इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्रकार सत्यम वर्मा की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी को नोटिस जारी किया है। वर्मा ने अप्रैल 2026 के नोएडा मज़दूर आंदोलन के संबंध में राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून, 1980 (एनएसए) के तहत अपनी निवारक हिरासत को चुनौती दी है।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने नोटिस जारी करते हुए 7 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
वर्मा ने 12 मई 2026 के जिलाधिकारी के हिरासत आदेश के साथ राज्य सरकार के 20 मई के अनुमोदन और 10 जून के बाद के आदेश को भी चुनौती दी है। उन्होंने तत्काल रिहाई और कथित अवैध हिरासत के लिए मुआवजे की मांग की है।
याचिका में दावा किया गया है कि हिरासत आदेश इस “तथ्यात्मक रूप से असंभव” आधार पर बनाया गया कि वर्मा 13 अप्रैल को नोएडा में हुई हिंसा में शामिल थे। वर्मा का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) के अनुसार वह उस दिन नोएडा से करीब 500 किलोमीटर दूर लखनऊ में थे, जहां उन्हें दोपहर 2:14 बजे हसनगंज पुलिस ने हिरासत में लिया था।
याचिका में आरोप है कि जांच अधिकारी ने संबंधित सीसीटीवी और सीडीआर को हिरासत प्राधिकारी के सामने पेश नहीं किया। वर्मा ने यह भी कहा है कि हिरासत के लिए राज्य द्वारा जिन 11 एफआईआर पर भरोसा किया गया, उनमें किसी में भी उनका नाम नहीं है।
याचिका में दावा किया गया है कि मामला मूल रूप से न्यूनतम मजदूरी को लेकर स्थानीय श्रमिक विवाद था, जो “कानून एवं व्यवस्था” का विषय हो सकता है, लेकिन इसे “पब्लिक ऑर्डर” के लिए खतरे के रूप में पेश किया गया।
वर्मा ने आरोप लगाया है कि उनकी पेशेवर आय को भी कथित तौर पर “रॉयट फंडिंग” बताया गया, जबकि उनका कहना है कि यह वर्षों से उनके पेशे से अर्जित आय है और आयकर रिटर्न में घोषित है।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए), 19(1)(सी), 21 और 22(5) के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। वर्मा का आरोप है कि राज्य सरकार का 20 मई का अनुमोदन आदेश उन्हें नहीं दिया गया, जिससे प्रभावी प्रतिनिधित्व का अवसर प्रभावित हुआ। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनका 21 मई का प्रतिनिधित्व एडवाइजरी बोर्ड के सामने नहीं रखा गया।
26 मई की एडवाइजरी बोर्ड सुनवाई पर भी सवाल उठाते हुए कहा गया है कि उन्हें केवल करीब 18 घंटे पहले सूचना दी गई। वर्मा ने इसी आंदोलन से जुड़े आकृति चौधरी के मामले में हाईकोर्ट द्वारा एनएसए हिरासत आदेश रद्द किए जाने का भी हवाला दिया है और समानता के आधार पर अपनी हिरासत रद्द करने की मांग की है।
याचिका में 17-18 अप्रैल की दरम्यानी रात हुई उनकी प्रारंभिक गिरफ्तारी की प्रक्रिया को भी चुनौती दी गई है। अब हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी।
(फोटो : सत्यम वर्मा रिहाई मंच फेसबुक पेज से साभार)
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)