Wednesday, July 6, 2022

अमरोहा के विधानसभा क्षेत्रों में कितनी बही विकास की बयार, जानिए सभी विधायकों का रिपोर्ट कार्ड

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पश्चिमी यूपी में अमन की नगरी के नाम से लोकप्रिय शहर अमरोहा ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों के लिए जाना जाता है। यहां कभी पवित्र नदी गंगा और बगद की निर्मल धारा बहती थी लेकिन समय बदला, परिस्थितियां बदलीं, चेहरे बदले और इसके साथ-साथ लोगों की प्राथमिकताएं बदलीं लेकिन जो नहीं बदले वो हैं यहां के हालात। विकास तो हुआ लेकिन जितनी अपेक्षाएं थीं उससे कोसों दूर। अमरोहा जिले में 4 विधानसभा क्षेत्र हैं अमरोहा, धनौरा, हसनपुर और नौगांवा सादात। पिछले विधानसभा चुनावों में केवल एक सीट अमरोहा को छोड़ कर बाकी तीन भाजपा के खाते में गई थीं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में अमरोहा का मूड़ इस बार पिछले चुनावों के मुकाबले भिन्न रहने वाला है। आइये जानते हैं भाजपा के शासनकाल में विधानसभा चुनाव क्षेत्र में कितना विकास हुआ?

 विधानसभा क्षेत्र-39 धनौरा : 

धनौरा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी राजीव तरारा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। यह उनका पहला चुनाव था। राजीव तरारा ने सपा के जगराम सिंह को 38 हजार से अधिक मतों से शिकस्त देकर अनोखा रिकार्ड बनाया था। राजीव तरारा को 102943 वोट मिले थे, वहीं समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी जगराम सिंह को 64714 वोटों के साथ संतोष करना पड़ा था लेकिन यदि बात धनौरा विधानसभा क्षेत्र के विकास की की जाए तो जो उम्मीदें थीं उन पर काम नहीं हो सका, राजीव तरारा दोबारा फिर इस विधानसभा क्षेत्र से लड़ रहे हैं लेकिन इस बार वोट बैंक में कमी आ सकती है हालांकि अभी सपा, रालोद ने यहां से अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। इस विधानसभा में औद्योगिक नगरी गजरौला या फिलहाल यूं कहें प्रदूषण नगरी शामिल है। 

गजरौला कभी प्रदूषण मुक्त औद्योगिक फैक्ट्रियों का‌ सपना था लेकिन इन फैक्ट्रियों ने जितना यहां के जनजीवन को तबाह किया उतना किसी ने‌ नहीं किया। वैसे तो गजरौला, धनौरा विधानसभा क्षेत्र में आता है लेकिन फैक्ट्रियों के प्रदूषण का‌ प्रभाव 40 – 50 किमी दूर तक भी देखा जा सकता है यह सच है कि आज यहां के पर्यावरण प्रदूषण ने पश्चिमोत्तर प्रदेश को भयंकर अंधकार की गर्त में धकेल दिया है।

फैक्ट्रियों के प्रदूषण ने अमरोहा की नदियों को बड़े पैमाने पर प्रदूषित किया है‌। अमरोहा, संभल और बदायूं जिले के गांवों के लिए कभी जीवन रेखा बनने वाली बगद नदी का पानी जहरीला हो गया है। औद्योगिक नगरी गजरौला में एशिया की बेशुमार फैक्ट्रियों में शामिल जुबिलेंट लाइफ साइंसेज कंपनी की बगल से होकर जा रही बगद नदी और उसके आसपास के भूजल स्तर को जहरीला हुए एक अरसा हो गया है।

