Tuesday, January 31, 2023

किसानों के साथ एक और धोखा है खरीफ फसलों के न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य की घोषणा

Follow us:

ज़रूर पढ़े

सरकार ने 14 खरीफ फसलों (तिलहन, दलहन, गल्ला और कपास) के लिए इस साल के समर्थन मूल्य की घोषणा कर दी है। सरकारी दावे की कहें तो 2022-23 के लिए खरीफ फसलों की एमएसपी में बढ़ोत्तरी, अखिल भारतीय औसत उत्पादन लागत के ऊपर कम से कम 50 प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करती है। सरकारी दावा है कि बाजरा, तूर, उड़द, सूरजमुखी बीज, सोयाबीन एवं मूंगफली की एमएसपी में  लाभ की मात्रा उत्पादन लागत से 50 प्रतिशत से भी अधिक है। वो क्रमशः 85%, 60%, 59%, 56%, 53% एवं 51% है। सरकार ने यह भी दावा किया है कि इस तखमीने में “सभी भुगतान की गई लागतें शामिल हैं जैसे मानव श्रम, बैल श्रम/मशीन श्रम, पट्टे की भूमि के लिए दिया गया किराया, बीज, उर्वरक, खाद, सिंचाई प्रभार जैसे भौतिक साधनों  के उपयोग पर व्यय, उपकरणों और फार्म भवनों का मूल्यह्रास, कार्यशील पूंजी पर ब्याज, पंप सेटों आदि के इस्तेमाल के लिए डीजल/बिजली, विविध व्यय और पारिवारिक श्रम का आरोपित मूल्य।”

यहाँ यह स्पष्ट होना चाहिए कि सरकारी तखमीने में किसान की अपनी खुद की ज़मीन और पूँजी पर अनुमानित लागत (जिनको शामिल करने का सुझाव स्वामीनाथन आयोग ने दिया था और किसानों की मांग भी रही है) शामिल नहीं है।  

इतने सारे दावों के बावजूद इस साल खरीफ फसलों की कीमतें पिछले साल के मुकाबले 4.44 फीसदी से 8.86 फीसदी के बीच हुई हैं। सोयाबीन में सबसे ज्यादा 8.86 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। और बाजरे में सबसे कम 4.44 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक धान के एमएसपी में 5.15 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई है।

यह हिसाब और प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) द्वारा घोषित कीमतें सच के कितने करीब हैं यह देखने पर पता चलेगा की यह एक झूठ का पुलिंदा भर है।

आज खुदरा कीमतें और थोक कीमतें पिछले कई सालों के मुकाबले काफी ऊंची हैं। खुदरा कीमतें अप्रैल महीने में पिछले साल इसी समय  के मुकाबले 7.79 फीसदी के हिसाब से बढ़ी हैं। और यह दर पिछले 7 साल में सबसे ऊंची है। थोक महंगाई तो अप्रैल में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार खुदरा महंगाई के मुकाबले और भी तेज़ी से बढ़ी है। वो पिछले साल के मुकाबले 15 फीसदी ऊपर है।और पिछले 17 साल में सबसे ऊंची दर पर है। केंद्रीय रिज़र्व  बैंक ने भी इस साल महँगाई 7.6 फीसदी होने का अनुमान रखा है। 

इसके अलावा सिटी बैंक के अर्थशास्त्री समीरण चक्रवर्ती का कहना है कि उन्होंने  कृषि उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न सामानों के लिए एक लागत सूचकांक का निर्माण किया है, जिसमें उर्वरक, कीटनाशक, मशीनरी, ट्रैक्टर, बिजली और डीजल जैसे आइटम शामिल हैं। इस सूचकांक के अनुसार, कृषि उत्पादन की लागत पिछले छह महीनों में करीब 24 फीसदी और पिछले 12 महीनों में 20 फीसदी बढ़ी है। कृषि लागत में लगने वाली मेहनत का भी मूल्य होता है। मेहनत की लागत का हिस्सा सामान की लागत के बराबर ही होता है। पिछले साल कृषि में मजदूरी में बहुत कम बढ़त हुई है। अर्थात बहुत कम ग्रामीण मजदूरी में बढ़ोत्तरी के बावजूद खेती के उत्पादन की लागत में 10% से अधिक औसत बढ़त का अनुमान है। 

ऐसे में बढ़ी हुई लागत की भरपाई के लिए, खरीफ की फसलों की एमएसपी को कम से कम 10 प्रतिशत तो बढ़ाना ही चाहिए था। सरकार द्वारा केवल 4.44 फीसदी से 8.86 फीसदी के बीच खरीफ की कीमतें बढ़ाकर किसानों, यानि देश की आधी आबादी के साथ धोखा किया है। सरकारी दिवालियापन और विदेश परस्त नीति की पोल खोलते हुए किसान नेता अशोक धावले ने सही ही कहा है “यह भी उल्लेखनीय है कि ऐसा उस दौर में किया गया है जब खाद्य वस्तुओं की वैश्विक कीमतें बहुत अधिक हो गई हैं। इसका मतलब यह है कि खाद्य तेल और दालों जैसी वस्तुओं के लिए, जिसके लिए भारत आयात पर निर्भर है, अपने देश के किसानों को दिए जाने वाले भाव के प्रस्तावों के मुकाबले विकसित देशों के किसानों को आयात के माध्यम से बहुत अधिक कीमत का भुगतान किया जायेगा।इस कदम के द्वारा हमारे अपने किसानों को लाभकारी मूल्य देने की बजाय, ताकि भारत की आयात निर्भरता को कम किया जा सके, सरकार उनके साथ भेदभाव कर रही है।”

(प्रो. रवींदर गोयल दिल्ली विश्वविद्यालय के रिटायर्ड अध्यापक हैं।)

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

पुण्यतिथि पर विशेष: हत्यारों को आज भी सता रहा है बापू का भूत

समय के साथ विराट होता जा रहा है दुबले-पतले मानव का व्यक्तित्व। नश्वर शरीर से मुक्त गांधी भी हिंदुत्व...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x