सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया ने बुधवार को मांग की कि महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार को इस्तीफा दे देना चाहिए और उनके बेटे पार्थ का नाम करोड़ों के पुणे जमीन सौदे में अनियमितताओं के आरोपों के संबंध में की गई एफआईआर में शामिल किया जाए।
पार्थ पवार का अमादेय इंटरप्राईज़ेस एलएलपी में 99 फीसदी हिस्सेदारी है, इसी फर्म ने पुणे में कोरेगाँव पार्क इलाके में मुँदहवा में 40 एकड़ जमीन की खरीद की थी।
विपक्ष का आरोप है कि 1800 करोड़ की जमीन अमेडेय इंटरप्राईजेस एलएलपी को 300 करोड़ में बेची गई और उस पर 21 करोड़ की स्टाम्प ड्यूटी माफ कर दी गई। जमीन महार वतन जमीन है और नियमानुसार इस श्रेणी की जमीन राज्य सरकार की पूर्वानुमति के बिना नहीं बेची जा सकती।
इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार दमानिया ने कहा कि “अजित और पार्थ पवार 40 एकड़ की जमीन के सौदे के बारे में जानते थे इसलिए उन्हें बिना किसी जांच या सज़ा के नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच अजित पवार ने मुद्दे से खुद को अलग करने की कोशिश की है और कहा है, “जमीन सौदे में मेरी कोई भूमिका नहीं है। फिर भी मुझे विवाद में घसीटा जा रहा है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके बड़े बेटे पार्थ को भी जमीन सौदे के बारे में पता नहीं था।
दमानिया ने कहा, “इस आकार का जमीन सौदा बिना किसी राजनीतिक सरपरस्ती के नहीं हो सकता।“
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने पुणे जमीन सौदे के लिए जिम्मेदार सभी के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया है। फड़नवीस ने कहा है कि महार वतन जमीन सौदे के खिलाफ आपराधिक मामला जमीन सौदा रद्द किए जाने के बावजूद जारी रहेगा। जो भी इसके लिए जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
मीडिया में आई खबरों के अनुसार दमानिया ने राजस्व मंत्री बावनकुले से मुलाकात की और मुलाकात के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा कि अजित पवार को अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस भी नहीं बचा पाएंगे। उन्होंने कहा कि वह सिंचाई घोटाले, महाराष्ट्र सहकारी बैंक घोटाले और इस घोटाले को लेकर उच्च न्यायालय जाएंगी।
इस बीच, इस पर मीडिया के अजित पवार से प्रतिक्रिया मांगने पर उन्होंने कहा कि वह अपने विवेकानुसार जो सही समझेंगे, फैसला करेंगे।