बिहार : फाइनल वोटर लिस्ट में नाम कटने वालों को सरकारी सुविधा से महरूम होने का डर

अररिया। ‘मैंने और मेरे पति दोनों ने ही एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान सारे दस्तावेज दो बार जमा किए, लेकिन फाइनल लिस्ट में फिर भी हमारा नाम नहीं आया है’। यह कहना है रुबिता देवी का। जो अररिया विधानसभा के बीड़ी नवटोली गांव की रहने वाली हैं।

इस गांव में कई लोगों के नाम लिस्ट में नहीं आए हैं। जनचौक की टीम ने यहां गांव के लोगों से जाकर इसके बारे में जानकारी ली।

अररिया शहर से यह लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ बीडी नवटोली गांव। जहां खेतों में धान के साथ-साथ बांस के पेड़ भी लग हुए हैं। बीडी नवटोली एक बड़ा गांव है जिसके पश्चिमी भाग के लोगों के नाम लिस्ट से कट चुके हैं। हम जैसे ही गांव के पश्चिम भाग में पहुंचते हैं हमें सबसे पहले रुबिता मिलती है।

पंजाब में करते हैं काम

वह हमें देखते ही कहती हैं मेरा और मेरे पति का नाम नहीं आया है। वह पक्के घर के ढांचे के पीछे एक मिट्टी के मकान पर हमें लेकर जाती है। यही उसका घर है। सरकार की जीविका दीदी योजना के तहत वह बकरियों को पालती हैं और पास में लगभग चार से पांच बकरियां हैं।                                                                                                                                            

रुबिता हमें सारे दस्तावेज एक-एक करके दिखाती हैं। वह बताती हैं कि उनके पति बिमलेश कुमार मंडल पंजाब में काम करते हैं। जुलाई में हुई एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान वह गांव आए थे। एक महीने से ज्यादा यहां रहे और सारे दस्तावेज जमा भी करा कर गए लेकिन सूची में नाम नहीं आया। इसके बाद दोबारा बीएलओ को सारे दस्तावेज दिए फिर भी नाम नहीं आया।

रुबिता के मन में डर है कि अगर उसका नाम वोटर लिस्ट में नहीं जुड़ा तो वह सरकारी लाभ से वंचित रह जाएगी। फिलहाल वह 10 सालों से जीविका दीदी से जुड़ी हैं। लेकिन हाल ही में जीविका दीदियों के दिए दस हजार रुपए उन्हें नहीं मिले।

वह कहती हैं अभी आसपास कई महिलाओं को दस हजार रुपए मिले हैं, मैं इतने सालों से जीविका दीदी से जुड़ी हुई हैं मुझे फिर भी पैसा नहीं मिला। फिलहाल राशन मिल रहा है और आगे मिलेगा कि नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है।

बिमलेश मंडल फिलहाल पंजाब में मजदूरी कर रहे हैं। वह लगातार गांव के बीएलओ और सामजिक संगठन के लोगों को कह रहे हैं कि किसी तरह उनका नाम वोटर लिस्ट में जुडवा जाए।

वह मुझे भी फोन कर कहते हैं ‘यहां से बार-बार आना संभव नहीं है अगर किसी तरह संभव है तो बीएलओ को कह कर हमलोगों का नाम जुडवा दीजिए नहीं तो हमारे लिए बहुत मुश्किल हो जाएगा।

इस लिस्ट में नाम कटने वाले ज्यादातर लोगों को डर है कि वह सरकारी लाभ से वंचित हो जाएंगे।

दस्तावेज जमा के बाद भी नाम कटा

इसी गांव में रहने वाली कंचन देवी और  किरन देवी की भी यही परेशानी है। दोनों के ही लिस्ट में नाम नहीं आए हैं और पति भी पंजाब में काम करते हैं।

किरन बताती हैं कि पहली बार सूची में नाम नहीं आया तो हमने बीएललो को इसकी सूचना दी और सारे दस्तावेज दोबारा जमा किए। लेकिन आखिरी सूची में नाम नहीं आया। इसके बाद गांव के ही एक लड़के की मदद से फिर से सारी प्रक्रिया पूरी की। लेकिन नाम तो नहीं आया।

मैंने किरन का नाम स्वयं वोटर हेल्फलाइनर ऐप पर चेक किया तो पहले तो कोई डेटा नहीं मिला। उसके बाद रेफरल नंबर देने पर पता चला कि ईपीक जनरेट हो चुका है।

लेकिन किरन के मन में अब भी डर है वह वोट दे पाएंगी की नहीं?, लेकिन पति सुरेंद्र गौसाई का नाम अभी भी लिस्ट में नहीं आया है।

आपको बता दें कि स्पेशल इंन्टेसिव रिवीजन की प्रक्रिया जुलाई से बिहार में शुरु की गई थी। इसके बाद चुनाव आयोग के आदेश के बाद अन्य राज्यों में भी की जाएगी।

बिहार में हुए एसआईआर की प्रक्रिया के फाइनल लिस्ट में लाखों लोगों का नाम काटा गया है। इसमें सीमांचल के सभी चार जिलों किशनगंज, कटिहार, अररिया और पूर्णिया में छह लाख 97 हजार 727 मतदाताओँ के नाम सूची से काट दिए गए हैं। जिसमें वो लोग शामिल हैं जिनकी मृत्यु हो गई, पलायन कर गए और दो जगह सूची में नाम है। इसके अलावा कुछ लोग बीड़ी नवटोला गांव के लोगों जैसे भी हैं।

सामजिक कार्यकर्ता कर रहे हैं लोगों की मदद

अररिया में जन जागरण शक्ति संगठन लोगों को नाम शामिल करने का काम कर रहा है। पवन पासवान संगठन के सामजिक कार्यकर्ता हैं और बीड़ी नवटोला के ही रहने वाले हैं।

उन्होंने हमसे बात करते हुए बताया कि ‘पहली बार ड्राफ्ट सूची के दौरान कई लोगों के नाम नहीं आएं थे। जिसके बाद हमने गांव-गांव में जाकर लोगों के दस्तावेजों के जमा कराया। जिसके कारण फाइनल लिस्ट में नाम आए हैं। लेकिन अभी भी कुछ बाकी हैं।

वह कहते हैं कि एक अक्टूबर को एक फाइनल लिस्ट के बाद मैंने स्वयं लोगों के दस्तावेजों को जमा कराया फिलहाल कुछ का ईपीएक जनरेट हो गया है। कुछ का अभी भी बाकी है।

हमने उनसे बीएलओ के काम के बारे में पूछा तो वह कहते हैं ‘बीएलओ सभी मतदाताओं के घर नहीं गए हैं। गांव के चौक-चौराहे पर बैठकर वह लोगों को सूचित करते थे कि वहां आकर सारे दस्तावेज जमा कराएं। लोगों ने जमा भी कराएं लेकिन अभी भी कुछ बाकी रह गए हैं। 

(अररिया से पूनम मसीह की रिपोर्ट।)

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