हिमाचल प्रदेश से एक 12 वर्षीय दलित बच्चे को इस कदर अपमानित किया गया कि उसने ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली।
मीडिया रेपोर्टों के अनुसार यह लिम्बडा गाँव का यह बच्चा एक दुकान से कुछ खाने की चीज खरीदने गया। दुकान में कोई व्यक्ति नहीं था, दुकान खाली थी।
उस बच्चे ने सोचा कि दुकानदार के घर के अंदर जाकर उनसे सामान मांग लेता हूँ। दुकान मालकिन उस 12 साल के दलित बच्चे को अपने घर में देखकर गुस्सा हो गई। उन्होंने कहा, “तू हमारे घर में कैसे घुस आया?” वो बच्चा 12 साल का था। वह उसकी डांट सुनकर उसके घर से बाहर चला गया।
लेकिन बात वहीं खत्म नहीं हुई। थोड़ी देर बाद उस घर के उच्च जाति के लोगों ने उस बच्चे के घर एक संदेश भेजा कि लड़के का उनके घर में प्रवेश करना पाप है और प्रायश्चित के तौर पर उन्हें एक बकरी भेंट करनी होगी। जिसकी बलि देकर वह घर को फिर पवित्र कर देंगी।
जब बच्चे के अभिभावकों ने असमर्थता व्यक्त की तो दुकान मालकिन ने उस बच्चे को अपने घर में जहां पशुओं को बांधा जाता है वहां पकड़कर बिठा दिया और उसको बंद कर दिया। उस बच्चे को पीटा भी गया। बाद में वह किसी तरह वहाँ से भाग निकला।
वह बच्चा अपने घर पहुंचा। उसने ज़हर खा लिया। उसे अस्पताल ले जाया गया, परंतु वह ठीक नहीं हो सका और उसकी मृत्यु हो गई।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखु के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने मीडिया को बताया कि मुख्यमंत्री ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अनुसूचित जाति आयोग और पुलिस को घटना की गहन जांच के आदेश दिए हैं।