आखिर एक वामपंथी प्रधानमंत्री (स्पेन) ही इजरायली नरसंहार के खिलाफ फिलिस्तीनियों के साथ निर्णायक तौर पर खड़ा हुआ  

पश्चिमी यूरोप का एक देश स्पेन के निर्णायक तौर पर फिलिस्तीनियों के नरसंहार के विरोध में इजरायल के खिलाफ खड़ा हुआ है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ( Pedro Sanchez ) ने फिलिस्तीन में इजरायल की कार्रवाई को नरसंहार कहा है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए। पेड्रो सांचेज  स्पेनी सोशिलिस्ट वर्कस पार्टी के वामपंथी झुकाव वाले नेता हैं। उन्होंने स्पेन के खिलाफ कई कड़े प्रतिबंधों की घोषणा की है।

पिछले वर्ष उनकी वामपंथी सरकार ने फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता दिया था। इस मामले में उन्होंने अपने अन्य यूरोपीय सहयोगियों से नाता तोड़ लिया था। जिस पर इजराइल ने तीखी नाराजगी जाहिर किया था।

स्पेनी प्रधानमंत्री पेड्रो ने इजरायल के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा करते हुए कहा कि, “यह नागरिक आबादी पर एक अनुचित हमला है। 60 हज़ार लोग मारे गए, 20 लाख विस्थापित हुए, जिनमें से आधे बच्चे हैं। यह आत्मरक्षा नहीं है… यह निहत्थे लोगों का विनाश है।”

गाजा में इजरायल के सैन्य अभियान के सबसे मुखर आलोचकों में से एक पेड्रो सांचेज ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से पोस्ट किए गए भाषण में कहा, “अपने देश की रक्षा करने और अस्पतालों पर बमबारी करने या निर्दोष बच्चों को भूखा मारने के बीच अंतर है।”

उन्होंने फिलिस्तीनियों के समर्थन में और इजरायल के नरसंहार को रोकने के लिए 8 सितंबर 2025 को निम्न घोषणाएं की हैं-

1- स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने कहा कि उनकी वामपंथी सरकार इजरायल को किसी प्रकार का हथियार या उससे जुड़ी सामग्री बेचने और उससे खरीदने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रही है। हालांकि एक तरह यह प्रतिबंध इजरायल के खिलाफ फिलिस्तीन पर हमले की शुरुआत में 2023 से ही लगा हुआ था।

2-फिलिस्तीन (गाजा) नरसंहार के दोषियों को स्पेन युद्ध अपराधी घोषित करता है। उनके साथ युद्ध अपराधी की तरह व्यवहार करेगा। ऐसे किसी व्यक्ति को स्पेन में घुसने नहीं देगा और यदि वह घुसता है तो उसको गिरफ्तार किया जाएगा। ऐसे लोगों में इजरायल के प्रधानमंत्री भी शामिल हैं। 

नेतन्याहू और उनके पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट को अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) द्वारा युद्ध अपराधों के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। लेकिन यूरोप के देश, अमेरिका और दुनिया के अन्य अधिकांश देशों ने इसे लागू करने से इंकार कर दिया। इज़राइल के सबसे करीबी सहयोगी और उसके मुख्य सैन्य वित्तपोषक, संयुक्त राज्य अमेरिका ने ICC अभियोजक करीम खान पर ही प्रतिबंध लगा दिया है। 

3-स्पेन के आसमान से कोई सैन्य साजो-सामान इजरायल नहीं जाएगा।

4- इजरायल ने गाजा ( फिलिस्तीन ) के जिन हिस्सों पर गैर-कानूनी तरीके से अपनी बस्तियां बना रखी हैं, वहां बना कोई सामान ( उत्पाद) स्पेन में निर्यात नहीं किया जा सकता है। इस प्रतिबंध का उद्देश्य इजरायल के फिलिस्तीन की जमीन पर गैर-कानूनी कब्जे को रोकना है।

5- यदि कोई स्पेनी नागरिक इजराइली कब्जे वाले फिलिस्तीनी हिस्से में हैं, तो उसे सिर्फ बहुत जरूर कानूनी सहायता ही मिलेगी। शेष राजनयिक रिश्ते स्पेन खत्म कर रहा है।

6- इसके साथ स्पेन ने फिलिस्तीनियों की मदद के लिए फिलिस्तीनी प्राधिकार वाली सरकार को खाद्य सामग्री, मेडिकल सहायता और अन्य जरूरी चीजें उपलब्ध कराएगा। 

