संस्कृति-समाज

नये चिंतन, विचार और ज्ञान की सर्जक थीं सावित्री बाई फुले

सावित्रीबाई फुले का व्यक्तित्व बहुआयामी है। वह महान शिक्षिका, बहुजनों और महिलाओं की मुक्ति के लिए संघर्ष… Read More

सफदर स्मृति दिवस: ‘लड़ें तो जीत भी सकते हैं, ना लड़ें तो हार तय है’!

हम सब कॉमरेड सफदर हाशमी के पार्थिव शरीर की अंत्येष्टि के लिए दिल्ली में यमुना तट पर… Read More

सीएए विरोधी आंदोलन का जिंदा दस्तावेज है भाषा सिंह की नई किताब ‘शाहीन बाग: लोकतंत्र की नई करवट’

नई दिल्ली। दिल्ली स्थित प्रेस क्लब में बृहस्पतिवार को वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका भाषा सिंह की नई… Read More

स्मृति दिवस: मामा बालेश्वर ने कराया था रियासतों में बेगारी प्रथा और स्वतंत्र भारत में जागीरदारी प्रथा का खात्मा

मामाजी बालेश्वर दयाल जी का 26 दिसंबर को 23 वां स्मृति दिवस है। आज 25 दिसंबर की… Read More

सचमुच में नींव की ईंट थे बहुआयामी व्यक्तित्व के मालिक रामवृक्ष बेनीपुरी

रामवृक्ष बेनीपुरी का व्यक्तित्व बहुआयामी था। उन्होंने गद्य-लेखक, शैलीकार, पत्रकार, स्वतंत्रता सेनानी, समाज-सेवी, हिंदी प्रेमी, निबंधकार और… Read More

जयंती पर विशेष: देश को मोदी जैसा किसान विरोधी नहीं, चरण सिंह जैसा किसानों का हमदर्द प्रधानमंत्री चाहिए!

पिछले दिनों इस देश के अन्नदाताओं को दिल्ली के वर्तमान क्रूर, असहिष्णु , बदमिजाज, अमानवीय, फॉसिस्ट, तानाशाही… Read More

गेंदालाल दीक्षित की पुण्यतिथि: एक भूला बिसरा क्रांतिकारी और उसके साहसिक कारनामे

देश की आज़ादी कई धाराओं, संगठन और व्यक्तियों की अथक कोशिशों और कुर्बानियों का नतीज़ा है। गुलाम… Read More

काकोरी के शहीद बताते हैं कि भीख नहीं कुर्बानियों से मिली है आजादी

‘कस ली है कमर अब तो,कुछ करके दिखाएंगे, आजाद  ही  हो  लेंगे, या सर  ही  कटा  लेंगे…’… Read More