ईडी ने अनिल अंबानी के खिलाफ 3,000 करोड़ रुपये के ऋण धोखाधड़ी मामले में पहली गिरफ्तारी की

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बीटीपीएल के प्रबंध निदेशक पार्थ सारथी बिस्वाल को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी ने खुलासा किया है कि कंपनी ने अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस पावर से 68.2 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी के लिए कथित तौर पर 5.4 करोड़ रुपये प्राप्त किए थे। यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग, एसबीआई के जाली समर्थन और एसईसीआई द्वारा जारी एक निविदा से जुड़े फर्जी ईमेल से जुड़ा है।

उद्योगपति अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली व्यावसायिक संस्थाओं से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पहली गिरफ्तारी की है। बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड (बीटीपीएल) के प्रबंध निदेशक पार्थ सारथी बिस्वाल को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया।

यह गिरफ्तारी ईडी द्वारा भुवनेश्वर और कोलकाता स्थित बीटीपीएल के परिसरों की गहन तलाशी के एक दिन बाद हुई है। यह मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा बीटीपीएल, उसके निदेशकों और अन्य के खिलाफ सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) को कथित तौर पर फर्जी बैंक गारंटी जारी करने के आरोप में दर्ज की गई प्राथमिकी से जुड़ा है।

प्रवर्तन निदेशालय ने ओडिशा स्थित एक कंपनी के जिस प्रबंध निदेशक को गिरफ्तार किया है, वो कंपनी कथित तौर पर व्यापारिक समूहों के लिए “फर्जी” बैंक गारंटी जारी करने का रैकेट चलाती थी, जिसमें रिलायंस समूह की एक कंपनी के लिए कथित तौर पर 68 करोड़ रुपये का आश्वासन प्रदान करना भी शामिल था, आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। 

एजेंसी के सूत्रों ने आरोप लगाया कि कंपनी आठ प्रतिशत कमीशन के बदले “फर्जी” बैंक गारंटी जारी करने की गतिविधि में लगी हुई थी। उन्होंने कहा कि रिलायंस पावर की सहायक कंपनी रिलायंस एनयू बीईएसएस लिमिटेड की ओर से सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसईसीआई) को जमा की गई 68.2 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी “फर्जी” पाई गई। कंपनी को पहले महाराष्ट्र एनर्जी जेनरेशन लिमिटेड के नाम से जाना जाता था।

ईडी की जाँच के अनुसार, बीटीपीएल ने धोखाधड़ी से 68.2 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी तैयार की, जिसके लिए भारतीय स्टेट बैंक के जाली समर्थन और फर्जी एसबीआई ईमेल आईडी का इस्तेमाल करके फर्जी पुष्टिकरण ईमेल तैयार किए गए। इस फर्जी गारंटी का इस्तेमाल एसईसीआई द्वारा जारी एक टेंडर को समर्थन देने के लिए किया गया।

महत्वपूर्ण बात यह है कि ईडी ने खुलासा किया है कि बीटीपीएल को अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड से फर्जी बैंक गारंटी के लिए कथित तौर पर 5.4 करोड़ रुपये मिले थे। अधिकारियों का कहना है कि यह वित्तीय सुराग बीटीपीएल के धोखाधड़ी वाले कार्यों को अंबानी के कॉर्पोरेट नेटवर्क से जोड़ने वाला एक प्रमुख तत्व है।

जाँच से यह भी पता चला है कि 2019 में गठित एक अपेक्षाकृत गुमनाम कंपनी, बीटीपीएल ने कई अघोषित बैंक खाते खोले और अपने घोषित कारोबार से कहीं ज़्यादा वित्तीय लेन-देन किए। अधिकारियों ने कम से कम सात छिपे हुए बैंक खातों में करोड़ों रुपये की आपराधिक आय का पता लगाया है।

एजेंसी का दावा है कि नियामक उल्लंघन बड़े पैमाने पर हो रहे हैं। कंपनी के पंजीकृत कार्यालय से लेखा-बही और शेयरधारक रजिस्टर सहित वैधानिक रिकॉर्ड गायब थे। ईडी को संदेह है कि असली स्वामित्व छिपाने और धन शोधन को संभव बनाने के लिए नकली निदेशकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।पार्थ सारथी बिस्वाल को गिरफ्तारी के बाद अदालत में पेश किया गया और आगे की पूछताछ के लिए उन्हें 6 अगस्त तक ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है।

ईडी ने मुंबई में अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस समूह की कंपनियों के खिलाफ हाल ही में की गई छापेमारी के दौरान इस लेनदेन से संबंधित कुछ दस्तावेज जब्त किए हैं।

हालिया घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए, रिलायंस समूह ने कहा कि उसकी सभी सहायक कंपनियों ने ईमानदारी से काम किया और वे धोखाधड़ी, जालसाजी और धोखाधड़ी की साजिश का शिकार हुईं।इस बीच, ईडी ने इस मामले में अंबानी को 5 अगस्त को पूछताछ के लिए तलब किया है।

इस बीच रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी को ईडी ने लुक आउट सर्कुलर जारी किया है। यह सर्कुलर देश छोड़कर भागने से रोकने के लिए जारी किया जाता है और इसके तहत सभी हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर अधिकारियों को अलर्ट कर दिया जाता है। 

उनके ख़िलाफ़ 3,000 करोड़ रुपये के कथित लोन घोटाले के मामले में यह सर्कुलर जारी किया गया है। इसके साथ ही ईडी ने अनिल अंबानी को पूछताछ के लिए 5 अगस्त को नई दिल्ली में अपने मुख्यालय में तलब किया है। यह समन मुंबई और दिल्ली में अनिल अंबानी से जुड़े 35 से अधिक ठिकानों पर हाल ही में की गई छापेमारी के एक सप्ताह बाद आया है। छापों में कई दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए।

ईडी की जांच का केंद्र यस बैंक द्वारा 2017 से 2019 के बीच रिलायंस ग्रुप की कंपनियों को दिए गए 3,000 करोड़ रुपये के कर्ज की कथित अवैध हेराफेरी है। जांच में पाया गया कि इन कर्जों को ग्रुप की अन्य कंपनियों और कथित तौर पर शेल कंपनियों को दिया गया। इन कंपनियों की कमजोर वित्तीय स्थिति थी और जिनके पते व निदेशक समान थे। ईडी का दावा है कि यस बैंक के तत्कालीन प्रमोटरों को कर्ज स्वीकृति से ठीक पहले उनके निजी खातों में धनराशि प्राप्त हुई, जो एक संभावित ‘रिश्वत और कर्ज’ के गठजोड़ की ओर इशारा करता है।

इसके अलावा रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड यानी RHFL में कॉरपोरेट लोन में भारी बढ़ोतरी ईडी की जांच के दायरे में है। सेबी (SEBI) ने अपनी जांच में RHFL में गंभीर अनियमितताएं पाईं, जिसमें फंड्स का दुरुपयोग और संबंधित पक्षों को ऋण देना शामिल है। सेबी ने पिछले साल अनिल अंबानी और 24 अन्य इकाइयों को RHFL से फंड्स के दुरुपयोग के लिए सिक्योरिटीज़ मार्केट से पांच साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया था और 25 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया।

क़रीब एक हफ़्ते पहले ही 24 जुलाई को ईडी ने मुंबई और दिल्ली में रिलायंस ग्रुप से जुड़े 35 से अधिक ठिकानों पर तीन दिनों तक छापेमारी की। इन छापों में परिसरों की तलाशी ली गई। जांच के दौरान कई दस्तावेज और कंप्यूटर उपकरण जब्त किए गए। ईडी ने पाया कि यस बैंक की ऋण स्वीकृति प्रक्रिया में बैक-डेटेड क्रेडिट स्वीकृति मेमोरेंडम, बिना उचित जांच के निवेश प्रस्ताव, और बैंक की क्रेडिट नीति का उल्लंघन जैसी ‘घोर अनियमितताएं’ थीं।

ईडी ने अनिल अंबानी को 5 अगस्त को दिल्ली में अपने बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया है, जिसे मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए के तहत दर्ज किया जाएगा। जांच में शामिल अन्य व्यक्तियों और कंपनियों से भी पूछताछ जारी है। केंद्रीय जांच ब्यूरो की दो एफ़आईआर के आधार पर ईडी ने यह जांच शुरू की थी, जिसमें येस बैंक के पूर्व चेयरमैन राणा कपूर का नाम भी शामिल है। इसके अलावा, रिलायंस कम्युनिकेशंस और कैनरा बैंक के बीच कर्ज से जुड़े धोखाधड़ी के आरोप भी ईडी के दायरे में हैं।

अनिल अंबानी के खिलाफ ईडी की यह कार्रवाई उनके व्यापारिक साम्राज्य पर एक बड़ा झटका है, जो पहले से ही वित्तीय संकट और दिवालिया कार्यवाही का सामना कर रहा है। इस कथित लोन धोखाधड़ी मामले में जांच ने वित्तीय अनियमितताओं और कॉरपोरेट गवर्नेंस पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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