नियोजन नीति और स्थानीय नीति को लेकर युवाओं ने दिया झारखंड विधानसभा के पास धरना

राज्य गठन के 25 साल बाद भी झारखंडी युवा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सम्मानजनक रोजगार से वंचित हैं और रोजगार के लिए अन्य राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं, जबकि 40 प्रतिशत खनिज संपदा अकेले झारखण्ड देश को देता है। यानी बेरोजगारी का दंश झेल रहे झारखंड के युवाओं के साथ यह घोर अन्याय 25 सालों की सरकारों की नीतियों के कारण हो रहा है। 

बताना जरूरी हो जाता है कि जिस अवधारणा को लेकर झारखंड अलग राज्य का गठन हुआ वह आज भी हाशिए पर पड़ा है। राज्य में आज तक न तो स्थानीय नीति बनी है और न ही नियोजन नीति, जिसका ख़ामियाजा राज्य के मूलवासी व आदिवासी बेरोजगार युवाओं को उठाना पड़ रहा है। 

झारखंड सरकार की बेरोजगार युवाओं के प्रति इन्हीं सब लापरवाहियों और संवेदनहीन नीतियों के खिलाफ आज 26 अगस्त को झारखंड जनाधिकार महासभा के बैनर तले राज्य भर से आये अनेक युवाओं ने झारखंड विधानसभा के पास धरना दिया। युवाओं ने स्थानीय नीति और नियोजन नीति पर सरकार की चुप्पी, नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और बेरोजगारी को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। 

इस अवसर पर युवाओं ने कहा कि झारखण्ड में रघुवर सरकार की जनविरोधी स्थानीयता नीति अब भी लागू है और छह साल की हेमंत सरकार के होने के बावजूद इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। दूसरी ओर, नियोजन की अस्पष्टता, परीक्षाओं का लगातार रद्द होना, नियुक्ति में देरी ने राज्य के युवाओं का मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और सरकारी व्यवस्था से विश्वास छीन लिया है। 

युवाओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सवाल किया कि – “दिशोम गुरु शिबू सोरेन के सपनों को जर्जर क्यों किया जा रहा है? स्थानीय नीति और नियोजन नीति कब बनेगी और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कब रुकेगा?”

झारखंड की चिंताजनक स्थिति पर युवाओं ने बताया कि – 

-राज्य की बेरोजगारी दर 17% पार कर चुकी है, जो राष्ट्रीय औसत से तीन गुना अधिक है।

-हर साल लाखों युवा रोज़गार की तलाश में दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों में पलायन कर रहे हैं।

-JSSC-CGL की जनवरी और सितंबर 2024 की परीक्षाएं पेपर लीक के चलते रद्द हुईं, हाई कोर्ट में CBI जांच की मांग के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 

-उधरि सिपाही भर्ती में नियमावली बदलने के कारण भर्ती प्रक्रिया ठप हो गई और इसमें 12 अभ्यर्थियों की असमय मौत हुई।

-7,900 से अधिक प्राथमिक सरकारी विद्यालयों में केवल एक शिक्षक है, जहाँ 3.8 लाख बच्चे पढ़ते हैं।

-17,850 शिक्षक पद और 1.58 लाख से अधिक कुल सरकारी पद खाली पड़े हैं।

उच्च शिक्षा संस्थानों में 2008 के बाद से नियमित फैकल्टी नियुक्ति नहीं हुई। 4,000 से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों के पद रिक्त हैं।

-निजी कंपनियों में केवल 21% रोज़गार ही झारखंडियों को मिला है।

-पलामू, लातेहार और खूंटी जिले की चौकीदार बहाली है, जहाँ अनुसूचित जाति के लिए एक भी सीट आरक्षित नहीं की गई — यह साफ तौर पर संवैधानिक आरक्षण नीति की अनदेखी है।

कार्यक्रम के आलोक में झारखंड जनाधिकार महासभा से जुड़े युवा प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम पत्र लिखकर अपनी मांगें रखीं, जिनमें – 