हाल ये है कि बगद से सटे गांव के हैंडपंप और खेतों पर लगे ट्यूबवेल भी जहरीला पीला और लाल पानी उगलते हैं। रोज़गार निर्माण के उद्देश्य से दशकों पहले लगी फैक्ट्रियों ने आसपास के इलाके को अपने जहरीले केमिकल युक्त पानी से बंजर भूमि में तब्दील कर दिया है। यहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन तकरीबन सौ से अधिक मरीज श्वांस, अस्थमा, एलर्जी की शिकायत वाले पहुंचते हैं। बगद नदी के आसपास के करीब 40 गांवों के लोग जहरीला पानी पीने के लिए मजबूर हैं। इतना ही नहीं बदायूं के कछला घाट के पास पहुंचकर बगद नदी गंगा में मिल रही है जिससे जहरीला केमिकलयुक्त पानी गंगा नदी में मिलकर उसे भी प्रदूषित कर रहा है और गंगा नदी प्रदेश में जहां-जहां से गुजर रही है वहां अपना ज़हरीला विष छोड़ने के लिए मजबूर है।

धनौरा विधानसभा के गांव मलेशिया में 24 अगस्त,2021 को एक केस सामने आया था, जहां मलेशिया शुगर मिल पर पर्यावरण मानदंडों के उल्लंघन की सूचना मिली थी।इसकी जांच के लिए एनजीटी ने एक संयुक्त समिति का गठन किया और वेव इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा एक चीनी कारखाने के संचालन में पर्यावरण मानदंडों के उल्लंघन के खिलाफ एक याचिका पर रिपोर्ट मांगी‌। जांच में पता चला कि इस शुगर मिल से अपशिष्ट पानी छोड़ने के कारण प्रदूषण ने 5,000 छात्रों और 15 गांवों के 0.1 मिलियन निवासियों के स्वास्थ्य को खतरे में डाल दिया है।

वहीं धनौरा विधानसभा में सड़कों का निर्माण तो हुआ लेकिन लच्छेदार व्यवस्था और सेंधमारी के कारण सड़कें टिक नहीं पायीं। सितंबर महीने में आशिकपुरा गांव में लब्बोलुआब तरीके से जलभराव की समस्या आई थी, हाल ही के दिनों में बारिश से ग्राम कुआं खेड़ा, तालाब में तब्दील हो गया था। थोड़ी बारिश से भी यहां जलभराव की शिकायतें आम हैं। 

विधानसभा क्षेत्र-40 नौगांवा सादात :

 नौगांवा सादात विधानसभा सीट से भाजपा के दिवंगत नेता और पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान विजयी हुए थे लेकिन चेतन चौहान के कोरोना से मौत हो जाने के कारण यहां से मौजूदा विधायक भाजपा की संगीता चौहान हैं उन्होंने विधानसभा उपचुनावों में अखिलेश यादव के बेहद करीबी जावेद आब्दी को पराजित किया था। चौहान ने 97030 वोटों के साथ, सपा के जावेद आब्दी को 76382 को करारी शिकस्त दी थी। नौगांवा सादात विधानसभा सीट मुस्लिम बाहुल्य सीट के रूप में जानी जाती है हालांकि इस सीट पर चौहान और जाट मतदाताओं की संख्या भी काफी है इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा शिया समुदाय के मुस्लिम मतदाताओं की है। इस बार भाजपा के प्रत्याशी पूर्व सांसद देवेंद्र नागपाल हैं, क्षेत्र में चौहानों के दबदबे को देखकर भाजपा ने यह दांव खेला है जबकि सपा से अभी किसी की तस्वीर स्पष्ट नहीं हो पाई है, हालांकि समाजवादी पार्टी के पूर्व पंचायत मंत्री कमाल अख्तर के नाम पर मुहर लगने की खबर भी सामने आई थी लेकिन अब खबर है कि उन्हें कांठ भेज दिया गया है और नौगावां से अब सपा के समर पाल सिंह प्रत्याशी घोषित किये गए हैं।

नौगावां सादात का‌ भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में बड़ा

महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यहां के स्थानीय लोगों ने ब्रिटिश सरकार के ताबूत में कीलें ठोक दी थीं इन्हीं स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान के लिए उप जिलाधिकारी मांगेराम चौहान ने यहां के 18 स्वतंत्रता सेनानियों के लिए सरकार को स्मारक बनवाने का प्रस्ताव भेजा था काफी समय बीत गया लेकिन स्वतंत्रता सेनानियों के याद में न तो कोई पार्क बना और ना ही कोई स्मारक। जिलाधिकारी उमेश मिश्र ने सेनानियों के सम्मान के लिए आश्वासन दिया था लेकिन वो भी ठंडे बस्ते में चला गया।

