Tuesday, August 9, 2022

ज़ाहिद खान

गेंदालाल दीक्षित की पुण्यतिथि: एक भूला बिसरा क्रांतिकारी और उसके साहसिक कारनामे

देश की आज़ादी कई धाराओं, संगठन और व्यक्तियों की अथक कोशिशों और कुर्बानियों का नतीज़ा है। गुलाम भारत में महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलन के अलावा एक क्रांतिकारी धारा भी थी, जिससे जुड़े क्रांतिकारियों को लगता था कि अंग्रेज़...

अफ़स्पा की आड़ में मानवाधिकारों की ऐसी की तैसी

सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ़स्पा) एक बार फिर चर्चा में है। चर्चा की वजह, एक दर्दनाक वाक़या है। नगालैंड में 4 और 5 दिसंबर की दरमियानी रात को सेना की 21 पैरा स्पेशल फोर्स ने आतंकवादी होने के शक...

राजनीति और धर्म का गठबंधन सबसे ज़्यादा ख़तरनाक़: नेहरू

पंडित जवाहर लाल नेहरू का भारतीय इतिहास में अविस्मरणीय योगदान है। परतंत्र भारत में पंडित नेहरू की अहमियत जहां देश को आज़ाद कराने के लिए किए गए उनके अथक प्रयासों के चलते है, तो वहीं स्वतंत्र भारत में प्रधानमंत्री...

‘बाइज़्ज़त बरी’ किताब की समीक्षा : बेगुनाहों की दर्द भरी दास्तां का दस्तावेजीकरण

इक्कीसवीं सदी की शुरुआत से ही देश के अंदर आतंकवाद की घटनाओं में अचानक इजाफ़ा हुआ और आरोपी के तौर पर लगातार मुसलमानों की गिरफ़्तारी हुई। जब भी देश के अंदर कहीं आतंकवाद की कोई घटना घटती, मुसलमानों को...

जन्मदिवस पर विशेष: फ़ारूक़ी में हिंदुस्तानी तहज़ीब और अदबी रिवायत की थी गहरी समझ

समूचे दक्षिण एशिया की उर्दू-हिंदी अदबी दुनिया में शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी का नाम किसी तआरुफ़ का मोहताज़ नहीं। उनका नाम बड़े ही इज़्ज़त-ओ-एहतराम के साथ लिया जाता है। आधुनिक उर्दू आलोचना में किया गया फ़ारूक़ी का काम संगे मील है।...

रांगेय राघव की पुण्यतिथि: शोषण की घुटन सदैव नहीं रहेगी

रांगेय राघव हिंदी के सर्वोच्च रचनाकारों में से एक हैं। वे विलक्षण रचनाकार थे, जिनके लिए लिखना ही जीवन था। उन्होंने कम उम्र में विपुल लेखन किया। रांगेय राघव को महज उनचालीस साल उम्र मिली और उन्होंने इतने ही...

जयंती पर विशेष: प्रेमचंद के साहित्य में किसानों के सवाल

हिन्दी-उर्दू साहित्य में कथाकार प्रेमचंद का शुमार, एक ऐसे रचनाकार के तौर पर होता है, जिन्होंने साहित्य की पूरी धारा ही बदल कर रख दी। प्रेमचंद हमारे क्लासिक के साथ-साथ आधुनिक और संदर्भवान लेखक थे। उनका रचना संसार बाल्जाक...

किताब समीक्षा: कविता की जनपक्षधरता पर शैलेंद्र चौहान की नज़र

शैलेंद्र चौहान बुनियादी तौर पर कवि हैं उन्होंने कुछ कहानियां और एक उपन्यास भी लिखा है। लघु पत्रिका ‘धरती’ का एक लंबे अंतराल तक संपादन भी किया है। आलोचनात्मक आलेख और किताबों की समीक्षा गाहे-बगाहे लिखते रहे हैं। आठवें दशक से...

जॉर्ज फ्लॉयड हत्या मामले में हुआ इंसाफ

अमेरिका की एक अदालत ने जॉर्ज फ्लॉयड हत्या मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मिनियापोलिस के पूर्व पुलिसकर्मी डेरेक शॉविन को हत्या का गुनहगार क़रार देते हुए, 22 साल 6 महीने जेल की सजा सुनाई है। अमेरिका में अश्वेत...

‘उद्भावना’ का कहानी विशेषांक और ज्ञानरंजन के बिगड़े बोल

विशेषांक का विशेष आकर्षण बीती सदी के सातवें दशक के प्रमुख कथाकार और लघु पत्रिका 'पहल' के संपादक ज्ञानरंजन का इंटरव्यू है। लेकिन इस इंटरव्यू में साक्षात्कारकर्ताओं (सवाल पांच लोगों ने तैयार किये हैं) ने ज्ञानरंजन से एक भी...

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बिहार में बीजेपी-जेडीयू की सरकार का दम उखड़ने लगा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस दमघोंटू वातावरण से निकलने को...