एफआईआर के खिलाफ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में लगातार रिपोर्टिंग करने वाले यूट्यूबर पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने गाजियाबाद पुलिस द्वारा रोड रेज के एक कथित फर्जी मामले में एफआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि एफआईआर फ़र्ज़ी आरोपों पर आधारित है और उनकी खोजी पत्रकारिता के कारण उन्हें परेशान करने का प्रयास है।

उन्होंने एफआईआर रद्द करने और गिरफ्तारी या दबाव वाली कार्रवाई से सुरक्षा देने की मांग की है।

एफआई आर 18 अगस्त को इन्द्रपुरम पुलिस थाने में दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार एक मोटरसाइकिल सवार को एक बलेनो कार ने शिप्रा मॉल के निकट टक्कर मारी थी। शिकायतकर्ता मोटरसाइकिल सवार ने आरोप लगाया कि कार चालक (उपाध्याय) ने उससे गालीगलौज किया और धमकाया।

उपाध्याय ने आरोप को गलत बताया और कहा कि वह अपनी बेटी के साथ उसके स्कूल से लौट रहे थे जब एक मोटरसाइकिल सवार उनके सामने आया और हंगामा करने लगा। उपाध्याय के अनुसार कोई टक्कर या कोई शारीरिक हाथापाई नहीं ही और बिना झगड़े के वह वहां से चले गये क्योंकि उनकी बेटी उनके साथ थी। 

उपाध्याय ने कहा कि उन्हें न तो पूरी एफआई आर दी गई है और न अपलोड की गई है जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के यूथ बार एसोसिएशन निर्णय में निर्देश हैं। 

उपाध्याय ने यह भी आरोप लगाया है कि 20 अगस्त की रात दर्जन भर पुलिसकर्मी उनके घर में पहुंचे थे जब वह घर पर नहीं थे। उनकी पत्नी और दो बेटियां घर पर थीं।

उपाध्याय के अनुसार वह अलाहाबाद उच्च न्यायालय नहीं जा सकते क्योंकि उन्हें गिरफ्तार किए जाने की आशंका है और अदालत से अंतरिम राहत मांगी है।

वैकल्पिक राहत के तौर पर उन्होंने मामले की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस के बजाय सीबीआई समेत किसी भी और जांच एजेंसी से कराने की मांग की है और कहा है कि वह जांच में सहयोग के लिए तैयार हैं।

(जनचौक ब्यूरो)

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