Thursday, August 18, 2022

जयप्रकाश नारायण

आज़ादी के पचहत्तर वर्ष: प्रोपोगंडा बनाम यथार्थ

भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यह अजीब संयोग और विडंबना है कि स्वतंत्रता आंदोलन से विरत रहने वाले, आज़ादी के आंदोलन की नकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करने वाले तथा भारत में स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान...

गोटा बाया राजपक्षे के स्वीमिंग पूल से निकलता लोकतांत्रिक श्रीलंका

आज गोटाबाया राजपक्षे का स्वीमिंग पूल देखा। उछलते कूदते किलकारियां मारते नौजवानों के हुजूम को स्वीमिंग पूल से लेकर राजमहल के शयन कक्ष तक चहल कदमी करते, किलकारियां भरते, उछलते-कूदते और मनुष्यता के सर्वोच्च उत्सव में शामिल लोगों को...

  अमृत काल के अग्निपथ पर अग्नि वर्षा

संघ की मोदी सरकार का घोषित अमृत काल तेज गति से आगे बढ़ रहा है। अमृत काल में हमें कैसे-कैसे नजारे देखने को मिलेंगे यह सामान्य नागरिकों की कल्पना से परे है। जब तक भारतीय जनगण अमृत की एक...

मेहनकशों के लिए नये संकल्प का दिन है मजदूर दिवस

"हमारी मौत दीवार पर लिखी इबारत बन जायेगी”। अल्बर्ट पार्किंसंस शिकागो के 8 शहीद मजदूर नेताओं में से एक हैं जिन्हें पूंजीपतियों के दबाव में फर्जी हत्या के मुकदमे में फांसी दे गई दी गई थी। 8 साथियों के साथ...

काशी विश्वनाथ धाम कोरिडोर: धर्म क्षेत्र का कारपोरेटीकरण

प्रथमचरण 30 वर्ष पहले उदारीकरण निजीकरण और वैश्वीकरण की नीतियां भारत में लागू की गईं। जहां से भारत के विविध क्षेत्रों का निजीकरण यानी कॉरपोरेटाइजेशन शुरू हुआ। पहली प्राथमिकता थी कि इन नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए अब तक...

चुनाव सुधार: ज्यों-ज्यों दवा दिया मर्ज बढ़ता ही गया

भारत में चुनाव सुधारों की चर्चा 90 के दशक के प्रारंभ में शुरू हुई थी। उस समय बैलेट पेपर से चुनाव हुआ करते थे ।बूथों पर कब्जा करना मत पेटियों को लेकर भागना और बाहुबलियों ताकतवर लोगों द्वारा वोट...

फिरोजपुर रैली: विजय के बाद किसान आंदोलन के खिलाफ षड्यंत्र

पिछले दिनों कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने जब यह कहा था की उचित समय आने पर कृषि कानून पुनः वापस लाए जाएंगे तो मैंने लिखा था किसान आंदोलन के खिलाफ षड्यंत्र जारी है। 5 तारीख की फिरोजपुर में होने...

कॉरपोरेटी हिंदुत्व के फासीवादी फंदे से देश को निकालना ही नये साल का असली संकल्प

2021 के अंतिम तिमाही में कालिनेम, शिखंडी, खड्गसिंह और गोडसे का जिंदा होना क्या महज संयोग है कि सोचा समझा प्रयोग। 2021 की शुरुआत महामारी की क्रूर छाया और लोकतंत्र पर फासीवाद के मरणांतक हमले के साथ हुई थी।वहीं...

कृषि कानूनों के फिर आने का बरकरार है खतरा

19 नवंबर को किसान आंदोलन के दबाव में तीन कृषि कानूनों को एक तरफा प्रधानमंत्री द्वारा घोषणा करके वापस लेने का ऐलान किया था। तो मैंने पहली टिप्पणी लिखते हुए कहा था कि, सावधानी हटी दुर्घटना घटी। उस टिप्पणी...

किसान आंदोलन की उपलब्धियां और उसके सबक

एक वर्ष से ज्यादा चले ऐतिहासिक किसान आंदोलन ने पहली विजय दर्ज की है। 708 किसानों की शहादत और अनेकों जुल्मों और हमलों का मुकाबला करते 380 दिन तक चले आन्दोलन के बाद केंद्र सरकार ने अंततोगत्वा किसानों के...

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