विधानसभा क्षेत्र-41 अमरोहा:

अमरोहा विधानसभा सीट से सपा के कद्दावर नेता महबूब अली ने 74,713 वोट हासिल किये थे जिसके साथ उन्होंने बसपा के नौशाद अली इंजीनियर (59671) और भाजपा के कुंवर सैनी (45420) को हराया था। महबूब अली का पद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश से इंच भर भी कम नहीं है, महबूब अली सन् 1995 से लगातार पांचवीं बार विधायक हैं और इस बार भी समाजवादी पार्टी की तरफ से प्रत्याशी के तौर पर चुने गए हैं।

यदि अमरोहा की बात की जाए तो शहर में जाम की समस्या सबसे बड़ी है। बाईपास होते हुए भी भारी व बड़े वाहन शहर से होकर गुजरते हैं। इससे बड़ी दुर्घटना का संकट बना रहता है और अमरोहा-बिजनौर मार्ग पर जाम की स्थिति बनी रहती है। अमरोहा-बिजनौर मार्ग पर अतिक्रमण और डिवाइडर न होने के कारण भी जाम की स्थिति बनी रहती है। वाहन चालकों से लेकर शहरवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। शहर में अवैध ई-रिक्शा, ऑटो भी काफी संख्या में दौड़ रहे हैं, जो जाम का कारण बन रहे हैं। इस ओर भी पुलिस प्रशासन को कोई ध्यान नहीं है। शहर के अंदर भी जाम की स्थिति बनी रहती है।

वहीं शहर की बनावट तालाबनुमा होने के कारण पानी की निकासी भी बड़ी समस्या है। रास्ते ऊंचे हो गए हैं और नालियां नीचे पड़ गई हैं। सीवर लाइन शहर में है नहीं, जिसके कारण शहर में जलभराव की स्थिति बनी रहती है। बरसात के दिनों में स्थिति और विकट हो जाती है। अमरोहा शहर को जलभराव से निजात दिलाना प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। उधर प्रशासन की अनदेखी के चलते जिले में कई नदी लुप्त होने की कगार पर पहुंच गई हैं। प्रसिद्ध शायर जौन एलिया की पसंदीदा बान का अस्तित्व समाप्त हो गया है । सोत नदी का भी कोई अता-पता नहीं। अवैध कब्जे के चलते नदियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। सोत नदी पर कहीं फसल खड़ी हैं तो कहीं इमारतें खड़ी हैं। नदियों की भूमि से अवैध कब्जों को हटवाना प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। उधर महबूब अली के गांव शकरपुर में कुछ अपराध प्रवृत्ति के लोग निवास करते थे इस संबंध में महबूब अली के भाई सहित 21 लोगों पर आपराधिक मामला भी दर्ज किया गया था हालांकि प्रशासन अब उन्हें यहां से हटा चुका है।

विधानसभा क्षेत्र-42 हसनपुर :

2017 के विधानसभा चुनावों में अमरोहा जिले के अन्तर्गत यदि समाजवादी पार्टी के लिए सबसे बड़ी हार कोई थी तो वो हसनपुर विधानसभा क्षेत्र की थी। पहले ये गंगेश्वरी ब्लॉक का हिस्सा होता था लेकिन परिसीमन आने के बाद से यहां सन 2012 में चुनाव हुए जिसमें समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता कमाल अख्तर विजयी हुए थे। साल 2017 के विधानसभा चुनावों में यहां से समाजवादी पार्टी के पूर्व पंचायत मंत्री कमाल अख्तर सपा के प्रत्याशी थे उन्हें भाजपा के प्रत्याशी महेंद्र सिंह खड़गवंशी ने 27 हजार वोटों से करारी शिकस्त दी थी। इस बार भी खड़गवंशी इसी विधानसभा सीट से चुनाव के मैदान में हैं।

