Sunday, September 25, 2022

सरदार पटेल क्रिकेट स्टेडियम को मोदी के नाम किए जाने के खिलाफ आंदोलन का ऐलान

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अहमदाबाद। इस वर्ष के अंत में गुजरात विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य में नरेंद्र मोदी के बाद भूपेन्द्र पटेल तीसरे मुख्यमंत्री हैं। रिकॉर्ड पर भले ही भूपेन्द्र पटेल मुख्यमंत्री हैं। परन्तु गुजरात बीजेपी में मोदी और शाह के बाद सी.आर. पाटिल बड़े फैसले लेते हैं। माना जाता है कि सरकार में मुख्यमंत्री एक रबर स्टैंप हैं। सरकार में बड़े फैसले नौकरशाह कैलाशनाथन और बीजेपी के प्रदेश प्रमुख पाटिल लेते हैं। बीजेपी के पास मात्र नरेंद्र मोदी का चेहरा है।

कैलाश नाथन और पाटिल दोनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद हैं। गुजरात में भूपेन्द्र पटेल के मुख्यमंत्री और सी.आर. पाटिल के प्रदेश प्रमुख बनने के बाद अमित शाह की राजनैतिक हैसियत कम हुई है। 2014 के बाद से केंद्र ही नहीं राज्यों के चुनाव भी भाजपा नरेंद्र मोदी के चेहरे पर लड़ती है।

गुजरात में ‘’राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच’’ और ‘’सरदार सम्मान संकल्प आन्दोलन समिति’’ द्वारा सीधे प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी को घेरने का चक्रव्यूह बनाया जा रहा है। 2016 में गुजरात के ऊना में मरी गाय की चमड़ी निकालने के गुनाह में चार दलितों की पिटाई के बाद जिग्नेश मेवाणी के नेतृत्व में ऊना अत्याचार लड़्त समिति बनाई गई थी। बाद में इसी समिति का नाम बदलकर राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच कर दिया गया। गुजरात स्थापना दिवस (1 मई 2022) के दिन सरदार सम्मान संकल्प आन्दोलन समिति का गठन हुआ है। इस संगठन का गठन पाटीदार अनामत आन्दोलन समिति के संयोजक अतुल पटेल, मिथिलेश अमिन, वीरेंदर सिंह चावड़ा इत्यादि ने किया है।

संगठन का उद्देश्य

आपको बता दें कि अहमदाबाद के मोटेरा में स्थित स्टेडियम का नाम पहले सरदार वल्लभ भाई पटेल क्रिकेट स्टेडियम था। 2015 में 800 करोड़ की लागत से स्टेडियम का रेनोवेशन किया गया। रेनोवेशन के बाद 24 फ़रवरी, 2020 को स्टेडियम का नाम सरदार पटेल मोटेरा क्रिकेट स्टेडियम से नरेन्द्र मोदी स्टेडियम कर दिया गया। सरदार पटेल देश के पहले गृहमंत्री रहे हैं और गुजरात के बारदोली के रहने वाले थे। सरदार पटेल पाटीदार समुदाय से होने कारण, समुदाय की भावनाएं सरदार के साथ जुड़ी हुई हैं।

अतुल पटेल कहते हैं, “1928 में जब अंग्रेजों द्वारा किसानों पर 30% कर का अधिक बोझ लाद दिया गया था। तो वल्लभ भाई पटेल ने बारदोली सत्याग्रह किया था। जहाँ उन्हें सरदार का उपनाम दिया गया था। मोटेरा स्टेडियम जो सरदार के नाम से जाना जाता था। प्रशासन ने सरदार के नाम की तख्ती हटा कर नरेंद्र मोदी की तख्ती लगा दी है। कर्नल गद्दाफी, मुसोलनी, सद्दाम हुसैन जैसे तानाशाह जीते जी अपने नामों से स्टेडियम, सड़कें, भवन इत्यादि बनवाते थे। उसी प्रकार नरेंद्र मोदी ने भी अपने जीते जी स्टेडियम का नाम सरदार पटेल स्टेडियम से नरेंद्र मोदी स्टेडियम करवा लिया है”।

उन्होंने आगे कहा कि “यह सरदार पटेल का अपमान है। हमने सरकार को 12 मई तक का समय दिया था। यदि 12 मई से पहले स्टेडियम का नाम नरेंद्र मोदी से सरदार वल्लभ भाई पटेल स्टेडियम नहीं रखा गया तो हम बारदोली से मोटेरा तक की सम्मान से अपमान तक की यात्रा करेंगे। सरकार ने पाटीदार समाज की भावनाओं सम्मान नहीं किया। 6 जून को अहमदाबाद स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय स्मृति भवन, शाही बाग़ में पूर्व केन्द्रीय मंत्री दिनशा पटेल की अध्यक्षता में एक सम्मलेन रखा गया है। जिसमें पटेल समाज के साथ अन्य समाज के लोग जुड़ेंगे। उसके बाद 12 जून को बारदोली से मोटेरा तक की यात्रा का आयोजन है। यात्रा के माध्यम से जनता को बताएँगे कि कैसे सरदार पटेल स्टेडियम का नाम बदल कर नरेंद्र मोदी रख दिया गया है। कोई अपने जीवित रहते हुए अपने ही नाम से स्टेडियम का नाम रख सकता है।”

बारदोली में सरदार पटेल को सरदार की उपाधि से सम्मानित किया गया था। जबकि मोटेरा में स्टेडियम का नाम बदलकर सरदार पटेल को अपमानित किया गया है। इसीलिए इस यात्रा का नाम सम्मान से अपमान तक की यात्रा रखा गया है।

यह बात सही है। 2015 से 2017 के बीच राज्य में कई आन्दोलन हुए थे। जिसने भाजपा की चूलें हिला दी थीं। इन आंदोलनों में सबसे प्रभावशाली आन्दोलन पाटीदार आन्दोलन को माना गया। लेकिन चुनाव आते-आते आन्दोलन बिखर गया। कुछ आन्दोलनकारी कांग्रेस में तो कुछ बीजेपी में चले गए। पाटीदार आन्दोलन समिति का एक धड़ा अब सीधे नरेंद्र मोदी को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। नरेंद्र मोदी को आज चुनौती देना इतना आसान नहीं है लेकिन गुजरात में बीजेपी तभी तक है जब तक पाटीदार बीजेपी के साथ हैं।

क्योंकि गुजरात की अर्थव्यवस्था को पटेल ही कंट्रोल करते हैं। राज्य में पटेलों की जनसंख्या 14% है। 2017 में पाटीदारों का एक हिस्सा बीजेपी से हटकर कांग्रेस के साथ खड़ा हो गया था। चुनाव से पहले कोई बड़ा आन्दोलन खड़ा हुआ तो बीजेपी को बड़ा नुकसान हो सकता है। संभवतः पाटीदारों के सबसे बड़े सामाजिक नेता नरेश पटेल इसी महीने कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो बीजेपी का समीकरण बिगड़ेगा।

पाटीदार अनामत आन्दोलन समिति का एक धड़ा अब भी बीजेपी विरोधी है। जो अब एक नए आन्दोलन की तैयारी कर रहा है। आन्दोलन के लिए अतुल पटेल नूर अन्य साथी यात्रा के लिए हर समाज के नेताओं से मिलकर समर्थन जुटा रहे हैं।

(अहमदाबाद से जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट।)

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