Monday, August 15, 2022

परिसीमन आयोग ने जम्मू के लिए 6 और घाटी में 1 सीट बढ़ाने का दिया प्रस्ताव, पार्टियों ने किया विरोध

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जम्मू-कश्मीर से जुड़े परिसीमन आयोग ने जम्मू के लिए छह अतिरिक्त विधानसभा सीटें और कश्मीर घाटी के लिए केवल एक सीट बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही उसने अनुसूचित जनजातियों के लिए 9 सीटें प्रस्तावित की हैं। हालांकि अभी तक यह ज्ञात नहीं हो पाया है कि ये सीटें कहां होंगी। घाटी से जुड़ी पार्टियों ने आयोग के इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह जम्मू और कश्मीर को आपस में लड़ाने की साजिश है। इसके अलावा केंद्र सरकार के एजेंडे को पूरा करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

परिसीमन आयोग ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि – “पहली बार, जम्मू-कश्मीर में, जनसंख्या के आधार पर 90 सीटों में से अनुसूचित जनजातियों के लिए नौ सीटें आवंटित करने का प्रस्ताव है”। अनुसूचित जाति के लिए सात सीटें प्रस्तावित हैं। 

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक़ जम्मू-कश्मीर वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त चंद्र भूषण कुमार ने मीडिया को बताया कि केंद्र शासित प्रदेश में पिछले परिसीमन के बाद से जिलों की संख्या 12 से बढ़कर 20 और तहसीलों की संख्या 52 से 207 हो गई है। 

उन्होंने आगे कहा कि – “आयोग ने कुछ जिलों के लिए एक अतिरिक्त निर्वाचन क्षेत्र बनाने का भी प्रस्ताव किया है, ताकि उन भौगोलिक क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व को संतुलित किया जा सके जहां संचार की कमी है और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर उनकी दुर्गम परिस्थितियों के कारण सार्वजनिक सुविधाओं की कमी है”।

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के लिए विधानसभा क्षेत्रों की सीमा को नए सिरे से निर्धारित करने के मकसद से गठित परिसीमन आयोग ने 16 सीट अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लिए आरक्षित करते हुए जम्मू क्षेत्र में छह अतिरिक्त सीट और कश्मीर घाटी में एक अतिरिक्त सीट का प्रस्ताव रखा है। जम्मू-कश्मीर में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए नौ सीट और अनुसूचित जाति (एससी) के लिए सात सीट का प्रस्ताव रखा गया है। गौरतलब है कि कश्मीर संभाग में फिलहाल 46 और जम्मू में 37 सीट हैं।

बता दें कि उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता वाले आयोग ने सोमवार को दूसरी बैठक की। जम्मू-कश्मीर के पांच लोकसभा सदस्य आयोग के सहयोगी सदस्य और मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा इसके पदेन सदस्य हैं।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला सहित पार्टी के तीन लोकसभा सदस्य पहली बार आयोग की बैठक में शामिल हुए। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह सहित भाजपा के दो सांसद भी बैठक में मौजूद थे। मीडिया सूत्रों के मुताबिक राजनीतिक दलों से सीट संख्या में प्रस्तावित वृद्धि पर 31 दिसंबर तक अपने विचार प्रस्तुत करने को कहा गया है।

विपक्षी दलों ने जताया विरोध 

नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसे दलों ने आपत्ति जताई और आयोग पर आरोप लगाया कि वह ‘‘भाजपा के राजनीतिक एजेंडे को उसकी सिफारिशों को निर्देशित करने’’ की अनुमति दे रहा है।

वहीं इस मसौदे को जम्मू कश्मीर के चुनावी नक्शे को बदलने वाला बताते हुए पीडीपी, जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस ने भी आयोग की मसौदा सिफारिशों का कड़ा विरोध किया है ।

नेशनल कांफ्रेंस के सांसद हसनैन मसूदी ने कहा है कि – “हमें जम्मू के लिए 6 और कश्मीर घाटी के लिए 1 अतिरिक्त सीटों का प्रस्ताव करने वाला एक मसौदा दिखाया गया था। यह (प्रस्ताव) पूरी तरह से अस्वीकार्य है और 2011 की जनगणना के अनुसार अनुपातहीन है। परिसीमन आयोग ने हमें 31 दिसंबर तक अपनी आपत्ति दर्ज़ कराने को कहा है। 

पांच दलों वाले गुपकर गठबंधन (पीएजीडी)के अध्यक्ष अब्दुल्ला ने बैठक के बाद कहा कि वह समूह के साथ-साथ अपनी पार्टी के सहयोगियों को आयोग के विचार-विमर्श के बारे में जानकारी देंगे।

फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने कहा, “हम पहली बार बैठक में शामिल हुए क्योंकि हम चाहते थे कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की आवाज सुनी जाए। बैठक सौहार्दपूर्ण तरीके से हुई और हम सभी को निष्कर्ष पर पहुंचने के वास्ते अपनाए गए तरीके के बारे में बताया गया।”

उन्होंने कहा, “मैं आयोग को अपने विचार भेजने से पहले अपने वरिष्ठ पार्टी नेताओं के साथ चर्चा करूंगा। हमें उन सीटों के बारे में भी नहीं बताया गया है जो वे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर रहे हैं।”

नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट करके कहा है -” यह बहुत निराशाजनक है कि आयोग ने आंकड़ों के बजाय भाजपा के राजनीतिक एजेंडे को अपनी सिफारिशों को निर्देशित करने की अनुमति दी । वादा किए गए ‘वैज्ञानिक दृष्टिकोण’ के विपरीत, यह एक राजनीतिक दृष्टिकोण है।”

उमर अब्दुल्ला ने आगे कहा कि परिसीमन आयोग की मसौदा सिफारिश “अस्वीकार्य है। जम्मू के लिए छह और कश्मीर के लिए केवल एक-नवनिर्मित विधानसभा क्षेत्र का वितरण 2011 की जनगणना के आंकड़ों के हिसाब से उचित नहीं है।

वहीं पूर्व मंत्री अल्ताफ़ बुखारी की अध्यक्षता वाली जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी ने भी आयोग के प्रस्ताव को ख़ारिज़ करते हुए कहा है कि – “यह हमारे लिए पूरी तरह से अस्वीकार्य है। अपनी पार्टी जनसंख्या और जिलों के आधार पर बिना किसी पूर्वाग्रह के निष्पक्ष परिसीमन कवायद की मांग करती है। हम भारत सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग करते हैं।”

वे लोगों को एक-दूसरे के ख़िलाफ़ खड़ा करना चाहते हैं

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अनुच्छेद 370 के तहत मिले जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को निरस्त करने और पूर्ववर्ती राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित करने के केंद्र सरकार के फैसलों का जिक्र कर कहा है कि -” आयोग केवल धार्मिक और क्षेत्रीय आधार पर लोगों को विभाजित कर भाजपा के राजनीतिक हितों की सेवा के लिए बनाया गया है। असली गेम प्लान जम्मू-कश्मीर में एक ऐसी सरकार स्थापित करने का है, जो अगस्त 2019 के अवैध और असंवैधानिक निर्णयों को वैध करेगी।’’

उन्होंने आगे कहा कि, “परिसीमन आयोग के बारे में मेरी आशंका ग़लत नहीं थी। वे जनगणना की अनदेखी कर और एक क्षेत्र के लिए छह सीट तथा कश्मीर के लिए केवल एक सीट का प्रस्ताव देकर लोगों को एक-दूसरे के ख़िलाफ़ खड़ा करना चाहते हैं।”

पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के प्रमुख सज्जाद लोन ने ट्वीट कर, कहा – “वे पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं। लोकतंत्र में विश्वास रखने वालों के लिए यह कितना बड़ा झटका है।”

परिसीमन आयोग का गठन 

अगस्त 2019 में संसद में जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक के पारित होने के बाद फरवरी 2020 में परिसीमन आयोग की स्थापना की गई थी। आयोग को केंद्रशासित प्रदेश में संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों को फिर से निर्धारित करने का काम सौंपा गया है।

शुरूआत में, इसे एक वर्ष के भीतर अपना काम पूरा करने को कहा गया था, लेकिन इस साल मार्च में इसे एक वर्ष का विस्तार दिया गया, क्योंकि कोविड-19 महामारी के कारण काम पूरा नहीं हो सका।

आयोग ने इस साल 23 जून को एक बैठक की थी, जिसमें जम्मू और कश्मीर के सभी 20 उपायुक्तों ने भाग लिया था। इस दौरान विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों को भौगोलिक रूप से अधिक सुगठित बनाने के लिए विचार मांगे गए थे। इसके ठीक अगले ही दिन यानि 24 जून को जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ एक बैठक के दौरान नरेंद्र मोदी ने कहा था कि परिसीमन की जारी कवायद जल्द पूरी होनी चाहिए ताकि एक निर्वाचित सरकार स्थापित करने के लिए चुनाव हो सके।

बता दें कि विधानसभा की 24 सीट खाली रहती हैं क्योंकि वे पाकिस्तान के क़ब्जे़ वाले कश्मीर (पीओके) के अंतर्गत आती हैं।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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