Thursday, July 7, 2022

प्रचार में बहा दिया गया ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का 80 फ़ीसदी पैसा

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महाराष्ट्र भाजपा लोकसभा सांसद हीना विजयकुमार गावित की अध्यक्षता वाली महिला सशक्तिकरण समिति ने कल गुरुवार को लोकसभा में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से जुड़ी पांचवीं रिपोर्ट पेश की है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरकार द्वारा 22 जनवरी, 2015 को लॉन्च की गई ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का प्रदर्शन राज्यों में अच्छा नहीं रहा है। महिला सशक्तिकरण समिति की पांचवीं रिपोर्ट में सरकार की तरफ से जारी किये धन का सही उपयोग ना होने को लेकर निराशा जाहिर की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना के लिए उपलब्ध कराए गए फंड के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से का इस्तेमाल सिर्फ़ इस योजना के प्रचार-प्रसार और विज्ञापनों के लिए किया गया है।

लोकसभा सांसद हीना विजयकुमार गावित की अध्यक्षता वाली समिति ने गुरुवार को लोकसभा में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के संदर्भ में शिक्षा के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण पर अपनी पांचवीं रिपोर्ट पेश की। समिति ने सदन में बताया कि वित्त वर्ष 2014-15 में अपनी स्थापना के बाद से 2019-20 तक, इस योजना के तहत कुल बजटीय आवंटन 848 करोड़ रुपये था। इसमें 2020-21 का कोविड-त्रस्त वित्तीय वर्ष शामिल नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान राज्यों को 622.48 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई थी।

पैनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि “राज्यों ने केवल 25.13 प्रतिशत फंड यानी 156.46 करोड़ रुपये ही इस योजना पर ख़र्च किए हैं, जो योजना का बेहतर प्रदर्शन नहीं है। समिति ने रिपोर्ट में आगे कहा कि 2016- 2019 के दौरान जारी किए गए कुल 446.72 करोड़ रुपये में से केवल मीडिया वकालत पर 78.91 प्रतिशत ख़र्च किया गया। समिति की रिपोर्ट में कहा गया है, “केवल 25.13% धन, यानी 156.46 करोड़ रुपये, राज्यों द्वारा खर्च किए गए हैं, जो इस योजना के अनुमानित लक्ष्य के अनुरूप प्रदर्शन नहीं है।” समिति की रिपोर्ट के अनुसार 2016- 2019 के दौरान जारी किए गए कुल 446.72 करोड़ रुपये में से, केवल मीडिया विज्ञापनों पर 78.91% खर्च किया गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि – “समिति बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ के संदेश को लोगों के बीच फैलाने के लिए मीडिया अभियान चलाने की ज़रूरत को समझती है, लेकिन योजना के उद्देश्यों को बैलेंस करना भी उतना ही ज़रूरी है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पैनल ने सिफारिश की है कि “सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी मामलों के लिए नियोजित व्यय आवंटन पर भी ध्यान देना चाहिए”।

बता दें कि 22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना शुरु की गई थी। यह योजना तीन मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित की जा रही है अर्थात महिला और बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय तथा मानव संसाधन मंत्रालय इस योजना के मुख्य घटकों में शामिल हैं।

इस योजना का उद्देश्य लड़कियों के साथ होने वाले सामाजिक भेदभाव को खत्म करना और उनके प्रति लोगों की नकारात्मक मानसिकता में बदलाव लाना है। इसके अलावा योजना का उद्देश्य लिंगानुपात को कम करना, महिला सश्क्तिकरण को बढ़ावा देना है।

योजना के प्रथम चरण में PC और PNDT Act को लागू करना, राष्ट्रव्यापी जागरूकता और प्रचार अभियान चलाना और चुने गए 100 जिलों (जहां शिशु लिंग अनुपात कम है) में विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित कार्य करना शामिल है। बुनियादी स्तर पर लोगों को प्रशिक्षण देकर, संवेदनशील और जागरूक बनाकर तथा सामुदायिक एकजुटता के माध्यम से उनकी सोच को बदलने पर ज़ोर दिया जा रहा है।

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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