सीपीएम के पोलित ब्यूरो ने कामरेड वीएस के लिए पार्टी झंडे को आधा झुका कर तीन दिन का शोक मनाने का निर्णय लिया

नई दिल्ली। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन का निधन हो गया है। वह 101 साल के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। इस मौके पर माकपा ने तीन दिन के शोक का ऐलान किया है। 

पार्टी की तरफ से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का पोलित ब्यूरो कामरेड वी.एस. अच्युतानंदन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करता है। वे कम्युनिस्ट आंदोलन के एक उत्कृष्ट नेता और वरिष्ठ कार्यकर्ता थे। वी.एस. अच्युतानंदन पोलित ब्यूरो के पूर्व सदस्य थे। वे 101 वर्ष के थे।

आगे कहा गया है कि स्नेह से ‘वी.एस.’ कहे जाने वाले अच्युतानंदन एक कुशल संगठनकर्ता थे जिन्होंने केरल में कई संघर्षों का नेतृत्व किया। ट्रेड यूनियन आंदोलन से उनका पहला संपर्क तब हुआ जब उन्होंने उस एस्पिनवाल कंपनी में सहकारी कर्मचारियों को संगठित किया, जहाँ वे कार्यरत थे।

उनके बारे में आगे बताते हुए कहा गया है कि 1940 में, जब वे मात्र सत्रह वर्ष के थे, उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी ज्वाइन की। कृष्ण पिल्लई ने उन्हें कुट्टानाड में कृषि मजदूरों के बीच काम सौंपा, जो ज़मींदारों के भीषण शोषण का शिकार थे। त्रावणकोर के दीवान के खिलाफ पुनप्रा-वायलार विद्रोह के दौरान उन्हें भूमिगत होना पड़ा। गिरफ़्तारी के बाद उन्हें हिरासत में कठोर यातनाओं का सामना करना पड़ा।

उनके राजनीतिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए विज्ञप्ति में कहा गया है कि वी.एस. को 1956 में एकीकृत कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य समिति का सदस्य चुना गया और 1958 में राष्ट्रीय परिषद में स्थान मिला। वे उन 32 सदस्यों में अंतिम जीवित सदस्य थे जिन्होंने अलग होकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का गठन किया। वे 1980 से 1991 तक माकपा की केरल राज्य समिति के सचिव रहे। वे 1964 में पार्टी की केंद्रीय समिति में चुने गए और 1985 में पोलित ब्यूरो के सदस्य बने। उम्र के कारण 2022 में उन्हें केंद्रीय समिति से विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में मुक्त कर दिया गया।

विज्ञप्ति में बताया गया है कि वीएस सात बार केरल विधानसभा के लिए चुने गए। उन्होंने दो बार विपक्ष के नेता के रूप में कार्य किया और 2006 से 2011 तक केरल के मुख्यमंत्री रहे। मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान श्रमिक वर्ग के कल्याण के लिए कई विधायी और प्रशासनिक कदम उठाए गए।

पार्टी के साथ अपने आठ दशकों से अधिक लंबे जुड़ाव के दौरान वीएस ने केरल में कम्युनिस्ट आंदोलन की निरंतर प्रगति देखी। एक जननेता के रूप में वीएस ने जनता से सीधे संवाद की कला में महारत हासिल की थी। सादगीपूर्ण जीवन शैली और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ने केरल की राजनीति पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उनके निधन से पार्टी और कम्युनिस्ट आंदोलन को अपूरणीय क्षति पहुँची है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का पोलित ब्यूरो कामरेड वी.एस. अच्युतानंदन के पत्नी, पुत्र और पुत्री के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

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