Friday, October 7, 2022

एयरसेल-मैक्सिस डील में ब्रिटेन और सिंगापुर ने अब तक नहीं दिया जवाब

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एयरसेल-मैक्सिस डील मामले में सीबीआई और ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति चिदंबरम को आरोपी बना रखा है, पर अभी तक उनके खिलाफ सीबीआई और ईडी को पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं।

यह खुलासा  दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में उस समय हुआ जब सीबीआई और ईडी ने कोर्ट को बताया कि इस मामले की जांच के लिए ब्रिटेन और सिंगापुर में सक्षम प्राधिकारों को भेजा गया आग्रह पत्र अभी लंबित है।

कोर्ट ने एयरसेल-मैक्सिस डील मामले में मंगलवार को सीबीआई और ईडी को जांच पूरी करने के लिए तीन नवंबर तक का समय दे दिया। स्पेशल जज अजय कुहार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के बाद सीबीआई और ईडी को ये आदेश दिया। इस मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति चिदंबरम आरोपी हैं।

सीबीआई और ईडी दोनों ने इस मामले पर जांच के लिए कोर्ट से और समय की मांग की। उसके बाद कोर्ट ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति के खिलाफ एयरसेल-मैक्सिस मामले में जारी अपनी जांच के सिलसिले में ब्रिटेन और सिंगापुर को भेजे अनुरोध पत्र पर जवाबी रिपोर्ट हासिल करने के लिए मंगलवार को तीन महीने का वक्त दिया है।

विशेष न्यायाधीश अजय कुमार कुहाड़ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई सुनवाई में दोनों एजेंसियों द्वारा किए गए अनुरोध को मंजूरी दे दी। पिछली 20 फरवरी को भी कोर्ट ने सीबीआई और ईडी को जांच के लिए चार मई तक का समय दिया था, लेकिन कोरोना संकट की वजह से इस मामले पर कोई सुनवाई नहीं हो सकी। सीबीआई और ईडी ने पिछली 14 फरवरी को इस मामले की जांच से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की थी।

गौरतलब है कि कि पांच सितंबर 2019 को को इस मामले की सुनवाई करने वाले तत्कालीन जज ओपी सैनी ने एयरसेल मैक्सिस डील मामले में पी चिदंबरम और कार्ति चिदंबरम को अग्रिम जमानत दे दी थी। उसके बाद छह सितंबर 2019 को जज ओपी सैनी ने मामले की सुनवाई अनिश्चितकाल के लिए टाल दी थी।

दरअसल छह सितंबर 2019 को ये मामला चार्जशीट पर दलीलें सुनने के लिए लिस्ट किया गया था, लेकिन ईडी और सीबीआई दोनों ने सुनवाई स्थगित कर अक्टूबर 2019 के पहले सप्ताह में सुनवाई करने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान जब दोनों जांच एजेंसियों ने सुनवाई स्थगित करने की मांग की तब स्पेशल जज ओपी सैनी नाराज हो गए और कहा कि आप सुनवाई हमेशा टालने की ही मांग करते हैं। जब आपकी जांच पूरी हो जाए तब कोर्ट से संपर्क कीजिएगा। जब आपको दूसरे देशों से आग्रह पत्र का जवाब मिल जाए तब कोर्ट को सूचित कीजिएगा। बता दें कि जज ओपी सैनी ने टू-जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में ए राजा और कनिमोझी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।

विशेष न्यायाधीश अजय कुमार कुहाड़ ने कहा कि आरोप पत्र दाखिल किए जाने के बाद पर्याप्त समय बीत चुका है, लेकिन उक्त अनुरोध के मद्देजर मामले पर सुनवाई को स्थगित किया जाता है। न्यायाधीश ने कहा कि इसे तीन नवंबर 2020 के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

दरअसल आग्रह पत्र एक तरह के न्यायिक अनुरोध होते हैं, जिन्हें जांच एजेंसी के अनुरोध पर अदालतें तब जारी करती हैं जब वह अन्य देश से कोई सूचना/जानकारी चाहती हैं। सीबीआई यह जांच कर रही है कि कार्ति चिदबंरम ने 2006 में एयरसेल-मैक्सिस करार के लिए विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड (एफआईपीबी) से किस तरह से मंजूरी प्राप्त की। उस वक्त उनके पिता केंद्रीय वित्त मंत्री थे।

ईडी के विशेष सरकारी वकील ने अदालत से कहा कि ईडी इस अपराध में धन शोधन के पहलू की जांच कर रही है। सीबीआई और ईडी का आरोप है कि यूपीए सरकार के वक्त वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कुछ व्यक्तियों को लाभ पहुंचाते हुए इस सौदे को मंजूरी दी और उसके बदले में घूस ली।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

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