हसनपुर विधानसभा क्षेत्र की आबादी कृषि पर आधारित है यहां जिन्हें खड़गवंशी या खागी समुदाय के लोग निवास करते हैं। हसनपुर विधानसभा क्षेत्र में यदि ग्रामीण विकास की बात करें तो अभी गांवों को इंटरनेट से जोड़ने की बात तो दूर, मूलभूत सुविधाओं का‌ लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। हसनपुर विधानसभा का बाटूपुरा गांव आज भी विकास की बाट जोह रहा है। गांव में पेयजल की सुविधा भी खास नहीं है। हैंडपंप भी खराब पड़े हुए हैं। ग्रामीणों को आज तक नल जल योजना का लाभ नहीं मिला है‌‌।वहीं शासन-प्रशासन द्वारा आज तक आंगनबाड़ी भवन में सामुदायिक भवन, संस्कृति भवन का निर्माण भी जर्जर हाल में है।ग्रामीण किसी की शादी-ब्याह, प्रतिभोज कार्यक्रम के समय घरों के बरामदे व गलियों का उपयोग करते हैं‌। गांव में मुक्तिधाम तक नहीं है।ग्रामवासी सबका खुले में दाह संस्कार करते हैं।बारिश के दिनों में तकलीफ होती है।स्वास्थ्य सुविधा भी गांव में नहीं है, जबकि गांव औद्योगिक क्षेत्र के समीप है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अधिकारियों से शिकायत करते हुए समस्या निस्तारण की गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। गांव में जलभराव की वजह से लोगों का निकलना मुश्किल है। मार्ग पर कीचड़ पसरी हुई है। जरा सी बरसात होते ही सड़कों पर कई-कई फीट पानी जमा हो जाता है। गांव में मच्छरों की भरमार है। गंदगी की वजह से बरसात के मौसम में बीमारी की आशंका बनी हुई है। लुहारी खाद्य निवासी सुनील शर्मा का कहना है कि हसनपुर क्षेत्र में बच्चों के लिए शिक्षा की भारी कमी है इस विधानसभा क्षेत्र में गांवों में स्कूलों की हालत खस्ता ही है बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए अब भी शहरों का ही रुख करना पड़ रहा है। 

वहीं हसनपुर विधानसभा क्षेत्र से पवित्र नदी गंगा होकर गुजरती है, इसलिए इस क्षेत्र को ‘खादर’ कहा जाता है। इस क्षेत्र में नदी का जल स्तर सामान्य ही रहता है लेकिन जब बरसात के दिनों में बिजनौर बैराज से पानी छोड़ा जाता है तो इसका स्तर असामान्य हो जाता है और कभी कभी ऐसी स्थिति हो जाती है कि गांव के गांव तैरने लगते हैं इससे कालागढ़ बांध के टूटने का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में स्थानीय लोगों के लिए बरसात के मौसम में रहन सहन की समस्या उत्पन्न होने लगती है। हसनपुर विधानसभा का गंगेश्वरी ब्लॉक में समझिए कि गंगा नदी के क्षेत्र में ही बसा हुआ है, यहां अधिकतर कच्चे मकान हैं कब बारिश से उजड़ जाएं कह नहीं सकते। गंगा घाट पर बसे पुरोहित जलमग्न हो जाते हैं। गंगा किनारे बसे गांव जलमग्न हो जाते हैं और वही फसलें बर्बाद हो जाती हैं। 

अब जब भारतीय जनता पार्टी ने महेंद्र सिंह खड़गवंशी को हसनपुर विधानसभा चुनाव क्षेत्र से टिकट दिया है तो स्थानीय लोगों का गुस्सा भी देखने को मिल रहा है, जबसे ग्रामीण वासियों को टिकट मिलने की सूचना मिली तभी से लोग महेंद्र सिंह खड़ग वंशी के पुतले जला रहे हैं और इस बार खड़गवंशी के बहिष्कार की बात कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि महेन्द्र सिंह ने क्षेत्र में कोई काम नहीं किया है, न सड़कें हैं, न शिक्षा और ना ही स्वास्थ्य।

(अमरोहा से स्वतंत्र पत्रकार प्रत्यक्ष मिश्रा की रिपोर्ट।)

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