सिद्धार्थनगर: धर्म परिवर्तन के लालच का आरोप, पिता के बयान से मामले में नया मोड़

लखनऊ। सिद्धार्थनगर के इटवा थाने में अल फारूक इण्टर कालेज के प्रबंधक शब्बीर अहमद पर धर्म परिवर्तन के लिए 20 लाख रुपये का लालच देने का आरोप लगा है। यह शिकायत अखण्ड प्रताप सिंह ने 22 जुलाई 2025 को दर्ज कराई, जिसमें घटना की तारीख 10 दिसंबर 2020 बताई गई है। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 506 और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 व 5(1) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

हालांकि, मामले में नया मोड़ तब आया जब अखण्ड के पिता, उमेश प्रताप सिंह, के 18 मई 2020 के बयान का खुलासा हुआ। उमेश ने क्षेत्राधिकारी, इटवा, श्रीयश त्रिपाठी को बताया कि उनका पुत्र अखण्ड बदचलन और अपराधी प्रवृत्ति का है। उन्होंने दावा किया कि अखण्ड ने दो साल पहले इस्लाम धर्म अपना लिया था, अपना नाम इमरान रख लिया, और घर में जबरन इस्लाम से संबंधित सामग्री लगा दी थी। उमेश ने यह भी कहा कि अखण्ड ने उन्हें धमकी दी और तीन बीघा जमीन बिकवाकर पैसा हड़प लिया। उन्होंने 15 मई 2020 को दैनिक जागरण में शपथ पत्र प्रकाशित कर अखण्ड को अपनी संपत्ति से बेदखल कर दिया था।

इस बयान से यह सवाल उठता है कि यदि अखण्ड ने सात महीने पहले ही धर्म परिवर्तन कर लिया था, तो शब्बीर अहमद पर लालच देने का आरोप कितना सही है। इसके अतिरिक्त, अखण्ड ने 2016 और 2024 में सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत अल फारूक कालेज से कई जानकारियां मांगी थीं, जो उन्हें शब्बीर अहमद द्वारा उपलब्ध कराई गई थीं।

सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) के राष्ट्रीय महासचिव संदीप पाण्डेय ने उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अखण्ड द्वारा शब्बीर को दबाव में लेने के प्रयास असफल होने पर यह आरोप लगाया गया हो सकता है, खासकर जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा के चर्चित प्रकरण का फायदा उठाकर। उन्होंने मांग की कि यदि शब्बीर निर्दोष पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी खारिज की जाए और उन्हें जेल से रिहा किया जाए।

पाण्डेय ने चेतावनी दी कि आपराधिक न्याय प्रक्रिया को राजनीतिक हितों का शिकार नहीं बनना चाहिए। इस मामले में सच्चाई का पता लगाने के लिए गहन और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।

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