7- इजरायल के सैन्य जरूरतों के लिए य कोई ईधन स्पेन के बंदरगाह से नहीं जा सकता है।

सोमवार की गई इस घोषणा का केंद्रबिंदु एक शाही आदेश कानून है जिसे स्पेन की कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया जाएगा और बाद में संसद द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। यह उपाय अक्टूबर 2023 से लागू होने वाले उस कानून को औपचारिक रूप देता है, जिसके तहत इज़राइल को हथियारों, गोला-बारूद और सैन्य उपकरणों की खरीद और बिक्री पर प्रतिबंध स्पेन ने लगाया था।

स्पेनी विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, “स्पेनिश सरकार द्वारा आज घोषित गाजा और पश्चिमी तट की अमानवीय स्थिति से संबंधित उपाय, स्पेनिश समाज की बहुमत की राय को दर्शाते हैं और इसकी संप्रभुता के ढांचे के भीतर और शांति, मानवाधिकारों और अंतर्राष्ट्रीय कानून की रक्षा के अनुरूप अपनाए गए हैं।”

स्पेन ने मई 2024 में औपचारिक रूप से एक फ़िलिस्तीनी राज्य को मान्यता दी, और ऐसा करने वाले कुछ यूरोपीय देशों में शामिल हो गया।  

समकालीन इतिहास में कोई सबसे बड़ा नरसंहार चल रहा है, वह फिलिस्तीनियों का नरंसहार है। पिछले करीब 2 सालों में 64, 378 फिलिस्तीनियों का नरसंहार इजरायल ने किया है। मारे गए लोगों में करीब 20 हजार मासूम बच्चे हैं। 1 लाख 50 लोग बुरी तरह घायल हुए हैं। एक बड़ी संख्या में लोग इजरायल की बमबारी में तब मारे गए हैं, जब वे पेट की भूख मिटाने के लिए खाद्य सामग्री की लाइन में खड़े थे।  करीब 65 हजार लोगों की हत्या उस गाजा में की गई, जहां की कुल आबादी 23 लाख है।

गाजा में कोई जगह नहीं है, जहां फिलिस्तीनी पनाह लेकर खुद को इजरायली बमों से बचा सकें। अस्पतालों, स्कूलों, मस्जिदों और अन्य ऐसे स्थानों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र संघ और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के भवनों-ऑफिसों तक को बमबारी से खंडहर बना दिया गया है। जिस गाजा में अलजजीरा और अन्य मीडिया संस्थानों के पत्रकारों तक की हत्या की जा रही है, वहां आम फिलिस्तिनी की बात ही कौन करे। फिलिस्तीनियों को भूख-प्यास से बचाने और उनकी अन्य न्यूनतम जरूरतों की आपूर्ति के लिए जा रहे ट्रकों और वाहनों को इजरायल ने निशान बना रहा है। 

गर्भवती स्त्रियों को बच्चा जनने के लिए कोई अस्पताल, डाक्टर या नर्स की सहायता नहीं मिल पा रही है।

च्चे, बू़ढ़े, बीमार और गर्भवती स्त्रियों इजरायली बमों-गोलों से बचने के लिए भाग पाने की स्थिति में भी नहीं हैं।

मांओं के हाथों में उनके बच्चे दूध के लिए तड़फते हुए या भूख से मर रहे हैं। माएं अपने बच्चों के कंकाल जैसे शरीर में अपनी सूखी छाती से दूध पिलाकर जिंदा रखने में नाकामयाब हो रही हैं। 

स्कूलों और अस्पतालों को करीब-करीब ध्वस्त कर दिया गया है। फिलिस्तीनियों के घरों-दुकानों और प्रार्थना स्थलों को तहस-नहस कर दिया गया है। उनके घरों को मटियामेट कर दिया गया है। 

फिलिस्तीनी कभी इस इलाके और कभी उस इलाके में जान बचाने के लिए भाग रहे हैं। 

23 लाख की गाजा की आबादी 45 किलोमीटर के दायरे में सूअर बाड़े रहने जैसी हालात में जीने को मजबूर कर दी गई है। 

