Thursday, July 7, 2022

कृष्ण प्रताप सिंह

 अपनी सुविधा की नहीं, युवाओं के असुविधाजनक सवालों की सोचिये श्रीमान!

सेना में भर्ती की ‘अग्निपथ’ भर्ती योजना से नाराज कई राज्यों के युवा सड़कों पर उतर आये हैं और अपने प्रदर्शनों में हिंसा, आगजनी व तोड़फोड़ तक से परहेज नहीं कर रहे तो नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा कहा जा...

यह देश पहले भी कुछ कम अंधेरों से नहीं गुजरा, लेकिन कभी हारा नहीं, आगे भी नहीं हारेगा: विजय बहादुर सिंह 

देश के हिन्दी के जाने-माने आलोचकों में से एक विजय बहादुर सिंह को आमतौर पर उनकी देशज प्रतिमानों की सुगंध वाली आलोचना दृष्टि, भवानीप्रसाद मिश्र व दुष्यंत कुमार जैसे कवियों और आचार्य नन्द दुलारे वाजपेयी की रचनावलियों के श्रमसाध्य...

अब क्यों नहीं संभल रहा कश्मीर?

नरेन्द्र मोदी सरकार पिछले साल से ही, जब कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों की टारगेट किलिंग का नृशंस सिलसिला शुरू हुआ, बारम्बार दावा करती आ रही है कि वहां संक्रिय आतंकवादी सुरक्षाबलों द्वारा चलाये जा रहे सफाया अभियानों से...

जवाहरलाल नेहरू से मोदी सरकार की यह खुन्नस संघ परिवार की बेचारगी का पता देती है

अंग्रेजी के प्रख्यात कवि एवं नाटककार विलियम शेक्सपियर भले ही कह गये हों कि नाम में क्या रखा है, गुलाब को चाहे जिस नाम से पुकारा जाये, वह गुलाब ही रहता है और उनके अलविदा कह जाने के चार...

उपराष्ट्रपति जी भगवाकरण ही नहीं, उस पर आपका सवाल भी गलत है

पिछले दिनों उत्तराखंड में हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय में दक्षिण एशियाई शांति एवं सुलह संस्थान का उद्घाटन करते हुए उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने यह सवाल पूछकर देशवासियों के बड़े हिस्से को बुरी तरह चौंका डाला कि भगवाकरण...

सोचिये जरा, उत्तर प्रदेश जीतने के लिए भाजपा ने किस-किस को हरा डाला!

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश समेत चार राज्यों में शानदार वापसी के फलस्वरूप भारतीय जनता पार्टी के बल्लियों उछलते हौसले की बाबत ढेर सारी बातें कही जा चुकी हैं। इसलिए कुछ बातें समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल,...

प्रधानसेवक बनने चले थे, ‘शहंशाह’ जैसे तन बैठे!

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध यह गंभीर आरोप एक बार फिर दोहराया है कि वे देश को राजा की तरह चलाने लगे हैं। पिछले दिनों लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चल रही चर्चा...

विधानसभा चुनाव: इस बार ‘जातियुद्ध’ व ‘धर्मयुद्ध’ से बचेगा उप्र?

उत्तर प्रदेश में जब भी चुनाव आते हैं, वे लोकसभा के हों, विधानसभा के या फिर नगर निकायों और पंचायतों के ही क्यों न हों, उन्हें जातियों व धर्मों के युद्धों में बदलने की कोशिशें खासी तेज हो जाती...

तो क्या वे मौतें ‘नजरों का धोखा’ थीं?

मरो भूख से, फौरन आ धमकेगा थानेदार/लिखवा लेगा घरवालों से-’वह तो था बीमार’/अगर भूख की बातों से तुम कर न सके इंकार/फिर तो खायेंगे घर वाले हाकिम की फटकार/ले भागेगी जीप लाश को सात समुन्दर पार/अंग-अंग की चीर-फाड़ होगी...

क्या कहती है मंत्री की यह तिलमिलाहट?

मंत्री केन्द्र के हों या राज्यों के, पत्रकारों के सारे सवालों के जवाब नहीं देते। अप्रिय, असुविधाजनक अथवा गैरजरूरी लगने पर ‘नो कमेंट’ कहकर आगे बढ़ लेते हैं। गत बुधवार को लखीमपुर खीरी में पत्रकारों के सवालों से चिढ़कर...

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