दस दिन तक बिस्किट और चिप्स पर चलीं हरजीत कौर

73 वर्षीय हरजीत कौर दस दिन तक बिस्किट और चिप्स पर चलीं और उन्हें अलग-अलग कोठरियों में रखा गया। 

33 साल तक अमेरिका में रहने के बाद हाल में उन्हें बेड़ियों और हथकड़ियों में भारत डिपोर्ट किया गया। फिलहाल  पंजाब के मोहाली में अपनी बहन के घर में रह रहीं कौर ने इंडियन एक्स्प्रेस को शनिवार को बताया कि  वह रूटीन जांच के लिए अधिकारियों के पास गई थीं और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें एक ठंडे कमरे में रखा गया, जब उन्होंने शिकायत की तो एक एल्युमिनियम फॉइल दिया गया। 

बाद में दूसरे दिन हथकड़ियाँ डाल कर एरिज़ोना के बॅकर्सफील्ड बंदीगृह में ले जय गया। वहाँ उन्हें सोने के लिए एक लकड़ी का तख्ता दिया गया और ठंडी ब्रेड चीज़ और बीफ के साथ खाने के लिए दी गई, जब उन्होंने कहा कि वह यह सैंडविच नहीं खा सकतीं, वह शाकाहारी हैं तो उन्हें चिप्स और दो बिस्किट दिए गए। अगले दस दिन वह चिप्स, दो बिस्किट और पानी पर चलीं। 

उन्होंने बताया कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है और दो बार वह सर्जरी करा चुकी हैं तथा उन्हें कई दवाइयाँ लेनी पड़ती हैं लेकिन उन्हें दवाइयाँ नहीं दी गईं। दस दिन बाद उन्हें भारत भेजा गया। 

उनके पैरों में बेड़ियाँ और हाथों में हथकड़ियाँ डाली गईं और जब विमान में बिठाया, वहाँ यह हटाई गईं। कौर के एक रिश्तेदार ने कहा कि अमरीकी सरकार ने कौर को इस उम्र में डिपोर्ट किया उस पर किन्हीं मानवाधिकारों का पालन नहीं किया और उन्हें बेड़ियों-हथकड़ियों में रखा। क्या एक 73 वर्षीय व्यक्ति भाग सकता है?” 

कौर 1992 में अपने दो बेटों के साथ अमरीका गई थीं। अमरीकी इमीग्रेशन एवं कस्टम्स एन्फोर्स्मन्ट विभाग ने उन पर “अवैध तरीके से रहने” का आरोप लगाया और डिपोर्ट कर दिया। 

उन्होंने बताया कि 2012 तक कोई समस्या नहीं थी और उन्हें उम्मीद थी कि वह नियमित हो जाएंगी लेकिन उसके बाद उन्हें मना किया गया। उन्होंने अपील की और हर छह महीने पर वह रिपोर्ट करती थीं। वह वहाँ टैक्स भर्ती थीं और उनके पास ड्राइविंग लाइसेन्स था। उनके पास अमरीका के जारी कई दस्तावेज़ थे, पर नागरिकता नहीं मिल पाई। 

कौर ने बताया कि फिलहाल वह अपनी बहन के यहाँ रुकी हैं। यहाँ से वह अपने भाई के पास जाएंगी पर उन्हें नहीं पता कि वह आगे क्या करेंगी। इन तीन दशकों में पंजाब में सब कुछ बदल चुका है। उनके अभिभावकों की मौत हो चुकी है। छोटे भी की मौत हो चुकी है। भाई के बच्चों की शादी हो चुकी है। वह कभी किसी मौके पर यहाँ नहीं आ पाई। अब उनके पास न घर है, न ज़मीन और न पैसा, पता नहीं वह कहाँ और कैसे रहेंगी? 

हरजीत कौर को आठ सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और 22 सितंबर को भारत भेजा गया। उनके वकील के अनुसार उनका कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं था और अमेरिका के अधिकारियों ने जिस तरह उनसे बर्ताव किया वह “अस्वीकार्य” है।  

इस पूरे प्रकरण में भारत के विदेश मंत्रालय ने इतना ही कहा कि जनवरी 2025 से 2417 भारतीय नागरिकों को अमेरिका से भेजा गया है। हरजीत कौर भी उनमें हैं। प्रवक्ता ने कहा कि वैध तरीकों से विदेश जाने के तरीकों को बढ़ावा देने की उनकी कोशिश है लेकिन भारत लोगों के अवैध रूप से  विदेश जाने के पक्ष में नहीं है।

Leave a Reply