Monday, December 5, 2022

Majaz Lakhnavi

जन्मदिन पर विशेषः मजाज़ की शायरी में रबाब भी है और इंक़लाब भी

एक कैफ़ियत होती है प्यार। आगे बढ़कर मुहब्बत बनती है। ला-हद होकर इश्क़ हो जाती है। फिर जुनून और बेहद हो जाए तो दीवानगी कहलाती है। इसी दीवानगी को शायरी का लिबास पहना कर तरन्नुम से (गाकर) पढ़ा जाए...
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‘हिस्टीरिया’: जीवन से बतियाती कहानियां!

बचपन में मैंने कुएं में गिरी बाल्टियों को 'झग्गड़' से निकालते देखा है। इसे कुछ कुशल लोग ही निकाल...
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