दुनिया के शासक वर्ग या तो खुल्लम-खुल्ला इजरायल के साथ खड़े हैं या चुपचाप मदद करे हैं या फिलिस्तीनियों के प्रति दिखावटी शाब्दिक संवेदना प्रकट कर रहे हैं। लोकतंत्र का दंभ भरने वाले यूरोपीय और अन्य देश प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके से इजरायल की मदद कर रहे हैं। तथाकथित महान लोकतांत्रिक देश अमेरिका तो इस नरसंहार का मुख्य आका है। शर्मनाक यह है कि दुनिया का सबसे बडे लोकतंत्र होने की डींग हांकने वाला मेरा देश भी इजरायल के साथ खड़ा है।

तथाकथित अरब और मध्यपूर्व के इस्लामिक देश सऊदी अरब, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत आदि इजरायल के साथ हैं, कभी-कभी शाब्दिक दुख प्रकट करते हैं, विरोध जताते हैं, लेकिन दूसरी तरफ इजरायल के साथ अपने को घनिष्ठ रूप में जोड़ते जा रहे हैं। उसकी मदद भी कर रहे हैं। ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका के हमले में इन देशों ने दोनों की भरपूर मदद की। इस्लामिक आबादी फिलिस्तीन का पड़ोसी मिस्र भी अमेरिका-इजरायल का पिट्ठू बना हुआ है। अपने को सऊदी अरब के बाद इस्लाम का सबसे बड़ा चैंपियन कहने वाला पाकिस्तान तो फिलिस्तीनियों के नरसंहार के मुखिया ट्रंप का तलवा चाटने में लगा हुआ है। 

दुनिया में इंसानी भाईचारे की कौन कहे तथाकथित मुस्लिम भाईचारे तक का  नामों-निशान नहीं दिख रहा है। इस्लाम के नाम, मुसलमान के नाम शासन करने वाले शेख या चुने हुए शासक इजरायल के साथ गलबहियां कर रहे हैं, ट्रंप को दुनिया का सबसे सुसज्जित, आलीशान और सुरक्षित विमान भेंट कर रहे हैं या ईरान पर इजरायली-अमेरिकी हमले के लिए ईधन और अड्डा मुहैया करा रहे हैं।

ले-दे के ईरान निर्णायक तरीके से फिलिस्तीनी जनता के साथ खड़ा है। दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और कुछ अन्य अफ्रीकी-लैटिन अमेरिकी देश कुछ बोलते हैं, कुछ कदम उठाते हैं। हां दुनिया की जनता का एक बड़ा हिस्सा जरूर बोल रहा है, सड़कों पर उतर रहा है, इसमें यूरोप-अमेरिका जनता सबसे आगे है। 

मेरे देश के शासक वर्ग की बात ही छोड़ दीजिए, जनता का एक बड़ा हिस्सा  फिलिस्तीनियों के नरसंहार और तबाही में इजरायल के साथ खड़ा है। पीयू सर्वे के मुताबिक भारत दुनिया का वह शीर्ष देश है, जहां कि सबसे अधिक आबादी का अनुपात इजरायल के साथ खड़ा है। इसके दो मुख्य कारण हैं-

1- हिंदू राष्ट्र के समर्थकों का मुस्लिम विरोधी घृणा की तुष्टि फिलिस्तिनों के कत्लेआम में हो रही है। 

2-भारतीय कार्पोरेट और पूंजीपति वर्ग का इजरायल और उसके आका अमेरिका से नाभिनाल रिश्ता।

इन्हीं दोनों के गठजोड़ का मीडिया पर पूरी तरह नियंत्रण है। भारतीय मीडिया  फिलिस्तीन विरोधी घृणा अभियान का टूल बन हुई है।  इजरायल को महिमामंडित किया जा रहा है। इजरायल को भारत के आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। 

ऐसे समय में वर्कर्स पार्टी का एक वामपंथी नेता ही खुलकर इजरायल नरसंहार के खिलाफ खड़े होने की हिम्मत जुटा पाया। पेड्रो सांचेज के इजरायल के नरसंहार के खिलाफ खड़े होने से यह नरसंहार रूकेगा या नहीं, यह दीगर सवाल है, लेकिन इतिहास इसे याद रखेगा कि वर्कर्स पार्टी, स्पेनी जनता का बड़ा हिस्सा, स्पेन की सरकार और उसके प्रधानमंत्री ने अमेरिका-इजरायल को चुनौती देते हुए उनके खिलाफ खड़े हुए और फिलिस्तीनियों के नरसंहार को रोकने की हर कोशिश की।

(डॉ. सिद्धार्थ लेखक और पत्रकार हैं।)

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