1 एवं 2 दिसम्बर 2021 को भोजन का अधिकार अभियान (झारखण्ड) द्वारा गढ़वा जिले के बड़गढ़ प्रखंड… Read More
Jharkhand
झारखण्ड राज्य अनुबंध कर्मचारी महासंघ की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसमें झारखण्ड की हेमंत सरकार के 2… Read More
यह बात किसी से छुपी नहीं है कि झारखंड के तमाम बंद पड़े कोल ब्लॉक में अवैध… Read More
27 नवंबर को संस्कृति संग्रहालय एवं आर्ट गैलरी, हजारीबाग में पद्मश्री बुलु इमाम के द्वारा बिरहोर-हिंदी-अंग्रेजी शब्दकोश… Read More
संविधान दिवस पर 26 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को खेद व्यक्त किया कि कुछ… Read More
तारीख 13 नवम्बर 2021 दिन शनिवार को मेरा दोस्त महेश फोन करता है और कहता है कि उसके भैया मनोज अपने गाँव के एक 17 साल के बच्चे विष्णु को खूंटी में अपने किराये के मकान में साथ रखकर अपने स्कूल में पढ़ाते थे, जो 11 तारीख से गायब है। मनोज पेशे से शिक्षक हैं और झारखंड मेंस्थित बंधगांव हाई स्कूल पढ़ाते हैं। मैं सुनकर कुछ हेल्पलाइन, कुछ लोगों का संपर्क भेजा और निश्चिंत हो गया। लेकिन अचानक 16 नवम्बर को पता चला कि मनोज जी और विष्णु के पिताजी कोलकाता रवाना हो चुके हैं विष्णु को ढूंढने के लिए। क्योंकि विष्णु ने 12 नवम्बर को किसी नम्बर से फोन किया था और कहा था कि “हमअपने दोस्त के साथ कोलकाता घूमने आ गये हैं …………..” और भी कुछ कहा होगा उसने लेकिन ये जानकारी मुझे नहीं है। 3 दिनों तक मनोज और विष्णु के पिताजी ने हावड़ा रेलवे स्टेशन, हावड़ा ब्रिज के इर्द गिर्द उसे ढूंढा। इस दौरान खूंटी थाने में गुमशुदगी का मामला भी दर्ज करा दिया गया था।विष्णु ने किसी अनजान व्यक्ति के फोन से कॉल किया था, फिर वो गायब हो गया। कोलकाता जाने के बाद मनोज ने उस अनजान व्यक्ति से मिलने की कोशिश की लेकिन वो व्यक्ति कहीं और जा चुका था । 3 दिन थक हार कर हर संभव ढूंढने की कोशिश की, हावड़ा के थाने में रिपोर्ट भी दर्ज किया उन लोगों ने लेकिन कुछ नहीं हुआ। तभी 16 नवम्बर को उन्हें बच्चा एक नंबर से कॉल करता है और कहता है कि “भैया दिल्ली फंसाकर ले आया हमको, एक फैक्ट्री है बहुत बड़ी, और जबर्दस्ती काम करवारहा है, काम नहीं करने से गाली दे रहा है…” मनोज बात करते हुए समझाया कि “तुम चुपचाप काम करो हम ढूंढ (ट्रेस करके) लेंगे, तुम रूम से कैसे निकले और कौन ले गया तुमको….” विष्णु ने उत्तर देते हुए कहा कि “अरे वही एक दोस्त बुलाया था, यही ये अविनाश, हम लोग के स्कूल का नहीं रोलाडिह का अविनाश, खाना ही बनाये थे, खाकर टाटा पहुंच गए फिर कोलकाता और फिर दिल्ली, एक ठो आदमी बोला हमको कि हम टाटा जायेंगे, फिर हम उसके साथ आये और हमकोयहां फंसा दिया.. अविनाश जो है वो कोलकाता से भाग गया।” मनोज ने समझाते हुए कहा कि, “सुरक्षित रहना, खाना खा के स्वस्थ रहना, हम ढूंढ के निकाल लेंगे ” और मनोज ने कॉल और फोन नंबर की जानकारी खूंटी पुलिस को दे दी, पुलिस ने ट्रेस करके बताया कि कॉल दिल्ली के द्वारका, सेक्टर – 11 के किसी इलाके से आया है। तुरंत ये जानकारी मुझे दी गयी। मैं टीचर ट्रेनिंग कोर्स बीएड दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया से कर रहा हूँ, टीचिंग प्रैक्टिस क्लास की तैयारी में लगा हुआ था। जैसे ही मुझे ये जानकारी मिली मैंने तुरंत चाइल्ड लाइन और दिल्ली कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ चाइल्ड राइट्स पर कॉल करके मामला दर्ज कराया। साथ ही 112 पर कॉल करके मामले को बताया, और तुरंत मुझे पीसीआर वालों का फोन आया कि आप कहाँ हैं, कहाँ चलना है? मैंने समझाया कि मैं सीधा सेक्टर 11 के नजदीकी थाने पर आके मिलता हूँ और मामला बताता हूँ। तभी एएसआई कीर्ति का कॉल आया और उन्होंने समझाया कि आप खुद उसलोकेशन को ढूंढने का प्रयास करें, वगैरह – वगैरह… मैंने सीधा जवाब दिया कि मैं आकर मिलता हूँ । मैं DCP ऑफिस पहुंचा जो सेक्टर 11 मेट्रो स्टेशन से 1.5 किलोमीटर दूर स्थित है, वहां पहुंचने पर पता चला कि जो भी होगा वह द्वारका साउथ थाने से होगा, वैसे भी ASI कीर्ति से बात हुई थी तो मैं पैदल चल दिया, मैं 1 बजे द्वारका साउथ थाने पहुंचा, तभी पता चला कि ASI कीर्ति 4 बजे के करीबमिलेंगे । मैं बाहर वेट कर रहा था तभी मनोज का कॉल आया और उन्होंने कहा कि “विष्णु के मैनेजर का कॉल आया है और वो कह रहा है कि बच्चा सेफ है, 17 साल के बच्चे से क्या काम करवाएं, आप कोई गार्जियन आकर ले जाइये”। इससे पहले जिससे सुबह कॉल आया था वो नम्बर स्विच ऑफ आनेलगा था । लेकिन 4 बजे के करीब यह कॉल आई तो उम्मीद की किरण नजर आई क्योंकि सुबह वाले नम्बर को कई लोगों ने प्रयास किया था।लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला था। मैंने उसके सुपरवाइजर से बात की और मिलने का प्रस्ताव रखा, उसने मुझे बुलाया और लोकेशन बताया कि “द्वारका, सेक्टर-11, अक्षरधाम अपार्टमेंट के बगल में एक पार्क की दीवार बन रही है वहीं पर आ जाइये”। मैं पहले से ही डरा हुआ था क्योंकि बच्चे ने बताया था कि उसे जबर्दस्ती उठा के लाया गया है और काम करवाया जा रहा है। मैंने सुपरवाइजर को कहा कि “ऐसा करिए कि बच्चे को किसी पब्लिक प्लेस जैसे मेट्रो स्टेशन के पास या कहीं और ले आइये”, तभी उसने कहा कि मैं बाहर नहीं जा सकता, साइट पर हमारा काम चल रहा है। तभी मैंने ये निर्णय लिया कि चलो चला जाए और मिला जाए, जो होगा देखा जाएगा। मैंने सारी जानकारी अपने दोस्त महेश को दे रखा था, जैसे – Whatsapp… Read More
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‘नोआ हाके असुर अखड़ा रीडियो, एनेगाबु डेगाबु सिरिंगेयाबु दाहां-दाहां तुर्रर….धानतींग नातांग तुरू…।’ लातेहार व गुमला जिले के… Read More