. वनाधिकार के अंतिम निर्धारण एवं माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित कार्यवाही के दौरान ग्रामीणों के पारंपरिक एवं सामुदायिक वन अधिकारों को प्रभावित करने वाली कोई कार्रवाई न की जाए।
आवेदकों में बसंतपुर मौजा के ग्रामीणों की ओर से गांगोमुण्डा,सीता राम महतो, सूरजमहतो शामिल थे।

(ईप्सा शताक्षी स्वतंत्र लेखक-पत्रकार हैं।)