स्थानीय नीति : रघुवर सरकार की स्थानीयता नीति को रद्द कर मूलगांव आधारित नीति बने।

नियोजन : स्थायी और विवाद-मुक्त नियोजन नीति बनाई जाए और सभी रिक्त पदों पर झारखंडियों को प्राथमिकता मिले।

आरक्षण : अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्गों और महिलाओं को बढ़ा हुआ आरक्षण दिया जाए।

शिक्षा सुधार : खाली पदों पर नियुक्ति, ग्रामीण स्कूलों की पुनर्बहाली और स्थानीय भाषा आधारित शिक्षा सुनिश्चित हो।

भूमिहीनों का अधिकार : दलित-भूमिहीनों को जाति प्रमाण पत्र और ज़मीन देने की प्रक्रिया सरल हो तथा इसके लिए शिविर आयोजित हों।

पलायन रोकना : कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और मज़दूर अधिकारों पर ठोस नीति बने।

उच्च शिक्षा : विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में स्थानीय युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष नीतियां बनें।

धरना स्थल को संबोधित करते हुए युवाओं ने अपनी जो बातें रखीं उनमें युवा नेत्री रिया तूलिका ने बताया कि झारखंड की शिक्षा व्यवस्था चरमरा गयी है, वहीं रोजगार और नौकरी मिलना मुश्किल हो रहा। चुनाव के समय झामुमो और कॉंग्रेस ने युवाओं के लिए कई वायदे किए लेकिन सरकार बनने के बाद इसपर कोई काम नहीं हुआ।

धरनास्थल को संबोधित करते हुए अजय एक्का ने कहा कि झारखंड की वर्तमान हेमंत सरकार ने चार सालों में 2.07 नौकरी खत्म कर दी। 2022 से पहले झारखंड सरकार के पास 5.33 लाख नौकरियों के स्वीकृत पद थे जो 2024 – 25 तक में घटा कर मात्र 3.27 लाख कर दिया गया। जिसमें वर्तमान में 1.68 लाख कार्यरत हैं और 1.59 पद अभी भी खाली है। इसमें भी सरकार के पास कोई स्पष्ट स्थानीय नीति व‌ नियोजन नीति नहीं होने के कारण झारखंड के नौकरियों में बाहरी हावी हैं।

अवसर पर युवा नेता दीपक रंजीत ने कहा कि हेमंत सरकार हमारे मुद्दों, जैसे नियोजन नीति, स्थानीय नीति आदि पर चुनाव जीता है। चुनाव के दौरान हमने सरकार का साथ दिया और सरकार बनाई, लेकिन युवाओं के मुद्दों पर अब तक कुछ नहीं किया गया। सरकार युवाओं के साथ धोखा कर रही है।

वहीं दीप्ति मिंज ने कहा कि समय पर वैकेंसी नहीं आती, आती है तो पेपर लीक हो जाता है। इस वजह से राज्य में पलायन बढ़ रहा और झारखंडियों का बाहरी लोग शोषण कर रहे हैं। इसलिए ज़रूरी है कि झारखंड में नौकरी के लिए ठोस नियोजन नीति बनाई जाए।

युवा मनोज भुइया ने कहा कि झारखंड में बेरोजगारी बढ़ती जा रही, लेकिन सरकार सोयी हुई है, युवाओं की कोई चिंता नहीं है। यदि जल्द से जल्द नयी स्थानीय और नियोजन नीति नहीं बनाई गयी तो विरोध और तेज होगा। 

धरना में शामिल युवाओं ने कहा कि यह केवल विरोध नहीं, बल्कि सरकार को अंतिम चेतावनी है। यदि अब भी ठोस निर्णय नहीं लिए गए, तो आंदोलन व्यापक होगा। यह सिर्फ रोज़गार की नहीं बल्कि झारखंड की पहचान, सम्मान और अधिकार की लड़ाई है और इसे दबाया नहीं जा सकता और हम इन मुद्दों पर सरकार से आर-पार की लड़ाई को तैयार हैं।

धरना कार्यक्रम को अमन मरांडी, संजय उरांव, किरण भारती, अमृता किस्कू, रेणु उरांव, पीयूष सहित कई अन्य साथियों ने भी अपनी बात रखी।

(वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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