Thursday, October 6, 2022

सर्व धर्म समभाव की भावना भी अब नफ़रत के निशाने पर

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मुग़ल-ए-आजम अक़बर और राष्ट्रपिता गांधी के ‘सर्व धर्म समभाव’ की विचारधारा को मजबूत करना भी अब कम ख़तरनाक नहीं है, विशेषकर आज के समय में जबकि हिंदुत्व की आक्रामक विचारधारा और हिंसा को सत्ता का खुला समर्थन व प्रश्रय मिला हुआ है। ताजा मामला रामराज्य वाले उत्तर प्रदेश की उद्योगनगरी कानपुर का है। जहां यूपी पुलिस ने थाना सीसामऊ क्षेत्र, पी रोड स्थित फ्लोरेट्स इंटरनेशनल स्कूल (Florets International School) के ख़िलाफ़ हिंदू बच्चों को कलमा पढ़ाने के आरोप में एफआईआर दर्ज़ किया है। मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने स्कूल के सामने हंगामा किया है, और मांग की कि जब तक प्रबंधन स्कूल पर गंगाजल का छिड़काव करके हिंदू माता पिता से माफ़ी नहीं मांग लेता, स्कूल नहीं चलने देंगे।

वहीं इस पूरे मामले में फ्लोरेट्स इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल अंकिता यादव का कहना है कि हम स्कूल में सुबह की सभा में सभी धर्मों की प्रार्थना कराते हैं चाहे वह हिंदू धर्म, इस्लाम, सिख और ईसाई धर्म हो। हम छात्रों को सिखाना चाहते हैं कि सभी धर्म समान हैं। “सर्व धर्म सम्मान” की विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए सुबह की सभा के दौरान स्कूल में चारों धर्मों की प्रार्थना की गई।

प्रिंसिपल का दावा है कि स्कूल के छात्र पिछले 12-13 वर्षों से चार धर्मों- हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई – की प्रार्थना करते हैं। कभी किसी ने आपत्ति नहीं की। चार दिन पहले एक बच्चे के माता-पिता की ओर से इस बारे में आपत्ति जताई गई थी। चूंकि माता-पिता ने इस्लामिक प्रार्थना पर आपत्ति जताई है, हमने इसे रोक दिया है। हमने शनिवार से ही सभी धार्मिक प्रार्थनाएं बंद कर दी है। और एसेम्बली में राष्ट्रगान करवाना शुरू किया है।”

वहीं पूरे मामले में विवाद की शुरुआत करने और पुलिस शिक़ायत दर्ज़ करवाने वाले पिता ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया है कि उसकी पत्नी ने उसे बताया कि बच्चा धाराप्रवाह इस्लामी नमाज पढ़ रहा है। पूछताछ करने पर बच्चे ने बताया कि उसने इसे स्कूल में सीखा है। इसके बाद बच्चे का पिता स्कूल गया और उसने बच्चों को सुबह इस्लामी प्रार्थना कलमा कराने से स्कूल को मना किया लेकिन एडमिन ने इसे रोकने से मना कर दिया।

इसके बाद पिता ने घर लौटकर व्हाट्सएप ग्रुप बनाया और बीजेपी, बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद के लोगों के साथ-साथ तमाम लोगों को इस बारे में प्रतिक्रिया के लिये उकसाया। माता-पिता का कहना है कि उनकी चिंता यह है कि उनके बेटे को यह क्यों पढ़ना चाहिए? क्या होगा यदि वह कुछ दिनों के बाद अपने ही धर्म को अस्वीकार कर देता है?

मामले में कानपुर के एसीपी निशांक शर्मा ने मीडिया को दिये बयान में कहा है कि हमारे संज्ञान में मामला आया कि एक निजी स्कूल में बच्चों को इस्लामिक पंक्तियां गाने के लिये बाध्य किया गया है। इस बाबत हमने स्कूल एडमिशन से बात किया तो उन्होंने बताया कि स्कूल में सारे धर्मों की प्रार्थनायें करवायी जाती हैं। एसीपी ने आगे बताया कि स्कूल प्रशासन ने आपत्ति के बाद अन्य सभी धार्मिक प्रार्थनाओं को रोक दिया है और फैसला किया है कि एसेंबली के दौरान सिर्फ़ राष्ट्रगान ही गाया जाएगा। एसीपी ने आगे बताया है कि पुलिस की जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम द्वारा मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

इस पूरे प्रकरण पर आम जनों की क्या राय है। शिक्षा क्षेत्र के लिये डिजिटल एप बनाने वाली एक कंपनी में कार्यरत आनंद मिश्रा कहते हैं कि यदि स्कूल असेंबली में धर्म विशेष की प्रार्थना बच्चों से करवायी जाती तो ग़लत होता। यदि वहां चारों धर्मों की प्रार्थना हो रही थी तो ये तो बहुत अच्छी बात है। कम से कम इसी के बहाने बच्चे अन्य धर्मों के बारे में, उनकी संस्कृति के बारे में थोड़ा बहुत तो जान लेते हैं। दूसरी भाषाओं के कुछ शब्द सीख लेते हैं। इसका विरोध करना निहायत ही बेवकूफ़ी की बात है।

इलाहाबाद के एक निजी स्कूल में शिक्षक प्रीति पूरे मामले में कहती हैं सत्ता ने नागरिकों की सोच को सांप्रदायिक संकीर्णता में इस क़दर जकड़ दिया है कि वो अन्य धर्मों को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं। माता पिता ने सांप्रदायिक संगठनों के लोगों का सहारा लेकर स्कूल के ख़िलाफ़ जो बवाल मचाया है उसके नकारात्मक प्रभावों से वो बच्चा कभी उबर नहीं सकेगा।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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