नई दिल्ली। जेएनयू में छात्रसंघ पदाधिकारियों और छात्रों पर हमला करने वाले विद्यार्थी परिषद के लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने की जगह दिल्ली पुलिस ने पीड़ितों को ही न केवल हिरासत में ले लिया बल्कि उनके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज कर दिए।
छात्रसंघ की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 18 अक्टूबर की शाम लगभग 5 बजे सैकड़ों छात्र साबरमती टी-पॉइंट पर इकट्ठा हुए और दिल्ली पुलिस से मांग की कि वह एबीवीपी (ABVP) के उन गुंडों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करे जिन्होंने स्कूल जीबीएमएस के दौरान अलग-अलग स्कूलों में हिंसा फैलाई। हमने देखा कि दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में भी एबीवीपी के इन गुंडों ने खुलेआम जेएनयूएसयू अध्यक्ष और अन्य निर्वाचित प्रतिनिधियों पर हमला किया।
पदाधिकारियों का कहना है कि शनिवार को जब छात्रों का जुलूस जेएनयू के वेस्ट गेट पर पहुंचा, तो दिल्ली पुलिस ने शांतिपूर्ण मार्च कर रहे छात्रों पर बर्बरता से हमला किया। इतना ही नहीं, पुलिस ने कम से कम तीन गुंडों को छात्रों को पीटने की खुली छूट दी।
इस मौके पर जेएनयूएसयू के कार्यवाहक अध्यक्ष कॉमरेड नितीश को बुरी तरह पीटा गया। एसपीएस के कार्यवाहक काउंसलर कॉमरेड अभिषेक को पुलिस ने बेरहमी से पेट और निजी अंगों पर मारा, जिससे उन्हें गंभीर अंदरूनी चोटें आईं और वे बेहोश हो गए। उन्हें तत्काल Safdarjung Hospital ले जाया गया। कार्यवाहक जेएनयूएसयू उपाध्यक्ष और महासचिव कॉमरेड मनीषा और कॉमरेड मुंतेहा के साथ-साथ कॉमरेड रणविजय, सूरज, गगन, संतोष, मणिकांत, सौर्य और कैवल्य को भी पुलिस ने बुरी तरह पीटा और घसीटकर ले गई।
इतना ही नहीं, पुलिस ने वेस्ट गेट से 28 छात्रों का अपहरण कर उन्हें Kapashera Border Police Station ले गई। रात 2 बजे तक किसी को भी रिहा नहीं किया गया था।
छात्र नेताओं का कहना है कि दिल्ली पुलिस के एजेंटों ने कॉमरेड नितीश और अन्य छात्रों के फोन तक चुरा लिए। कार्यवाहक जेएनयूएसयू के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महासचिव समेत 25 अन्य शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों को गिरफ्तार कर लिया गया।
विडंबना यह है कि भाजपा की दिल्ली पुलिस ने जहां छात्रों की शिकायत दर्ज करने में मदद करनी चाहिए थी, वहीं उसने प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाईं और संघी गुंडों को खुली छूट दी कि वे जेएनयूएसयू अध्यक्ष और छात्रों पर उनके सामने ही हमला करें।
छात्रों का कहना है कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि एबीवीपी ने छात्रों और प्रतिनिधियों के खिलाफ जातिवादी, महिला विरोधी और इस्लामोफोबिक बयान दिए हैं। इससे साफ़ झलकता है कि भाजपा राज में दिल्ली पुलिस पूरी तरह से सांप्रदायिक और पक्षपाती हो चुकी है।
उनका कहना है कि अगर 16 अक्टूबर की सुबह जेएनयूएसयू अध्यक्ष और छात्रों पर एबीवीपी के गुंडों के हमले को रोकने में दिल्ली पुलिस ने इतनी ही तत्परता दिखाई होती, तो असली अपराधी अब तक जेल में होते।
अब तक न तो 28 छात्रों को रिहा किया गया है और न ही यह स्पष्ट किया गया है कि उन्हें कब रिहा किया जाएगा। यहां तक कि महिला छात्रों को भी सूर्यास्त के बाद रिहा नहीं किया जा रहा, जबकि यह अवैध है।
छात्रों ने जब यह पूछा कि एबीवीपी के खिलाफ, उनके हिंसक कृत्यों के सारे सबूत मिलने के बावजूद, कार्रवाई क्यों नहीं की गई, तो दिल्ली पुलिस ने कोई जवाब नहीं दिया।
(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)