सर्व सेवा संघ के मंत्री अरविन्द अंजुम ने कहा कि सरकार गोडसे और सावरकर की विचारधारा को प्रोत्साहित कर रही है और गांधी के विचारों को नकारते हुए नफ़रत फैलाई जा रही है। सावरकर-गोडसे की सोच टकराव और हिंसा की ओर ले जाती है, जबकि गांधी की सोच अहिंसा, लोकतंत्र और सभी को साथ लेकर चलने की बात करती है।
श्री अंजुम फाफामऊ बाजार में ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा के स्वागत के लिए जमा लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य एक ऐसे लोकतांत्रिक समाज का निर्माण करना है जो सूफी संतों की परंपरा से प्रेरित हो, जिसमें मेल-जोल, भाईचारा और सबका सम्मान हो।
विरासत, सद्भावना, संविधान और लोकतंत्र के लिए सर्व सेवा संघ के तत्वावधान में ”एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा राजघाट, वाराणसी से राजघाट, दिल्ली के लिए 2 अक्टूबर को गांधी जयंती दिन निकली है। पदयात्रा का भदोही, प्रयागराज, प्रतापगढ़ में अभूतपूर्व स्वागत हुआ।
1000 किमी लंबी पदयात्रा 110 पड़ाव से होते हुए कुल 56 दिन चलेगी। यह ऐतिहासिक पदयात्रा 18 जनपदों एवं 03 राज्यों के सैकड़ों गांवों कस्बों, शहरों बाजारों से होते हुए विभिन्न स्कूलों कालेजों से भी गुजेरेगी और लोगों को गांधी के विचारों से अवगत कराएगी।
वाराणसी, भदोही के बाद पदयात्रा अपने नौवें दिन प्रयागराज स्थित बैंक रोड चौराहा से शुरू होकर कतरा, ममफोड़गंज होते हुए आज़ाद मार्केट तेलियरगंज स्थित सब्ज़ी मंडी पहुंची, जहां तीसरी सरकार अभियान के चंद्र शेखर प्राण, आर्य शेखर, आनंद घेलियाल, शुभ सेवक सिंह आदि ने पदयात्रा का स्वागत किया। इस दौरान क्रांतिकारी गीत गाए गए। इसके बाद प्रयागराज होते हुए प्रतापगढ़ जनपद की सीमा में पदयात्रा ने अपना ठौर बनाया।
इस दौरान पदयात्रा के फ़ाफामऊ बाज़ार में पहुंचने पर श्याम बाबू गुप्त ने यात्रा का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि गांधी का विचार सबको जोड़ने का है; गांधीजी अंतिम व्यक्ति के कल्याण के पक्षधर थे।
वरिष्ठ गांधीवादी विद्याधर मास्टर ने कहा कि आज ज़रूरत “विश्वगुरु” बनने की नहीं, बल्कि “विश्वबंधु” बनने की है।
पदयात्रा के टिकरी पहुँचने पर टिकरी के प्रधान पप्पू पासी ने कहा कि सरकारें जबरन किसानों की ज़मीनें कौड़ियों के दाम पर ले रही हैं और आवास विकास योजनाओं के माध्यम से उन्हें करोड़ों में बेचेंगी। यह किसानों के साथ नाइंसाफी है। हम इस अन्याय के खिलाफ़ लड़ रहे हैं और आपका समर्थन चाहते हैं।
सर्वोदय मंडल यूपी के अध्यक्ष एवं पदयात्रा के संयोजक रामधीरज ने बताया कि हम किसानों के साथ हैं; जहां भी अन्याय होगा, वहां हम डटकर खड़े होंगे।
गौरतलब हो कि 2 अक्टूबर 2025 गांधी जयंती से प्रारंभ होकर 26 नवंबर संविधान दिवस अवसर पर समाप्त होने वाली यह पदयात्रा सर्व सेवा संघ और समस्त गांधीजन व लोकतांत्रिक संगठनों के सहयोग से यह यात्रा प्रारंभ की गई है।