गुजरात में किसानों पर दोहरी मार: बेमौसम बारिश से फसलें बर्बाद, कर्ज़ के बोझ से आत्महत्याएँ बढ़ीं

अहमदाबाद : 3 नवम्बर को गीर सोमनाथ जिले के रेवाड़ गाँव के रहने वाले 49 वर्षीय गफ्फार मूसा उनाड गाँव ने अपने ही ट्यूबवेल में डूबकर जान दे दी। रेवाड़ ने अपने 9 बीघा खेत में 2 लाख का कर्ज़ लेकर मूंगफली की बोवाई की थी। उन्हें आशा थी कि खेती अच्छी होगी और वह क़र्ज़ चुकाने के साथ साथ अपनी बेटी का विवाह भी कर देंगे। लेकिन बेमौसम बरसात ने तैयार फसल को नष्ट कर दिया। रेवाड़ इस झटके को बर्दाश्त नहीं कर पाए और आत्महत्या कर ली।

रेवाड़ से पहले 31 अक्तूबर को देवभूमि द्वारका ज़िला के जामपरा गाँव के करसन भाई ववनोतरा की लाश एक तालाब से मिली थी। वह 27 अक्तूबर से गायब थे। 37 वर्ष के करसन भाई ने भी खेती के लिए साहूकार से पैसे लिए थे। उन्होंने पत्नी का गहना भी गिरवी रख कर क़र्ज़ लेकर कपास और मूंगफली की बोवाई की थी। लेकिन 20 बीघा खेती रखने वाले किसान करसन भाई क़र्ज़ का बोझ उठा नहीं पाए और डूबकर जान दे दी।

गुजरात के किसानों को इस समय दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ अमेरिका के लिए भारत सरकार ने कपास के आयात को ड्यूटी फ्री कर दिया है तो दूसरी तरफ किसानों की फसल बेमौसम बरसात के कारण तैयार फसल नष्ट हो रही है। पिछले 10 वर्षों में अक्तूबर महीने में सबसे अधिक बरसात इस वर्ष हुई है। इस अक्तूबर में 3.25 इंच बारिश हुई है। गुजरात में इससे पहले 2016 में 2.91 इंच बरसात हुई थी। उस समय भी किसानो का बड़ा नुक्सान हुआ था।

गुजरात प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल को एक पत्र लिखकर तुरंत मुआवज़ा देने की मांग की है। चावड़ा ने पत्र में लिखा है कि “आप जानते हैं कि बेमौसम बरसात के कारण गुजरात के किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। क़र्ज़ में डूबे किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। कांग्रेस संपूर्ण क़र्ज़ माफ़ी की मांग करती है। कांग्रेस के विधायक अपनी सैलरी किसानों के हित में सरकार को सहयोग के रूप देने की सहमति दे चुके है।”

कांग्रेस ने 29 अक्तूबर को “कृषक आन्दोलन” के रूप में बोटाद में किसान महा पंचायत कर नष्ट फसलों का सही मुआवज़ा और कपास का सही भाव तय करने की मांग की थी।

इससे पहले आम आदमी पार्टी ने भी 12 अक्तूबर को किसान महा सम्मलेन का आह्वान किया था लेकिन पुलिस अनुमति न होने के कारण आप के किसान नेताओं और पुलिस में टकराव हो गया पुलिस ने लाठी चार्ज करने के अलावा एफआईआर दर्ज कर 85 किसानों और आप नेताओं को आरोपी बनाया था। इस घटना के बाद आप किसान नेता राजू करपाड़ा सहित कई लोगों की गिरफ़्तारी हुई है।

मुआवज़ा और कपास जैसी फसलों के सही भाव तय करने की मांग के साथ आम आदमी पार्टी ने 31 अक्तूबर को बोटाद में किसान महापंचायत का आयोजन किया था। इस सम्मलेन में अरविन्द केजरीवाल और भगवंत मान भी उपस्थित रहे थे।

किसानों के मुद्दे पर ही 6 नवंबर से गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति ने “किसान आक्रोश” यात्रा शुरू की है। जिसकी शुरुआत गीर सोमनाथ दर्शन सभा के साथ हुई।

कांग्रेस सेवादल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी देसाई ने बताया कि “हमारी सरकार से 5 मांगें हैं: किसानों का संपूर्ण कर्ज़ा माफ़ हो, बेमौसम बरसात से फसली नुकसान की संपूर्ण भरपाई हो, फसली बीमा योजना पुनः आरंभ की जाये, पशुचारा, घास में सब्सिडी और दूध की एमएसपी जाहिर की जाये, बलपूर्वक किसानों की ज़मीन लेकर उद्योगपतियों को दिया जाना बंद किया जाए।

11 जिलों से होते हुए यात्रा का समापन 13 नवंबर को द्वारका में होगा।

विपक्ष के विरोध और दबाव के बाद सरकार झुकती भी दिख रही है। सबसे अधिक प्रभावित सौराष्ट्र क्षेत्र है। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, कृषि मंत्री जीतू वाघनी और वन पर्यावरण मंत्री अर्जुन भाई मोढवाडिया ने सौराष्ट्र कच्छ का दौरा कर फसलों का सर्वे करने और उचित मुआवज़ा का वादा भी किया है।

सौराष्ट्र में किसान आन्दोलन का अधिक असर दिख रहा है लेकिन बेमौसम फसली नुकसान दक्षिण और उत्तर में भी हुआ है। उत्तर गुजरात के प्रांतिज तहसील के वडवासा गाँव की सरपंच सत्येशा लेउवा का कहना ऐसी परिस्थिति में सर्वे की कोई ख़ास आवश्यकता नहीं है। सरकार को फसली नुकसान की पूरी जानकारी है। सर्वे में समय लगता है। ग्राम सेवक जो सरकारी कर्मचारी होता है। सर्वे को प्राथमिकता नहीं देते हैं।

उन्होंने कहा, “हमारे गाँव के किसान और मैं खुद कई बार ग्राम सेवक को सर्वे के लिए फोन कर रही थी लेकिन उनके पास दूसरे काम होने के कारण आ नहीं रहे थे तो हम लोगों ने रविवार के दिन सर्वे करवाया” सत्येशा का भी मानना है कि तुरंत क़र्ज़ माफ़ी हो तो किसान आत्म हत्या को टाला जा सकता था।

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