नोएडा मज़दूर आंदोलन में आकृति पर रासुका का मामला : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हिंसा में संलिप्तता का वीडियो प्रमाण मांगा

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार, 1 सितंबर को उत्तर प्रदेश सरकार से वीडियो प्रमाण मांगा कि नोएडा मजदूर आंदोलन को लेकर गिरफ्तार आकृति चौधरी ने प्रदर्शनकारियों को पथराव या आगजनी के लिए उकसाया था। 

आकृति पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाया गया है।

लाइव लॉ के अनुसार न्यायाधीश अतुल श्रीधरन और अचल सचदेव की पीठ ने यह निर्देश चौधरी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। 

अदालत हिंसा में आकृति की कथित संलिप्तता को लेकर सरकार के पक्ष से संतुष्ट नहीं थी। 

सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस से आकृति के खिलाफ लगाए आरोपों को लेकर ठोस सामग्री प्रस्तुत करने को कहा।

अदालत ने पूछा कि यह कहां दर्ज है कि आकृति ने लोगों को बुलाकर पथराव के लिए और वाहनों को आग लगाने के उकसाया।

राज्य की तरफ से कहा गया कि आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है तो अदालत ने कहा कि राज्य को जांचना चाहिए कि गवाह ने कहां आकृति का नाम लिया है।

राज्य ने गवाहों की गवाही का हवाला दिया। अदालत ने फिर वीडियो में पुलिस से दिखाने को कहा कि कहां आकृति लोगों को हिंसा के लिए उकसा रही है।

अदालत ने जानना चाहा कि क्या पुलिस ने घटना की वीडियोग्राफी की है और वह फुटेज बताए कि आकृति भड़का रही है।

राज्य ने कहा कि वह वीडियो प्राप्त करेंगे और रिकॉर्ड पर लायेंगे और समय मांगा।

अदालत ने समय देने से मना करते हुए कहा कि आकृति पांच महीने से जेल में है।

राज्य ने तब कल सुबह 10 बजे तक का समय मांगा। अदालत ने समय दिया। न्यायाधीश श्रीधरन ने मौखिक टिप्पणी की कि अगर सामने आया कि शक्तियों का गैर इस्तेमाल किया गया है तो डीएम और एसएसपी पर जुर्माना लगाया जाएगा।

25 वर्षीय आकृति दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में ग्रेजुएट हैं। 

आकृति अप्रैल में न्यूनतम वेतन वृद्धि को लेकर नोएडा में मजदूरों के आंदोलन के दौरान गिरफ्तार उन मजदूर कार्यकर्ताओं में शामिल हैं, जिन पर पुलिस ने “साजिश” का आरोप लगाया था। इनमें पत्रकार सत्यम वर्मा, इंजीनियर आदित्य आनंद, ऑटो चालक रूपेश रॉय, छात्र हिमांशु ठाकुर, कलाकार सृष्टि गुप्ता शामिल थे। 13 मई को पुलिस ने आकृति और सत्यम पर रासुका लगाने की घोषणा की थी।

नोएडा पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने मीडिया से बातचीत में दावा किया था पुलिस के पास वर्मा और चौधरी तथा गिरफ्तार किए अन्य 65 लोगों के ख़िलाफ़ “मज़बूत इलेक्ट्रॉनिक और वीडियोग्राफिक प्रमाण” थे।

(जनचौक ब्यूरो)

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