संस्कृति-समाज

किताबें मत जलाइए, ऐसा इंतज़ाम कीजिए कि लोग उन्हें पढ़ ही न पाएं!

‘आप भले मेरी किताबें और यूरोप के सबसे उन्नत मस्तिष्कों की किताबें जला देंगे, लेकिन उन विचारों… Read More

पुण्यतिथि पर विशेषः अंदरूनी अत्याचारियों से विद्रोह चाहते थे लोहिया

अगर माखनलाल चतुर्वेदी एक भारतीय आत्मा थे तो डॉ. राममनोहर लोहिया एक बेचैन भारतीय आत्मा थे। वे… Read More

जन्म शताब्दी विशेषः अपेक्षित सम्मान से वंचित रह गए ‘महाराष्ट्र के गोर्की’ अन्नाभाऊ साठे

एक जुट का नेता हुआ मजदूर तय्यार!बदलने दुनिया सारी गरज रही ललकार!सदा लड़े, मरने से उसे ना… Read More

जयंती पर विशेष: जेपी का इस्तेमाल छोड़ें, उन्हें समझने की कोशिश करें

आज लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती है और जाहिर है उन्हें पूरे देश में अलग-अलग तरीके से… Read More

जयंती पर विशेष: जनेऊ तोड़ने के बाद जब जेपी ने लिया सप्तक्रांति का संकल्प

संपूर्ण क्रांति आंदोलन के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण की आज जयंती है। हम एक दिन पूर्व उनके… Read More

पुण्यतिथिः मुंशी प्रेमचंद मानते थे- किसानों को स्वराज की सबसे ज्यादा जरूरत

हिंदी-उर्दू साहित्य में कथाकार मुंशी प्रेमचंद का शुमार, एक ऐसे रचनाकार के तौर पर होता है, जिन्होंने… Read More

पूंजी की सभ्यता-समीक्षा के कवि मुक्तिबोध

मुक्तिबोध गहन संवेदनात्मक वैचारिकी के कवि हैं। उनके सृजन-कर्म का केंद्रीय कथ्य है-सभ्यता-समीक्षा। न केवल कवितायें बल्कि… Read More