Sunday, May 22, 2022

debt

‘आप’ के राज में भी किसान आत्महत्या क्यों कर रहे हैं?

पंजाब में आम आदमी पार्टी का राज आ जाने से जिन्हें यह भ्रम था कि चमत्कार हो जायेगा उनके दिल से जुड़ी उम्मीद की नाज़ुक रगें टूटने लगी हैं और क़र्ज़ में डूबे किसानों की आत्महत्याओं का दम भर...

वोडाफोन आईडिया में कर्ज़ के बदले सरकार ने ली 35.8 प्रतिशत हिस्सेदारी

सरकारी टेलीकॉम कंपनी को बर्बाद कर देने वाली केंद्र सरकार ने निजी टेलीकॉम कंपनी VI (वोडाफोन आईडिया) में 35.8 % हिस्सेदारी ली है। सरकारी राहत पैकेज के तहत कंपनी ने सरकार को कर्ज के बजाय इक्विटी देने का फैसला...

बेचने के बाद अब एयर इंडिया की देनदारियों के लिए सरकार ने संसद से मांगा 62,000 करोड़ रुपये

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष में नियोजित ₹3.73 लाख करोड़ से अधिक अतिरिक्त खर्च के हिस्से के रूप में, निजीकरण के बाद एयर इंडिया की अवशिष्ट संपत्ति और देनदारियों वाली कंपनी में 62,000 करोड़ रुपये से...

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया या ऑफ अडानी?

देखिए! क्या विडंबना है कि देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अडानी इंटरप्राइजेज को ऑस्ट्रेलिया की कार्मिकेल खान प्रोजेक्ट के लिए एक बिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर (करीब 5450 करोड़ रुपये) की रकम लोन देने जा रहा...

हम भूमिपुत्र स्वयं अपने इतिहास के कर्ता हैं

(प्रधानमंत्री मोदी के नाम एक भूमिपुत्र का खुला ख़त) लिखतुम भूमिपुत्र, पढ़तुम प्रधानमंत्री मोदी,नमस्कार, आदाब, सत् श्री अकाल थोड़े लिखे को तुम ज्यादा ही समझना। ‘आप’ के बजाय ‘तुम’ कहकर संबोधित इसलिए कर रहा हूं, क्योंकि दिल में रंजिश हो तो...

कॉरपोरेट का अरबों रुपये माफ और गरीब महिलाओं को पसंगा नहीं! ये कैसा इंसाफ: ऐपवा

इलाहाबाद में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। महिलाओं ने समूह द्वारा लिए गए कर्ज की वसूली बंद करने और माफ करने की मांग की। कोरांव फूलपुर शहर उत्तरी शहर दक्षिणी और...

असंगठित क्षेत्र और दिहाड़ी मज़दूरों की परवाह से ही पटरी पर लौटेगी अर्थव्यवस्था

भारत के 90 फ़ीसदी लोगों का गुज़र-बसर असंगठित क्षेत्र और दिहाड़ी मज़दूरी के ज़रिये ही होती है। अर्थव्यवस्था में इस तबके का वही मतलब है जो शरीर की कोशिकाओं का है। देश के 90 फ़ीसदी लोगों का भरण-पोषण यही...

ओला और बारिश से बर्बाद किसान सरकार की चिंता में नहीं

आजादी के तिहत्तर साल के बाद आज भी भारत का किसान भाग्य भरोसे है। हाड़ तोड़ मेहनत करने के बावजूद उसकी जिंदगी में अंधकार और अनिश्चितता है। जुताई, बुआई, मड़ाई और कटाई में ही उसकी सारी उमर बीत जाती है।...

तबाही के कगार पर पहुंच गयी हैं कभी फायदा देने वाली देश की नवरत्न कंपनियां

कोई माने या न माने पर यह सच है कि मोदी राज में सबसे ज्यादा गड्ढे में कोई गया है तो वह PSU यानी सार्वजनिक क्षेत्र की सरकारी कम्पनियां ही हैं। ये कंपनियां भीषण वित्तीय संकट की तरफ बढ़ती दिख रही हैं। आमदनी के...
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फिलिस्तीन की शीरीन की हत्या निशाने पर निर्भीक पत्रकारिता

11 मई को फिलिस्तीन के जेनिन शहर में इजरायली फौजों द्वारा की जा रही जबरिया बेदखली को कवर कर...
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