Friday, October 7, 2022

बिहार में कोरोना महामारी में ढाई लाख से ज़्यादा मौतें, सीआरएस आंकड़ों से हुआ खुलासा

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मार्च 2020 से मई 2021 के बीच कोरोना महामारी के दौरान बिहार में नागरिक पंजीकरण प्रणाली (सीआरएस) में 2 लाख 51 हज़ार अतिरिक्त मौतें दर्ज हुई हैं। 

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में नागरिक पंजीकरण प्रणाली (CRS) के तहत कोरोना के प्रकोप की शुरुआत के बाद 2,51,000 से ज्यादा लोगों की मौत दर्ज़ की गई है। मार्च 2020 से मई 2021 के बीच राज्य की नागरिक पंजीकरण प्रणाली में दर्ज मौतों के आधार पर बिहार के आंकड़े में बहुत अंतर है। और ये आधिकारिक मौतों (5,163) की संख्या का लगभग 48.6 गुना है। 

सीएसआर आंकड़ा और कोरोना मौतों के आधिकारिक आंकड़ों के बीच देश में अब तक किसी भी राज्य के अंदर मौत के आंकड़ों में पाया गया ये सबसे बड़ा अंतर है। 

कैसे आया ये आंकड़ा

कोरोना के दौरान राज्य सरकारों ने ज़मीनी डेटा एकत्र करने के लिए इस सिस्टम को शुरू किया गया था। ये रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के कार्यालय के तहत सभी जन्म और मृत्यु को रिकॉर्ड करने के लिए एक राष्ट्रीय प्रणाली है। इसका उपयोग उन मौतों की संख्या की गणना करने के लिए किया जा रहा है जो महामारी से नहीं होती हैं। 

विश्लेषण के लिए महामारी से पहले जनवरी 2015 से फरवरी 2020 के सीआरएस डेटा से सभी कारणों से हुई मौतों की एक बेसलाइन बनाई गई और इसकी तुलना मार्च 2020 में दर्ज मौतों से की गई है। इस तरह से अतिरिक्त मौतों की संख्या सामने आयी है। 

अतिरिक्त मौतें या मृत्यु दर किसी संकट के दौरान सभी कारणों से होने वाली मौतों की कुल संख्या के बारे में बताता है। ये सामान्य स्थितियों में होने वाली मौतों के मुक़ाबले बहुत ज़्यादा है। जाहिर तौर पर सभी अतिरिक्त मौतें केवल कोविड-19 के कारण नहीं हो सकतीं। लेकिन महामारी के दौरान मौत के आंकड़ों में पाये गये अंतर का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से महामारी से जुड़े होने की संभावना रहती है और इससे क्षेत्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव पड़ता है। 

डेटा से पता चलता है कि महामारी से पहले चार साल की अवधि की तुलना में कोरोना की शुरुआत के बाद से 2,51,053 अधिक मौतें हुई हैं। 

मई 2021 के अंत तक राज्य के आधिकारिक आकंड़ों के अनुसार कोरोना से मरने वालों की संख्या 5163 थी। इस तरह सीआरएस आकंड़ों से पता चलता है कि आधिकारिक कोरोना की मौतों का आकंड़ा 48.6 प्रतिशत कम है।  

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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