Wednesday, October 5, 2022

इविवि छात्र आंदोलन के 17वें दिन छात्रों ने निकाली कुलपति की शवयात्रा, पुलिस से तीखी झड़प

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दो सप्ताह से ज़ारी छात्र आंदोलन के 17 वें दिन कल आंदोलनकारी छात्रों द्वारा कुलपति की शवयात्रा निकाली गयी। शव यात्रा निकालने के दौरान प्रॉक्टर के निर्देश पर पुलिस प्रशासन द्वारा छात्रों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग किया गया जिसके चलते छात्र और पुलिस आमने-सामने आ गये। पुलिस ने शव निकाल रहे छात्रों को दौड़ाकर पकड़ा और प्रतीकात्मक शव को क़ब्ज़े में ले लिया। छीना झपटी के दौरान भी छात्र ‘राम नाम सत्य है’ कहते हुए बताशा मखाना शवयात्रा पर फेकते रहे। दोनों के बीच तीखी झड़प हुई। इससे पहले छात्रसंघ द्वार को खुलवाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन से भिड़ंत हुई थी। इससे दो दिन पहले बुधवार को छात्रों ने इविवि कैंपस में कुलपति का पुतला दहन किया था।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की शिक्षा विरोधी नीति के ख़िलाफ़ छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यूनियन गेट पर ताला लगाकर छात्रों के आवागमन को बाधित करने की कोशिश की जिसके ख़िलाफ़ आक्रोशित छात्रों ने ताला तोड़कर गेट को पुनः खोल दिया।

छात्र भानु आरोप लगाते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन पुलिस बल के साथ छात्रों की आवाज़ को दबाना चाहता है जो पुलिस बल के साथ छात्रों पर बर्बर तरह से हमला बोल रहा है जिसमें आयुष प्रियदर्शी को ऐसे पुलिस प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मारा गया है जिसके शरीर के विभिन्न हिस्सों में गंभीर चोट आई है।

दूसरी ओर धरना-प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से ज़ारी रहा। आंदोलनरत छात्रों एवं विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल बोर्ड के साथ बड़े लम्बे समय तक खींचतान चली। छात्रों ने कहा कि स्पष्ट तौर पर सनकी कुलपति, विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार भी यह समझ ले कि ये जंग यूं ही तब तक जारी रहेगी जब तक ये छात्र – शिक्षा विरोधी फ़ीस वृद्धि का तुगलकी फरमान वापस नहीं ले लिया जाता; चाहे उसके लिए कितनी भी कुर्बानियां देनी पड़ें।

वहीं कल के बवाल के बाद छात्रों ने मांग की है कि चीफ प्रॉक्टर समेत प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सभी सदस्य जिन्होंने छात्रों के साथ मारपीट किये उनका तत्काल निलंबन किया जाए तथा कैंपस से पुलिस को बाहर किया जाये। प्रदर्शन में शामिल आइसा के प्रदेश अध्यक्ष आयुष श्रीवास्तव ने अपनी बात रखते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के छात्र फीस वृद्धि और नई शिक्षा नीति दोनों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं और इसे वापस कराने के लिए वह किसी भी स्तर तक जाएंगे।

छात्र नेता शशांक अनिरुद्ध का कहना है कि जहां एक तरफ विश्वविद्यालय प्रथम तानाशाही पर पड़ा हुआ है तो वहीं छात्रों ने भी यह ठान लिया है कि शिक्षा को बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा और इलाहाबाद विश्वविद्यालय की विरासत को बचाने के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ी जाएगी।

छात्र गौरव ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन पुलिस के बल पर अगर आंदोलन को खंडित करने की कोशिश करेगा तो छात्र भी विश्वविद्यालय कैंपस के बाहर परिजनों, नागरिक समाज तथा समाज के विभिन्न हिस्सों को साथ लाकर नई शिक्षा नीति और फीस वृद्धि के इस तुग़लकी तानाशाही फरमान के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरेंगे। इसी क्रम में मध्य कालीन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर विक्रम भी छात्रों के बीच उनकी मांगों का समर्थन करने के लिए धरना स्थल पर आए और उनसे बातचीत करते हुए उनके आंदोलन को समर्थन दिया।

बता दें कि इविवि में चौगुना फीस वृद्धि की गई है। बीए कोर्स की ट्यूशन फ़ीस पहले 975 रुपये थी अब 3701 रुपये कर दी गई। बीए प्रैक्टिकल की फ़ीस को 1125 रुपये से बढ़ाकर 3991 रुपये कर दिया गया। बी. काम की फ़ीस पहले जहां 975 रुपये थी वह अब 3901 रुपय कर दी गई है। बीएससी की फ़ीस 1125 रुपये से 4151 रुपये कर दी गई। बीटेक की फ़ीस 1941 रुपये से 5151 रुपये कर दी गई है।

एलएलबी की फ़ीस 1375 रुपये से 4651 रुपये, वहीं होस्टल फीस 15000 (सालाना) से बढ़ाकर 45000 रुपये कर दिया गया है। सत्र 2022-23 से दाख़िला लेने वाले छात्रों को अब चार सौ प्रतिशत अधिक ट्यूशन फ़ीस देना पड़ेगा। ट्यूशन फ़ीस के अलावा इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बैक पेपर, ट्रांसक्रिप्ट, डिग्री जुर्माना, डुप्लीकेट, मार्कशीट निकलवाना आदि बहुत महंगा हो गया है। अतः अब छात्रों को ज़्यादा जेब ढीला करना पड़ेगा। परास्नातक में बैक पेपर शुल्क 250 रुपये से बढ़ाकार 500 रुपये कर दिया गया है।

इसी तरह भूतपूर्व स्नातक, परास्नातक विद्यार्थियों के लिए बैक पेपर परीक्षा का शुल्क 400 रुपये से बढ़ाकर एक हजार रुपये कर दिया गया है। उत्तर पुस्तिका देखने के लिये अब 100 रुपये के बजाय 200 रुपये देने पड़ेंगे। स्नातक में बैक पेपर परीक्षा के लिए 200 रुपये की जगह 500 रुपये देना होगा। इसी तरह डिग्री जुर्माना में पांच गुना वृद्धि करते हुए 100 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है। प्रति सेट ट्रांसक्रिप्ट फीस में चार गुना बढ़ोत्तरी के साथ 2000 रुपये कर दिया गया है, पहले यह 500 रुपये थी। वहीं पीएचडी परीक्षा फीस 2 हजार रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दी गई है।

(प्रयागराज से जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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