संस्कृति-समाज

स्मृति शेष:लेखक और पत्रकार राजकुमार केसवानी, जिनकी तमाम तहरीर में हिंदोस्तानी तहज़ीब झलकती थी

राजकुमार केसवानी से मेरा पहला तआरुफ़ उनके वीकली कॉलम ‘आपस की बात’ के मार्फ़त हुआ, जो मध्य… Read More

‘द लिस्ट : मीडिया ब्लडबाथ इन कोविड टाइम्स’ यानी पत्रकारों पर कोरोना कहर की जिंदा दास्तान

ऐसा माना जाता है कि पत्रकारिता एवं फिल्में समाज का आईना होती हैं। समाज में जो कुछ… Read More

सांस्कृतिक भड़ैंती और फूहड़पन के विरुद्ध, जन संस्कृति के संवर्द्धन का बिगुल बजाता ‘लोकरंग’

“सांस्कृतिक भड़ैंती और फूहड़पन के विरुद्ध, जन संस्कृति के संवर्द्धन के लिए” टैगलाइन के साथ साल 2008… Read More