Wednesday, December 7, 2022

nation

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद नहीं, दंगाई राष्ट्रवाद

ये खुद भी घिनौने हैं। और पूरे देश और समाज को अपने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के उसी घिनौने परनाले में ले जाकर गिरा देना चाहते हैं। इन्हें न संस्कृति की समझ है न राष्ट्र की। और धर्म के नाम पर...

हिन्दू राष्ट्र का संविधान; निकलना भेड़ियों का अपनी मांद से 

इधर दिल्ली में लाल किले की प्राचीर से मोदी अपने भाषण में डॉ अम्बेडकर का नाम ले रहे थे, महिलाओं को अवसर देने के लिए कलेजा चीर कर दिखा रहे थे, आने वाले 25 वर्ष को भारत के लिए...

लाल किले से 83 मिनट के भाषण का सार “खाया पीया कुछ नहीं, गिलास फोड़ा आठ आने”

सरोज जी- जन कवि मुकुट बिहारी सरोज- की एक कविता की पंक्ति है; "शेष जिसमें कुछ नहीं ऐसी इबारत, ग्रन्थ के आकार में आने लगी है।” आज यदि वे इसे फिर से लिखते तो ग्रन्थ की जगह 83 मिनट के उस...

कश्मीर फाइल्सः दो राष्ट्र के सिद्धांत और नाजीवाद का खतरनाक मिश्रण

एक बड़े शहर के मल्टीप्लेक्स में 'कश्मीर फाइल्स' देखने गया तो पहला अहसास यही हुआ कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा समाचार माध्यमों को निगल जाने के बाद अब भाजपा तथा संघ परिवार के हाथ सिनेमा जैसा शक्तिशाली माध्यम...

अकादमिक संस्थान, जिसमें बसती है मनुस्मृति की जेहनियत!

भारत विविधता व विषमता के लिहाज़ से दुनिया का सबसे अनूठा देश है। भारत का संविधान लागू होने के बाद इसे एक आधुनिक राष्ट्र बनना था। राष्ट्र निर्माण की इस परियोजना की अगुवाई प्राथमिकता के लिहाज़ से अकादमिक संस्थानों...

आरजेडी सांसद मनोज झा का नेहरू जी को पत्र

मैं इन बातों को लिखने की सोच रहा हूं क्योंकि हर दिन आपके और आपके प्रिय विचारों के खिलाफ मिथ्या अभियान चलाए जाते हुए देखता हूं। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि जो कोई भी भारत को समझना...

माफीनामों के वीर हैं सावरकर

सावरकर सन् 1911 से लेकर सन् 1923 तक अंग्रेज़ों से माफी मांगते रहे, उन्होंने छः माफीनामे लिखे और सन् 1923 के बाद वह लगातार ही इस देश की जनता को बांटने की बात करते रहे। नफरत और हिंसा की...

द्विराष्ट्र के सिद्धांत के जनक कौन- जिन्ना या सावरकर?

पिछले तीन चार वर्ष से वी डी सावरकर को प्रखर राष्ट्रवादी सिद्ध करने का एक अघोषित अभियान कतिपय इतिहासकारों द्वारा अकादमिक स्तर पर अघोषित रूप से चलाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी सावरकर को महिमामण्डित करने वाली...

पेगासस गेट: घटती आजादी, सिमटता लोकतंत्र

पेगासस जासूसी मामला अप्रत्याशित नहीं है। सरकारों का (और विशेष रूप से हमारी वर्तमान सरकार का) यह स्वभाव रहा है कि वे अपनी रक्षा को देश की सुरक्षा के पर्यायवाची के रूप में प्रस्तुत करती हैं। स्वयं पर आए...

हिंदुत्व के मठ में राजा सुहेलदेव का पाठ

(यूपी में बीजेपी केवल सत्ता नहीं चला रही है। बल्कि वह धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर भी सक्रिय है। बात यहीं तक सीमित रहती तो भी कोई बात नहीं थी बल्कि अपने आधार को बढ़ाने तथा भविष्य में...
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आरबीआई ने नोटबंदी पर केंद्र सरकार के फैसले के आगे घुटने टेक दिए: पी चिंदबरम

सुप्रीम कोर्ट में नोटबंदी पर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए  सुप्रीम के वरिष्ठ...
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