महाराष्ट्र के फलटण में डॉ. संपदा मुंडे की आत्महत्या को “संस्थानिक हत्या” करार देते हुए, इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सज़ा की मांग करते हुए अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (ऐडवा) ने मंगलवार (11 नवंबर) को मुंबई के आजाद मैदान पर प्रदर्शन किया।
समिति ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी वर्ग, वर्दी में अपराधी पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने गरीबी से शिक्षा प्राप्त कर सरकारी डॉक्टर बनने वाली संपदा की प्रताड़ना की शिकायतों की अनदेखी कर उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर किया।
समिति ने मृत्यु के बाद भी पीड़िता को नये देने के बजाय चारित्रहनन करने का आरोप महिला आयोग की रूपाली चाकणकर पर लगाया। समिति ने आरोप लगाया कि पुलिस तंत्र, जिसका काम जनता की मदद और सुरक्षा करना है, अपराध में शामिल हो गया।
समिति ने कोई जांच किए बिना पूर्व सांसद को क्लीन चिट देने को लेकर मुख्यमंत्री की आलोचना भी की।
प्रकरण की जांच न्यायालयीन निगरानी में कराने, अपराधियों को कड़ी सज़ा दिलाने और रूपाली चाकणकर के इस्तीफे की मांग इस अवसर पर प्रदर्शनकारियों ने की।
फलटण उपजिला अस्पताल में कार्यरत डॉ. संपदा ने आत्महत्या से पूर्व अपनी हथेली पर लिखा था, “मेरी मौत का कारण पुलिस उप निरीक्षक गोपाल बदने है जिसने मेरे साथ चार बार बलात्कार किया। इसके अलावा प्रशांत बनकर ने भी शारीरिक, मानसिक प्रताड़ना दी।”
इससे पूर्व जून में पुलिस उपाधीक्षक से की शिकायत में उन्होंने कहा था कि उन पर पुलिस द्वारा एक पीटे गए व्यक्ति को फिटनेस सर्टिफिकेट देने के लिए दबाव डाला जा रहा था। उसमें उन्होंने तीन पुलिस अधिकारियों के नाम भी दिए थे। एक चार पृष्ठों के पत्र में भाजपा के पूर्व सांसद और उनके दो निजी सहायकों का नाम भी डॉ. संपदा ने लिया था।