रांची। वोट चोरी, असंवैधानिक एवं गैरकानूनी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ तथा लोकतंत्र और नागरिकों के मताधिकार की रक्षा की मांग को लेकर शुक्रवार, 23 अक्टूबर को रांची में साझा मार्च एवं प्रतिवाद सभा आयोजित की गई।
मार्च रांची विश्वविद्यालय गेट से शुरू होकर अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंचा। इसमें ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), ऐपवा, साझा कदम, सीजेपी, एसएफआई, एआईएसएफ, झारखंड जनाधिकार महासभा, ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन सहित विभिन्न छात्र-युवा, सामाजिक, नागरिक एवं राजनीतिक संगठनों के सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एसआईआर को वापस लेने और मताधिकार की संवैधानिक गारंटी सुनिश्चित करने की मांग की।
आइसा रांची जिला अध्यक्ष विजय कुमार ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं। मतदाता सूची के नाम पर किसी भी नागरिक को उसके मताधिकार से वंचित करने की कोशिश लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। उन्होंने कहा कि वोट चोरी और एसआईआर के जरिए मताधिकार को कमजोर करने की किसी भी कोशिश के खिलाफ छात्र-युवा आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
साझा कदम के प्रवीर पीटर ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी प्रगतिशील और नागरिक संगठनों से एकजुट होकर संघर्ष तेज करने की अपील की। वहीं, सीजेपी की सृष्टि ने चुनावी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि नागरिकों के वोट की रक्षा करना लोकतंत्र बचाने की अनिवार्य शर्त है। ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा के बाद आमलोगों में जागरूक होंगे और इस तरह की लोकतंत्र विरोधी सरकार को वोट देने से बचाव करेंगे।
मार्च में आइसा झारखंड राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ, सुहानी मेहता, सुफियान, सोहेल अंसारी, मजहर आलम, निखिल राज, स्वेत, आकाश रंजन, नंदिता भट्टाचार्य, नौरोन अख्तर, एआईएसएफ जिला अध्यक्ष एहतेशाम प्रवीण, एसएफआई के हरिस और अमन सहित विभिन्न संगठनों के सदस्य शामिल हुए।
(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)