Wednesday, December 7, 2022

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मोदी सरकार देश के सार्वजनिक क्षेत्रों को बेशर्मी से बेच रही है: विनोद सिंह

झारखंड के धनबाद में 11 अगस्त को मासस एवं भाकपा माले के संयुक्त तत्वावधन में रणधीर वर्मा चौक पर एक दिवसीय महाधरना आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं पर बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई,...

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में 172 स्वतंत्र निदेशकों में 86 भाजपाई

सेंट्रल पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग के 172 स्वतंत्र निदेशकों में 86 भाजपाई हैं। ये खुलासा हुआ है अंग्रेजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस द्वारा PSUs के मामले में एक आरटीआई के जरिये जुटाये गये डेटा से।  सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (PSUs) मामले में इंडियन एक्सप्रेस...

बिहार में कारपोरेट बनाम जनता का नया दौर

पिछले 23 मार्च को बिहार विधान सभा के भीतर पुलिस की ओर से की गई विधायकों की पिटाई को विपक्ष लगातार उठा रहा है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने स्पीकर को पत्र लिख कर दोषी अधिकारियों को बर्खास्त...

स्माल सेविंग्स स्कीमों पर यू-टर्न: पब्लिक के पैसे से कब तक छिपेगी बदहाली?

जुमले उछाल कर तालियां बटोरने और जमीन पर काम करने में बड़ा फर्क है। खुद को अर्थव्यवस्था का फन्ने खां समझने और जीडीपी को ढंग से ड्राइव करने में काफी फासला है। वेल्थ क्रिएटरों को सिर-आंखों पर बिठाने की...

हर लिहाज से गलत है सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने का सरकार का फैसला

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कई परिसंपत्तियों का निजीकरण करने का, सिवा व्यय के लिए स्रोत जुटाने के, और कोई कारण नहीं बताया है। हमें ऐसी वित्तीय रणनीति को समझना होगा। कोई भी अपनी खपत में कमी करके सार्वजनिक क्षेत्र...

बजट: राष्ट्रीय संपदा का कॉरपोरेट को हस्तानांतरण का रोडमैप

2021-22 का बजट सामान्य रूटीन का बजट नहीं हैं, यह खुलेआम इस बात की घोषणा करता है कि देश की अर्थव्यवस्था का विकास एवं संचालन निजी क्षेत्र द्वारा ही किया जा सकता है और किया जाना चाहिए। यह एक...

चंद लड़ाइयों और आंदोलन से नहीं रोका जा सकता संघ का दानवी अभियान

आप जिससे लड़ रहे हैं, उसे इस बात से बहुत कम फर्क पड़ता है कि आपकी बात कितनी सही है, आप कितना उनका पर्दाफाश कर रहे हैं। उसके पास अपना एजेंडा है। उसे भारतीय जनमानस की मानसिकता पता है,...

बजट है या देश बेचने का दस्तावेज?

कहने को तो हमारा सालाना बजट आम बजट कहलाता है, पर यह धीरे-धीरे खास बजट बन गया है। आम लोगों की संसद में, आम लोगों के नाम पर, आम चुनावों द्वारा चुनी गयी सरकार द्वारा पेश किया जाने वाला...

सरकारी कंपनियों की बिक्रीः कारपोरेट गणतंत्र बनाम लोकतंत्र

दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों के चारों ओर सीमेंट के कांटेदार अवरोध खड़े कर दिए गए हैं, कांटे के बाड़ लगा दिए गए हैं, इंटरनेट बंद कर दिया गया है, और इन्हें पुलिस छावनी में तब्दील...

बजट का थीम है बेचो भारत!

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2021-2022 के लिए देश का बजट पेश किया। इस बजट में टैक्स स्लैब में मध्य वर्ग को कोई राहत नहीं देने से लेकर गरीब वर्ग तक के हाथ में पैसा पहुंचाने की किसी योजना...
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क्यों ज़रूरी है शाहीन बाग़ पर लिखी इस किताब को पढ़ना?

पत्रकार व लेखक भाषा सिंह की किताब ‘शाहीन बाग़: लोकतंत्र की नई करवट’, को पढ़ते हुए मेरे ज़हन में...
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