Tuesday, August 9, 2022

शैलेंद्र चौहान

विश्व मानवता के धरोहर मैक्सिम गोर्की

अल्योशा यानी अलिक्सेय मक्सिमाविच पेशकोफ यानी मैक्सिम गोर्की पीड़ा और संघर्ष की विरासत लेकर पैदा हुए। उनके बढई पिता लकड़ी के संदूक बनाया करते थे और माँ ने अपने माता-पिता की इच्छा के प्रतिकूल विवाह किया था, किंतु मैक्सिम...

समसामयिक संदर्भ में भगत सिंह

भगत सिंह को भारत के सभी विचारों वाले लोग बहुत श्रद्धा और सम्मान से याद करते हैं। वे उन्हें देश पर कुर्बान होने वाले एक जज्बाती हीरो और उनके बलिदान को याद करके उनके आगे विनत होते हैं। वे...

रेणु का कथा साहित्य : कस्बाई एवं ग्राम्य जीवन के संघर्षों का सांस्कृतिक महा-आख्यान

स्वातंत्र्योत्तर भारत के निर्विवाद आंचलिक उपन्यासकार फणीश्वर नाथ रेणु का साहित्य आज़ादी के बाद दम तोड़ते निम्न मध्यवर्गीय कस्बाई जीवन का साहित्य है| रेणु की कहानियां असल में अनेक समस्याओं से जूझती उन जिंदगियों की कहानियां ही हैं जिनका...

जन्मदिन पर विशेष: फ़ैज की गजलों से कांप उठती थी सत्ता की रूह

मुझसे पहली सी मुहब्बत मेरी महबूब न माँग मैंने समझा था के तू है तो दरख्शाँ है हयात तेरा ग़म है तो ग़म-ए-दहर का झगड़ा क्या है तेरी सूरत से है आलम में बहारों को है सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में...

जन्मदिन पर विशेष: गंगा-जमनी तहजीब की अद्भुत मिसाल है पंडित भीमसेन जोशी का संगीत का सफर

हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक पंडित भीमसेन जोशी किराना घराने के सदस्य थे, वे शास्त्रीय संगीत की विधा- खयाल में पारंगत थे। उन्हें 2008 में देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया था। भारतीय टेलीविजन पर प्रसिद्ध...

सत्ता की पालकी ढो रही है मीडिया

आज के जमाने में भी ऐसे प्राणी/तत्व/चारण पाए जाते हैं, जो शासक वर्ग का गुणगान करने में अपनी सारी ऊर्जा लगा देते हैं। यूं तो राजे-रजवाड़ों का जमाना अब नहीं रहा और उनके बदले में भारत सहित अधिकांश देशों...

हिंदू कट्टरपंथी स्वामी विवेकानंद का करते हैं बेजा इस्तेमाल

भारतीय समाज में ऐसे कई समाज सुधारक हुए जिन्होंने समाज के ढ़ांचे को पूरी तरह बदल कर रख दिया। ऐसे ही समाज सुधारकों में से एक हैं विवेकानंद। विवेकानन्द बड़े स्‍वप्न‍दृष्‍टा थे। उन्‍होंने एक ऐसे समाज की कल्‍पना की...

आंग सान सू ची को चार साल जेल की सजा

म्यांमार में लोकतांत्रिक सरकार की उम्मीद दिखाने वाली नेता आंग सान सू ची तख्तापलट के बाद से कहां हैं, किसी को पता नहीं है। दिसंबर के बाद अब एक बार फिर उन्हें तीन अलग-अलग मामलों में चार साल कैद...

मोहन राकेश ने दी हिंदी नाटकों को एक नई पहचान

मोहन राकेश हिंदी साहित्य के उन चुनिंदा साहित्यकारों में हैं जिन्हें ‘नयी कहानी आंदोलन’ का नायक माना जाता है और साहित्य जगत में लोग उन्हें उस दौर का ‘महानायक’ कहते हैं। मोहन राकेश का जन्म 8 जनवरी, 1925 को...

जन्मदिन पर विशेष: करिश्माई और बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे कमलेश्वर

कमलेश्वर एक बहुआयामी प्रतिभा से संपन्न साहित्यकार थे। कमलेश्वर ने उपन्यास, कहानी, नाटक, संस्मरण, पटकथा विधाओं में लेखन किया। वे हिन्दी के बीसवीं शती के सबसे सशक्त लेखकों में से एक समझे जाते हैं। कमलेश्वर का नाम नई कहानी...

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बिहार में बीजेपी-जेडीयू की सरकार का दम उखड़ने लगा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस दमघोंटू वातावरण से निकलने को...