पदयात्रा क्यों के सवाल पर “जनचौक” को जानकारी देते हुए इस पदयात्रा के संयोजक एवं सर्वोदय मंडल यूपी के अध्यक्ष रामधीरज ने बताया कि यह पदयात्रा सूफी- संतों, व स्वतंत्रता आंदोलन के आदर्शों की विरासत, सद्भावना संविधान और लोकतंत्र के लिए, सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय के लिए, निर्भयता के लिए, समता, बंधुत्व, सम्मान, सहिष्णुता, शांति और प्रकृति के संरक्षण के लिए, स्वदेशी, स्वालंबन, स्वराज और सम्मानित स्वाभिमान के लिए, युद्ध नफरत, कारपोरेट लूट और महाविनाश से दुनिया को बचाने के लिए, सत्य नीति और नैतिकता की रक्षा के लिए शुरु की गई है। उन्होंने बताया है कि 25 नवंबर को यह यात्रा गांधी स्मारक निधि राजघाट दिल्ली पहुंचकर विश्राम करेगी। अगले दिन 26 नवंबर को सुबह 7:00 बजे गांधी समाधि स्थल जाकर सर्वधर्म प्रार्थना सभा होगी। तत्पश्चात पैदल मार्च करते हुए 10 जंतर-मंतर पहुंचकर सभा के पश्चात कार्यक्रम का समापन किया जाएगा। यह पदयात्रा राजघाट (वाराणसी) से भदोही, प्रयागराज, रायबरेली, लखनऊ, उन्नाव, कानपुर, औरैया, इटावा, फिरोजाबाद, आगरा, मथुरा, फरीदाबाद, से निजामुद्दीन होते हुए राजघाट दिल्ली पहुंचेगी।
सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल बताते हैं, “भारत की साझा संस्कृति, सूफी संतों की उदारवादी परंपरा तथा स्वतंत्रता आंदोलन के आदर्शों की विरासत, सामाजिक सद्भावना, संविधान एवं लोकतंत्र के लिए जागरूक करना और किसानों, मजदूरों, नौजवानों, महिलाओं, दलितों, आदिवसियों, अल्पसंख्यकों एवं समाज के सभी कमजोर वर्गों के संवैधानिक अधिकारों व मानवीय गरिमा को सुनिश्चित करने तथा भयमुक्त वातावरण निर्माण के लिए लोगों से संवाद करना है। गांधी विचार और संस्थाओं पर हो रहे हमले के प्रति लोगों को सचेत व संगठित करना इस पदयात्रा का उद्देश्य है।”
उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष रामधीरज कहते हैं, आज की सबसे बड़ी चुनौती कार्पोरेट कंपनियों द्वारा देश की लूट को रोकना है। देश की खनिज संपदा, जमीन, जंगल और जनता के टैक्स का पैसा सब कॉर्पोरेट के हवाले जा रहा है। कार्पोरेट की आमदनी बेतहाशा बढ़ती जा रही है, जबकि गांव, किसान और आदिवासियों की कमाई घट रही है। बेरोजगारी, गरीबी, खेती-किसानी, शिक्षा और स्वास्थ्य के व्यापारीकरण, पर्यावरण के मुद्दों पर हस्तक्षेप करना एवं किसानों, मजदूरों व व्यापारियों की समस्याओं को दूर करने की चेतना जागृत करने की कोशिश इस यात्रा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
वे आगे भी कहते हैं कि, लंबे संघर्ष के बाद आजाद भारत में हमने बिना किसी रूकावट के नागरिक होने और वोट देने का अधिकार प्राप्त किया है। यह हमारा संवैधानिक अधिकार है. हम इस पदयात्रा का उद्देश्य जनता के सभी नागरिक व लोकतांत्रिक अधिकारों को मजबूती से कायम रखना है।
बताते हैं, “यात्रा में हम गांधी विचार और विरासत पर व्यापक चर्चा करेंगे। गांधी जी द्वारा स्थापित साबरमती आश्रम, गुजरात विद्यापीठ और विनोवा भावे व जयप्रकाश नारायण द्वारा स्थापित सर्व सेवा संघ प्रकाशन, जयप्रभा पुस्तकालय, कस्तूरबा बाल विद्यालय, अहिंसा प्रदर्शनी और जयप्रकाश जी द्वारा स्थापित गांधी विद्या संस्थान पर सरकार द्वारा अवैधानिक तरीके से कब्जा करने की चर्चा भी करेंगे। उन्होंने यात्रा को सफल बनाने के लिए सभी सचेत नागरिकों और लोकतांत्रिक संगठनों से पड़ावों की व्यवस्था में सहयोग एवं सहभाग का आहवान किया है।
(संतोष देव गिरी/लालप्रकाश “राही”)