नई दिल्ली। भारत ने बुधवार को चीन के साथ पांच साल बाद चीनी यात्रियों के लिए टूरिस्ट वीजा की शुरुआत की। कोविड के दौरान इस पर जो रोक लगी थी तो वह जून, 2020 में हुए गलवान झड़प के बाद तक जारी रहा।
दिलचस्प बात यह है कि इसकी घोषणा चीन स्थित भारतीय दूतावास में एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिये की गयी और वह विज्ञप्ति भी सिर्फ मैंडरिन भाषा में है। और इस काम के लिए भी चीनी वेबसाइट वीबो के प्लेटफार्म को चुना गया। बताया जा रहा है कि ऐसा इसकी कोई उल्टी राजनीतिक प्रतिक्रिया न हो इससे बचने के लिए किया गया है। यहां तक कि विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर भी शाम तक इसका कोई जिक्र नहीं था।
इसके पहले इसी महीने की शुरुआत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उस समय सरकार द्वारा चीन के साथ रिश्ते को सर्कस करार दिया था जब एससीओ की बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी।
भारत सरकार के फैसले को ब्रेकिंग न्यूज की तरह पेश करते हुए चीन के अंग्रेजी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने एक्स पर लिखा कि “भारत के चीन स्थित दूतावास ने घोषणा की कि 24 जून, 2025 से चीनी नागरिक टूरिस्ट वीजा के लिए आन लाइन आवेदन, एक साक्षात्कार और व्यक्तिगत तौर पर अपने पासपोर्ट और बीजिंग, संघाई और गांजघो केंद्रों में भारतीय वीजा आवेदन के लिए जरूरी दूसरे दस्तावेजों को जमाकर जा सकते हैं….. ”
पोस्ट में आगे कहा गया है कि मीडिया रिपोर्ट यह बताती है कि भारत ने 2020 से पांच साल तक निलंबन के बाद पहली बार चीनी नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीजा जारी किया है।
बीजिंग द्वारा फैसले का खुले दिल से स्वागत किया गया। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गाऊ जियाकुन ने कहा कि हम इस सकारात्मक पहल को चिन्हित करते हैं। सीमा पार यात्राओं का सरल होना बेहद लाभदायक होता है। दोनों देशों के बीच आगे यात्राओं को और ज्यादा सुविधाजनक बनाने के लिए चीन भारत के साथ संचार और संपर्क बनाए रखेगा।
भारत ने 2020 में कोविड के बाद से चीनी नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीजा को निलंबित कर दिया था। और उसी साल जून महीने में हुई गलवान घटना के बाद यह लगातार जारी रहा। इसके जवाब में चीन ने भी भारत और दूसरे देशों के नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीजा को निलंबित कर दिया था। लेकिन 2022 में उसने छात्रों और व्यवसाय के लिए की जाने वाली यात्राओं को इसमें छूट दी थी।
भारत में चीन के राजदूत जू फीहांग ने इस साल की शुरुआत में घोषणा की थी कि 17 मार्च, 2025 तक उनका दूतावास और भारत स्थित चीनी कंसुलेट ने 50000 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को चीन के लिए वीजा जारी किया है।
उन्होंने आगे जोड़ा कि चीन की यात्रा के लिए जरूरी शर्तों को और ढीला किया गया है जैसे अब कोई भी आनलाइन साक्षात्कार नहीं होगा। इसके साथ ही कुछ समय के लिए बायोमेट्रिक निशानों को भी जुटाने से छूट दे दी गयी है।
2019 में तकरीबन 1.31 करोड़ विदेशी टूरिस्ट भारत के दौरे पर आए थे। जिनमें 305000 चीनी नागरिक थे।
वीजा के शुरू होने से दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और संबंध शुरू होंगे जो किसी भी द्विपक्षीय रिश्ते का प्रमुख पहलू होता है। गलवान घटना के बाद चीन का लगातार यह जोर था कि दोनों देशों के बीच रिश्तों को सीमा पर होने वाले विवादों से न जोड़ा जाए। लेकिन भारत का रुख यह था कि सीमा पर सामान्य स्थिति की बहाली के बगैर दोनों देशों के रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते हैं। उत्तरी लद्दाख के डेमचोक और डेप्सांग पर चीन सरकार के साथ अक्तूबर में हुए समझौते के बाद स्थिति में बदलाव आ गया। जिसने पिछले महीने रूस के कजान में पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच आमने-सामने की बैठक का रास्ता साफ किया।
15 जून 2020 को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत-चीन सीमा पर सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। चार दिन बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सर्वदलीय बैठक में कहा था: “न तो कोई हमारी सीमा में घुसा है, न ही कोई घुसपैठिया वहां मौजूद है और न ही हमारी कोई पोस्ट किसी और के कब्जे में है।”
हाल ही में, गलवान झड़प के बाद पहली बार शंघाई सहयोग संगठन (SCO-CFM) बैठक में भाग लेने के लिए चीन दौरे पर गए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि सीमा क्षेत्रों में सैनिकों के पीछे हटने से द्विपक्षीय संबंधों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
जयशंकर ने कहा: “पिछले नौ महीनों में हमने द्विपक्षीय संबंधों के सामान्यीकरण के लिए अच्छी प्रगति की है। यह सीमा पर तनाव के समाधान और वहां शांति एवं स्थिरता बनाए रखने की हमारी क्षमता का परिणाम है। यही आपसी रणनीतिक विश्वास और द्विपक्षीय संबंधों के सुचारू विकास की बुनियाद है। अब हम पर यह जिम्मेदारी है कि सीमा से जुड़े अन्य पहलुओं, जैसे तनाव कम करने, को भी संबोधित करें।”
उन्होंने आगे कहा: “हमारे लोगों के बीच आदान-प्रदान को सामान्य करने के उपाय निश्चित ही आपसी हित में सहयोग को बढ़ावा देंगे। इस संदर्भ में यह भी आवश्यक है कि व्यापार पर प्रतिबंधात्मक उपाय और बाधाएं न लगाई जाएं।”
वीजा सेवाओं को फिर से शुरू करना, रिश्तों को 2020 से पहले की स्थिति में लाने की दिशा में एक और कदम है। इससे पहले चीन ने पांच साल बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा की अनुमति दी थी और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों को फिर से शुरू करने पर भी चर्चा चल रही है।
जहां एक ओर भारत सीमा विवाद को सुलझाने की आवश्यकता पर जोर देता रहा है, वहीं रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए उठाए जा रहे छोटे-छोटे कदम असल में 1993 के लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के समझौते को फिर से लागू करते हैं, जो सीमा विवाद से बाकी संबंधों को अलग करता है। यह समझौता विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं वाली सरकारों के दौरान भारत-चीन संबंधों का मार्गदर्शक सिद्धांत रहा है, जब तक कि चीन ने 2020 के वसंत में पूर्वी लद्दाख में सैनिकों को जुटाकर हालात बदलने की कोशिश नहीं की थी।
(ज्यादातर इनपुट दि टेलीग्राफ से लिए गए हैं।)